दिल्ली से राजस्थान का सफर अब और भी आसान: नमो भारत ट्रेन से 45 मिनट की दूरी मात्र 24 मिनट में होगी पूरी
दिल्ली-एनसीआर से राजस्थान की तरफ रोज सफर करने वाले लोगों को अक्सर लंबे ट्रैफिक जाम और थकान का सामना करना पड़ता है। लेकिन अब आपका यह सफर बहुत जल्द आसान और आरामदायक होने वाला है। गाजियाबाद और मेरठ के बीच अपनी रफ्तार का जलवा दिखा चुकी 'नमो भारत' (Namo Bharat) ट्रेन अब दिल्ली से राजस्थान के रूट पर भी दौड़ने के लिए तैयार हो रही है। इस नए रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर के बनने से न सिर्फ समय की भारी बचत होगी, बल्कि यात्रा का अनुभव भी पूरी तरह से बदल जाएगा। आइए जानते हैं इस नए रूट, स्टेशनों और टाइमिंग से जुड़ी हर जरूरी बात।
आधे से भी कम समय में पूरा होगा सफर
इस नए प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी और खास बात इसका ट्रैवल टाइम है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस दूरी को तय करने में अभी सड़क मार्ग या सामान्य ट्रेनों से लगभग 45 मिनट का समय लगता है, नमो भारत ट्रेन उसे मात्र 24 मिनट में पूरा कर लेगी। 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली इस ट्रेन के ट्रैक को इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है कि यात्रियों को बिना किसी रुकावट के तेज और सुरक्षित सफर मिल सके।
रूट पर बनेंगे 4 नए स्टेशन
दिल्ली-गुरुग्राम-अलवर (Delhi-Gurugram-Alwar) RRTS कॉरिडोर के तहत राजस्थान को सीधा फायदा मिलने वाला है। इस कॉरिडोर के पहले और दूसरे चरण के काम के साथ ही रूट पर 4 नए स्टेशन बनाने का खाका तैयार किया गया है। इन नए स्टेशनों के बनने से उन इलाकों के लोगों को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, जो अब तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए ऑटो या बसों पर निर्भर थे। यह ट्रेन दिल्ली से निकलकर हरियाणा के औद्योगिक इलाकों से होते हुए सीधे राजस्थान की सीमा में प्रवेश करेगी।
डेली कम्यूटर्स और नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत
दिल्ली और गुरुग्राम में काम करने वाले हजारों लोग हर दिन राजस्थान के अलवर, भिवाड़ी और धारूहेड़ा जैसे इलाकों से अप-डाउन करते हैं। नमो भारत ट्रेन इन डेली कम्यूटर्स के लिए एक वरदान साबित होगी।
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ट्रैफिक से छुटकारा: अब लोगों को हाईवे के लंबे जाम में नहीं फंसना पड़ेगा।
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रियल एस्टेट को बूम: कनेक्टिविटी बेहतर होने से इन 4 नए स्टेशनों के आसपास रियल एस्टेट और स्थानीय व्यापार को भी काफी बढ़ावा मिलेगा।
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प्रदूषण में कमी: लोग अपनी निजी गाड़ियों की जगह इस इलेक्ट्रिक और इको-फ्रेंडली ट्रेन का इस्तेमाल करेंगे, जिससे एनसीआर के प्रदूषण स्तर में भी कमी आएगी।