23 विधायकों की गैरमौजूदगी पर छलका उद्धव ठाकरे का दर्द, शरद पवार ने भी बनाई दूरी

23 विधायकों की गैरमौजूदगी पर छलका उद्धव ठाकरे का दर्द, शरद पवार ने भी बनाई दूरी

महाराष्ट्र की राजनीति में 'महा विकास अघाड़ी' (MVA) गठबंधन के भीतर की दरारें अब खुलकर सामने आने लगी हैं। आगामी मानसून सत्र की रणनीति बनाने के लिए बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक में गठबंधन के 60 में से 23 विधायकों का नदारद रहना न केवल गठबंधन की कमजोरी को दर्शाता है, बल्कि उद्धव ठाकरे के लिए यह एक बड़ा सियासी झटका भी है। बैठक में शरद पवार, जयंत पाटिल और नाना पटोले जैसे वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति ने गठबंधन के भविष्य पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

'क्या हम सचमुच साथ हैं'

बैठक के दौरान अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए उद्धव ठाकरे ने सीधे सहयोगियों से सवाल किया, "हम कहते हैं कि हम साथ हैं, लेकिन क्या हम वाकई साथ हैं? क्या हम सदन के भीतर एक एकजुट महा विकास अघाड़ी के रूप में काम कर रहे हैं?" उनके इस सवाल ने गठबंधन के भीतर मची खींचतान की पोल खोल दी है। बीते दिनों शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे खेमे में जाने के बाद, अब विधायकों की इस सामूहिक बेरुखी को गठबंधन के अंत की आहट के तौर पर देखा जा रहा है।

जो चले गए, उन्हें जाने दो

उद्धव ठाकरे ने भले ही अपने नेताओं को धैर्य रखने की सलाह दी हो, लेकिन उनका दर्द साफ झलकता दिखा। उन्होंने पार्टी सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि, "जो लोग चले गए हैं, उन्हें जाने दो।" उन्होंने अपने बचे हुए नेताओं और सहयोगियों से एकजुट होकर रैलियां आयोजित करने और जनता के बीच अपनी ताकत दिखाने का आह्वान किया। ठाकरे का जोर इस बात पर है कि गठबंधन को मुद्दों पर एक साथ आना होगा, अन्यथा वैचारिक विरोधाभास और राजनीतिक अवसरवाद की भेंट यह गठबंधन चढ़ जाएगा।

क्या MVA का अंत नजदीक है?

जून 2022 में शिवसेना में हुए विद्रोह और उसके बाद जून 2023 में एनसीपी के भीतर हुई टूट ने महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा पूरी तरह बदल दी थी। वर्तमान में जिस तरह से विधायक और बड़े नेता बैठकों से दूरी बना रहे हैं, वह एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का संकेत हो सकता है। फिलहाल, भले ही किसी अन्य बड़े विद्रोह की आधिकारिक खबर नहीं है, लेकिन विधायकों की यह चुप्पी और बैठकों से नदारद रहना राज्य की सियासत में 'गठबंधन की एकजुटता' को लेकर गंभीर संकट पैदा कर रहा है। देखना यह है कि क्या ठाकरे की यह अपील सहयोगियों को वापस साथ ला पाएगी या MVA का बिखराव अपरिहार्य हो चुका है?

 

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