'बेटों को भी सेना में भेजेंगे', ऑपरेशन सिंदूर के वीर बलिदानियों की गाथा सुन गदगद हुआ देश; वीरांगनाओं का संकल्प बना मिसाल
'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले जांबाज सैनिकों की शौर्य गाथाएं आज पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं। सरकार ने भले ही अब उन्हें औपचारिक रूप से 'बलिदानी' का दर्जा दिया हो, लेकिन इन वीर परिवारों के लिए तो वे पहले दिन से ही अमर हैं। हिमाचल, हरियाणा, बिहार, राजस्थान और अन्य राज्यों के इन परिवारों का सीना दुख से कहीं अधिक गर्व से फूला हुआ है। कांगड़ा के सूबेदार पवन कुमार जरयाल की वीरांगना सुषमा का कहना है, 'जब उनके घायल होने की सूचना मिली थी, तभी हमने मान लिया था कि वे देश के हो चुके हैं। यदि मेरे बच्चे सेना में जाना चाहें, तो मैं उन्हें गर्व के साथ आशीर्वाद दूंगी।'
अदम्य साहस की अनकही कहानियां इन वीरों की वीरता के किस्से किसी को भी भावुक कर देने वाले हैं। हेडक्वार्टर 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड के सूबेदार मेजर पवन कुमार जरयाल ने 9 मई 2025 को पुंछ सेक्टर में दुश्मन की गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब दिया था। इसी तरह, हरियाणा के लांस नायक दिनेश कुमार शर्मा की पत्नी सीमा देवी, जो पति के बलिदान के समय गर्भवती थीं, आज अपने बेटे को भी सेना में भेजने का दृढ़ संकल्प ले चुकी हैं। उनका परिवार गर्व से कहता है कि दिनेश का नाम अब राष्ट्रीय समर स्मारक के 'त्याग चक्र' में हमेशा के लिए अमर हो गया है।
अंतिम सांस तक लड़े, बचाई साथियों की जान बिहार के बक्सर के हवलदार सुनील कुमार सिंह यादव की वीरता का किस्सा तो हर किसी के रोंगटे खड़े कर देता है। राजौरी सेक्टर में जब पाकिस्तानी ड्रोनों ने हमला किया, तो सुनील ने अपनी जान की परवाह किए बिना खुले में आकर फायरिंग शुरू की। उन्होंने न केवल साथियों को सचेत किया, बल्कि अपनी शहादत देकर कई जवानों की जान बचाई। मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित सुनील की पत्नी सुजाता देवी का कहना है कि उनके पति ने देश के लिए हंसते-हंसते जान दी, और अगर देश को जरूरत पड़ी तो वे अपने दोनों बेटों को भी देश के लिए समर्पित कर देंगी।
इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगी वीरता राजस्थान के झुंझुनूं निवासी सार्जेंट सुरेंद्र कुमार मोगा की वीरांगना सीमा देवी का कहना है कि उन्हें सरकार से कोई शिकायत नहीं, बस इस बात का सुकून है कि उनके पति के बलिदान को देश ने उचित सम्मान दिया है। वहीं, वीर चक्र से सम्मानित राइफलमैन सुनील कुमार के माता-पिता का कहना है कि बेटे के बिछुड़ने का गम तो आजीवन रहेगा, लेकिन उसका नाम देश के महान वीरों में शामिल होना उनके परिवार के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। ये परिवार आज न केवल अपने वीर सपूतों को याद कर रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए देशभक्ति की एक नई परिभाषा भी लिख रहे हैं।