NATO in Turmoil : रूसी ड्रोन पोलैंड में घुसे, हमले के बाद 4 एयरपोर्ट बंद, तनाव चरम पर

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News India Live, Digital Desk: NATO in Turmoil :  रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अब तक की सबसे बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है. नाटो (NATO) सदस्य देश पोलैंड ने दावा किया है कि यूक्रेन पर हमले के दौरान कई रूसी ड्रोन उसके हवाई क्षेत्र में घुस आए. इस घुसपैठ के जवाब में पोलैंड ने कड़ा कदम उठाते हुए न केवल उन ड्रोनों को मार गिराने की बात कही है, बल्कि अपनी राजधानी वारसॉ समेत 4 प्रमुख हवाई अड्डों को भी बंद कर दिया है.

इस घटना ने पूरे यूरोप में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है क्योंकि यह पहली बार है जब नाटो के किसी सदस्य देश ने सीधे तौर पर रूसी सैन्य संपत्ति के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की है.

पोलैंड ने क्या कहा?

पोलैंड की सेना ने एक बयान जारी कर कहा है कि यह घुसपैठ "देश की संप्रभुता का खुला उल्लंघन" है. प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए लिखा, "सेना ने पोलैंड के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने वाली वस्तुओं (ड्रोन) के खिलाफ हथियारों का इस्तेमाल किया है."

यह घटना उस वक्त हुई, जब रूस पड़ोसी यूक्रेन के पश्चिमी इलाकों पर, जो पोलैंड की सीमा के बहुत करीब हैं, बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल से हमला कर रहा था. पोलैंड के मुताबिक, उसने एक दर्जन से ज्यादा ऐसी वस्तुओं को ट्रैक किया, जिनसे खतरा महसूस हुआ और उन्हें "बेअसर" कर दिया गया.

सुरक्षा के लिए उठाए गए बड़े कदम

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पोलैंड ने तुरंत अपने हवाई सुरक्षा सिस्टम को सक्रिय कर दिया और नाटो को भी अलर्ट पर रखा. एहतियात के तौर पर, चार प्रमुख हवाई अड्डों को बंद करने का फैसला लिया गया:

  • वारसॉ चोपिन एयरपोर्ट (राजधानी)
  • वारसॉ मोडलिन एयरपोर्ट
  • रेज़ज़ो-जेसियोनका एयरपोर्ट (यूक्रेन के लिए मदद पहुंचाने का एक बड़ा केंद्र)
  • ल्यूबेल्स्की एयरपोर्ट

इन हवाई अड्डों को "अघोषित सैन्य गतिविधि" के कारण बंद किया गया है, ताकि किसी भी तरह के खतरे से बचा जा सके.

क्यों है यह घटना बेहद गंभीर?

पोलैंड नाटो का सदस्य है. नाटो के नियम के अनुसार, किसी भी एक सदस्य देश पर हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि रूस ने यह जानबूझकर किया या गलती से, लेकिन नाटो क्षेत्र में रूसी ड्रोन का घुसना और फिर उसे मार गिराया जाना, युद्ध के और ज्यादा भड़कने का खतरा पैदा करता है.

अमेरिका समेत दुनिया के कई देश इस घटना पर करीब से नजर बनाए हुए हैं. अमेरिकी अधिकारियों ने इसे व्लादिमीर पुतिन द्वारा नाटो की एकता और संकल्प की "परीक्षा" लेने की कोशिश बताया है. इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह युद्ध अब यूक्रेन की सीमाओं से बाहर निकलकर नाटो देशों तक पहुंचने वाला है?