दमोह में कुत्ते-बिल्लियों को लेकर क्यों बरतनी होगी सावधानी? रेबीज से बचाव के लिए वैक्सीनेशन तेज
देशभर में करोड़ों लोग जानवरों से प्यार करते हैं. पालतू कुत्ते-बिल्लियों को घर का सदस्य भी मानते हैं. लेकिन यही जानवर कभी-कभी रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी की वजह भी बन सकते हैं. दमोह में भी लोगों को इस खतरे को लेकर सावधान किया जा रहा है. खासकर पालतू जानवरों को समय पर वैक्सीन लगवाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि रेबीज का संक्रमण इंसानों और दूसरे जानवरों तक पहुंचने से रोका जा सके.
घरों में पाले जाने वाले कुत्तों और बिल्लियों में भी रेबीज का खतरा रहता है. पशु चिकित्सकों ने बताया कि अगर किसी जानवर के व्यवहार में अचानक बदलाव आए, वह ज्यादा आक्रामक हो जाए, बेचैन रहे, अजीब आवाजें निकाले या पानी पीने में परेशानी दिखे, तो सावधान होना चाहिए. रेबीज संक्रमित जानवर के काटने या उसकी लार के संपर्क से फैल सकता है. इसलिए दमोह में ऐसे मामलों में लापरवाही नहीं करने की सलाह दी जा रही है.
रेबीज के आंकड़े चिंता बढ़ाते
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया में हर साल रेबीज से करीब 59 से 60 हजार लोगों की मौत होती है. भारत में भी इसका असर गंभीर है. आंकड़ों के मुताबिक, देश में हर साल करीब 18 से 20 हजार लोगों की मौत रेबीज की वजह से होने का अनुमान है. यह आंकड़ा दुनिया में होने वाली रेबीज से मौतों का एक बड़ा हिस्सा है. बीमारी के लक्षण सामने आने के बाद यह लगभग हमेशा घातक होती है, इसलिए समय पर इलाज बेहद जरूरी है.
समय पर इलाज से बचाव संभव
रेबीज के मामले में सावधानी ही सबसे जरूरी कदम है. जानवर के काटने के बाद घाव की सही सफाई, तुरंत चिकित्सकीय सलाह और जरूरत के मुताबिक पोस्ट-एक्सपोजर वैक्सीनेशन संक्रमण को रोकने में मदद कर सकता है. दमोह जैसे इलाकों में जहां आबादी के आसपास बड़े वन क्षेत्र भी हैं, जानवरों की आवाजाही पर नजर रखना जरूरी है. जंगलों में संक्रमित जानवरों के संपर्क से दूसरे जानवरों में संक्रमण फैलने की आशंका रहती है, जिससे इंसानों तक खतरा पहुंच सकता है.
जंगलों से सटे इलाकों में ज्यादा चिंता
मध्य प्रदेश का दमोह जिला बड़े वन क्षेत्रों से घिरा हुआ है. जिले के आसपास पन्ना टाइगर रिजर्व और रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व जैसे वन क्षेत्र मौजूद हैं. ऐसे में जंगली जानवरों और आबादी वाले इलाकों में रहने वाले जानवरों के बीच संपर्क की संभावना बनी रहती है. मिली जानकारों के मुताबिक, जंगलों में संक्रमित जानवरों के कारण आसपास के पशुओं में भी रेबीज फैलने का खतरा हो सकता है. इसलिए दमोह में सतर्कता और भी जरूरी मानी जा रही है.
दमोह में वैक्सीनेशन पर जोर
इन हालात को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें रेबीज की रोकथाम के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं. मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पालतू और अन्य जानवरों के लिए वैक्सीनेशन कैंप लगाए जा रहे हैं. दमोह में भी पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ओर से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. विश्व रेबीज दिवस के मौके पर लगाए गए वैक्सीनेशन कैंप में पशुपालक अपने जानवरों को लेकर पहुंचे. विभाग लोगों को वैक्सीनेशन के महत्व की जानकारी दे रहा है.
पशुपालकों में भी दिखी जागरूकता
सरकार के जागरूकता अभियान का असर दमोह में भी दिखाई दे रहा है. लोग अपने पालतू जानवरों की सुरक्षा के साथ अपनी और परिवार की सुरक्षा को लेकर भी सतर्क हो रहे हैं. विश्व रेबीज दिवस के मौके पर आयोजित वैक्सीनेशन कैंप में पशुपालकों का उत्साह देखने को मिला. डॉ. के.पी. कुर्मी, उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, दमोह ने भी लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी.