हम 1 रुपया देते हैं, लौटते हैं सिर्फ 26 पैसे', राज्यसभा में टैक्स बंटवारे को लेकर भिड़े DMK और AIADMK

हम 1 रुपया देते हैं, लौटते हैं सिर्फ 26 पैसे', राज्यसभा में टैक्स बंटवारे को लेकर भिड़े DMK और AIADMK

संसद के उच्च सदन राज्यसभा में वित्तीय संसाधनों के बंटवारे और राज्यों को मिलने वाले फंड को लेकर दक्षिण भारत की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। तमिलनाडु के वित्तीय योगदान और केंद्र से मिलने वाले करों (Tax Devolution) के हिस्से को लेकर राज्य की दो विरोधी पार्टियों—DMK (द्रमुक) और AIADMK (अन्नाद्रमुक) के सांसदों के बीच तीखी नोकझोक देखने को मिली। सदन में यह मुद्दा तब उठा जब तमिलनाडु के पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने केंद्र सरकार द्वारा राज्य को मिलने वाले राजस्व आवंटन के आंकड़ों पर आमने-सामने आकर जोरदार बहस की, जिससे सदन का माहौल काफी गर्म हो गया।

क्या है '1 रुपये बनाम 26 पैसे' का पूरा गणित और विवाद?

बहस के दौरान डीएमके सांसदों ने कड़ा रुख अपनाते हुए तर्क रखा कि तमिलनाडु केंद्र सरकार को करों के रूप में भारी-भरकम राशि यानी पूरा 1 रुपया देता है, लेकिन इसके बदले में उसे रिटर्न या टैक्स डिवोल्यूशन के रूप में मात्र 26 पैसे ही वापस मिलते हैं। पार्टी का आरोप है कि आर्थिक रूप से मजबूत और बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के साथ इस तरह का वित्तीय वितरण अन्यायपूर्ण है। वहीं दूसरी ओर, एआईएडीएमके के नेताओं ने इस बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि राज्य के अधिकारों और आर्थिक हितों के नाम पर सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी की जा रही है, जबकि केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं के जरिए राज्य के विकास में पूरा सहयोग दे रही है।

दक्षिण भारत की राजनीति और वित्तीय संघवाद पर असर

संसद के पटल पर हुआ यह टकराव इस बात का प्रमाण है कि देश में वित्तीय संघवाद (Fiscal Federalism) और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों का मुद्दा कितना संवेदनशील बन चुका है। गैर-भाजपा शासित राज्यों द्वारा टैक्स के हिस्से को लेकर उठने वाली आवाजें अक्सर राष्ट्रीय राजनीति की सुर्खियों में रहती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में तमिलनाडु की इन दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच यह क्षेत्रीय और आर्थिक मुद्दा चुनावी मैदान में भी एक बड़ा हथियार बन सकता है, जिससे राज्य की राजनीति में गर्माहट बनी रहेगी।

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