'TVK विधायकों को खरीदने के लिए दिए जा रहे हैं 70 करोड़ रुपये': सीएम विजय की पार्टी के मंत्री के इस बड़े खुलासे से तमिलनाडु की राजनीति में मचा भूचाल
दक्षिण भारत के सियासी गलियारों, खासकर तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त एक बहुत ही सनसनीखेज और बड़ा भूचाल आया हुआ है। राज्य में सत्ता के समीकरणों, दल-बदल और विधायकों की खरीद-फरोख्त (Horse Trading) को लेकर एक ऐसा विस्फोटक बयान सामने आया है जिसने पूरे राजनीतिक जगत को हिला कर रख दिया है। मुख्यमंत्री थलपति विजय (Thalapathy Vijay) के नेतृत्व वाली 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) पार्टी की सरकार के कानून और बिजली मंत्री निर्मल कुमार (Nirmal Kumar) ने राज्य के दो सबसे बड़े और पारंपरिक राजनीतिक दलों—द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK)—पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। मंत्री निर्मल कुमार ने खुले तौर पर दावा किया है कि विपक्षी दल टीव्हीके (TVK) के विधायकों को तोड़ने और उन्हें अपनी पाला बदलने के लिए 60 से 70 करोड़ रुपये तक की भारी-भरकम घूस की पेशकश कर रहे हैं। इस बड़े दावे के बाद से चेन्नई से लेकर दिल्ली तक की राजनीतिक पार्टियों में हलचल तेज हो गई है। आइए विस्तार से जानते हैं कि तमिलनाडु के इस हाई-वोल्टेज राजनीतिक ड्रामे के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है और इस पर दोनों पक्षों की ओर से क्या प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
मंत्री निर्मल कुमार का बड़ा दावा: DMK और AIADMK पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का गंभीर आरोप
तमिलनाडु की राजनीति में अपनी बेबाकी के लिए जाने जाने वाले कानून और बिजली मंत्री निर्मल कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया साक्षात्कारों के दौरान राज्य की राजनीति की असलियत पर से पर्दा उठाया। उन्होंने सीधे तौर पर डीएमके (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद से ही इन दलों के कुछ एजेंट और नेता लगातार टीव्हीके के विधायकों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं।
मंत्री निर्मल कुमार ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि, "सिर्फ एआईएडीएमके के लोग ही नहीं, बल्कि डीएमके से जुड़े कई संदिग्ध लोग भी इस तरह की अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं और पुलिस ने कुछ मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है, जिनमें करूर जिले के कुछ प्रमुख लोग शामिल हैं।" उन्होंने आगे दावा किया कि विधायकों को खरीदने की यह बोली अब बढ़कर 60 से 70 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, लेकिन इसके बावजूद टीव्हीके का कोई भी वफादार विधायक बिकने वाला नहीं है और न ही कोई अपनी पार्टी छोड़ेगा।
पुलिस की कार्रवाई और सेंथिल बालाजी के भाई का कनेक्शन
विधायकों को खरीदने के इस पूरे खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब कुछ महीने पहले तमिलनाडु पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि इन आरोपियों ने टीव्हीके के एक मौजूदा विधायक को विधानसभा में सरकार के खिलाफ आने वाले अविश्वास प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के पक्ष में वोट देने के एवज में 35 करोड़ रुपये तक की भारी-भरकम पेशकश की थी।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की आंच तब और तेज हो गई जब पुलिस ने इस पूरी साजिश के सिलसिले में पूर्व डीएमके मंत्री वी. सेंथिल बालाजी (V. Senthil Balaji) के भाई के खिलाफ भी औपचारिक रूप से मामला दर्ज किया। इस तरह की घटनाएं यह साबित करती हैं कि तमिलनाडु की राजनीति में सत्ता हासिल करने या सरकार को गिराने के लिए किस हद तक वित्तीय और राजनीतिक दांव खेले जा रहे हैं।
DMK और AIADMK ने आरोपों को सिरे से खारिज किया, सत्ताधारी पार्टी पर किया पलटवार
मंत्री निर्मल कुमार द्वारा लगाए गए इन गंभीर और सनसनीखेज आरोपों के बाद विपक्षी दलों ने भी तुरंत अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सत्ताधारी टीव्हीके सरकार पर जोरदार हमला बोला है। डीएमके (DMK) के आधिकारिक प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन (TKS Elangovan) ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताते हुए खारिज कर दिया।
एलंगोवन ने पलटवार करते हुए कहा कि डीएमके या एआईएडीएमके के पास टीव्हीके के विधायकों को खरीदने की कोई वजह ही नहीं है। उन्होंने इसके उलट सत्ताधारी पार्टी पर ही हॉर्स-ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) का सहारा लेने का आरोप मढ़ दिया। डीएमके नेता ने हाल ही में विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद एआईएडीएमके के छह मौजूदा विधायकों के अचानक इस्तीफे और उनके टीव्हीके पार्टी में शामिल होने के घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि असल में कौन किसके संपर्क में है, यह जनता अच्छी तरह जानती है।
आगामी 13 नवंबर की तारीख क्यों है बेहद अहम? विधानसभा में बहुमत का गणित
तमिलनाडु की राजनीति में यह सारा घमासान इसलिए भी अपने चरम पर है क्योंकि आगामी 13 नवंबर की तारीख बेहद करीब आ रही है। इस विशेष तारीख को मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली टीव्हीके की अल्पमत सरकार द्वारा विधानसभा में अपना बहुमत साबित किए हुए पूरे छह महीने का समय पूरा हो जाएगा। छह महीने की यह समयसीमा पूरी होते ही विपक्ष की ओर से एक बार फिर से विधानसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) लाए जाने की प्रबल संभावना बन गई है।
वर्तमान राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें तो तमिलनाडु की कुल 234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 विधायकों का है। फिलहाल मुख्यमंत्री विजय की पार्टी टीव्हीके के पास अपने 109 विधायक हैं, जो साधारण बहुमत के आंकड़े से 9 सीट कम हैं। हालांकि, सरकार को कांग्रेस, वीसीके (VCK) और आईयूएमएल (IUML) जैसे सहयोगी दलों का मजबूत समर्थन प्राप्त है, जबकि वामपंथी दल (CPI और CPM) इस सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं। इसके बावजूद, विधायकों की इस लुकाछिपी और खरीद-फरोख्त के दावों ने आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर होने वाले फ्लोर टेस्ट को लेकर राजनीतिक सरगर्मी को और अधिक बढ़ा दिया है।