NEET UG : मेडिकल छात्रों की लगी लॉटरी देशभर में बढ़ेंगी MBBS की हजारों सीटें, NMC ने नियमों में किए 3 बड़े बदलाव
News India Live, Digital Desk: नीट यूजी (NEET UG) की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए केंद्र सरकार और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने खुशियों का पिटारा खोल दिया है। देश में डॉक्टरों की कमी को दूर करने और मेडिकल शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए सरकार ने एक साथ कई बड़े कदम उठाए हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एमबीबीएस (MBBS) की सीटों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होने जा रही है। नए मेडिकल कॉलेजों की मंजूरी और मौजूदा कॉलेजों में सीटों के विस्तार के लिए नियमों को बेहद लचीला बना दिया गया है, जिससे अब डॉक्टर बनने का सपना देखना और भी आसान हो जाएगा।
देशभर में 1.29 लाख के पार पहुँची MBBS सीटें
केंद्र सरकार द्वारा राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, देश में मेडिकल कॉलेजों और सीटों की संख्या में पिछले 10 वर्षों में 150% से अधिक की वृद्धि हुई है। साल 2026 तक भारत में कुल एमबीबीएस सीटों की संख्या 1,29,603 तक पहुँचने का अनुमान है। इसमें से करीब 63,683 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेजों में होंगी, जो कि आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। सरकार ने 43 नए मेडिकल कॉलेजों को भी हरी झंडी दे दी है, जिससे मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या अब 822 के पार पहुँच जाएगी।
NMC के 3 बड़े बदलाव: अब नहीं रुकेगी सीटों की रफ्तार
नेशनल मेडिकल कमीशन ने मेडिकल कॉलेजों के लिए जारी नई गाइडलाइंस (UG-MSR 2023) में तीन क्रांतिकारी बदलाव किए हैं, जिनका सीधा फायदा छात्रों को मिलेगा:
150 सीटों की सीमा खत्म: पहले किसी भी मेडिकल कॉलेज के लिए अधिकतम 150 एमबीबीएस सीटों का 'कैप' (Limit) तय था। अब इसे हटा दिया गया है। जो कॉलेज इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी के मानकों को पूरा करेंगे, वे अब 150 से ज्यादा सीटों के लिए आवेदन कर सकेंगे।
प्रति 10 लाख आबादी पर 100 सीटों का नियम स्थगित: एनएमसी ने उस नियम को फिलहाल स्थगित कर दिया है जिसमें किसी राज्य की 10 लाख आबादी पर केवल 100 एमबीबीएस सीटें ही आवंटित की जा सकती थीं। इससे दक्षिण भारतीय राज्यों और बड़े राज्यों में नए कॉलेज खुलने का रास्ता साफ हो गया है।
नए कॉलेजों के लिए आसान मानक: अब 50, 100 और 150 सीटों के साथ नया कॉलेज शुरू करना आसान होगा। यदि कॉलेज के पास पर्याप्त बेड और क्लिनिकल डेटा है, तो वे सीधे ज्यादा सीटों के साथ शुरुआत कर सकते हैं।
क्षेत्रीय असमानता को दूर करने पर जोर
सरकार का मुख्य फोकस उन क्षेत्रों पर है जहाँ अब तक कोई मेडिकल कॉलेज नहीं था। 'एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स' (Aspirational Districts) और ग्रामीण इलाकों में जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों से जोड़कर नई सीटें तैयार की जा रही हैं। इससे न केवल छात्रों को घर के पास शिक्षा मिलेगी, बल्कि उन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। सरकार ने इसके लिए 41,000 करोड़ रुपये से अधिक का बजट भी आवंटित किया है।
छात्रों के लिए क्या हैं इसके मायने?
सीटों में इस भारी बढ़ोतरी का सीधा असर नीट यूजी कट-ऑफ (Cut-off) पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सीटों की संख्या बढ़ने से प्रतियोगिता का दबाव थोड़ा कम होगा और 550 से 600 अंक प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए भी सरकारी कॉलेज में सीट सुरक्षित करने की संभावना बढ़ जाएगी। हालांकि, छात्रों को सलाह दी गई है कि वे काउंसलिंग प्रक्रिया और जोसा (JoSAA) या एमसीसी (MCC) के नियमों पर पैनी नजर रखें ताकि सीट अलॉटमेंट के समय किसी तकनीकी गलती से उनका साल बर्बाद न हो।