यह UP-बिहार नहीं है, बुलडोजर एक्शन पर भड़का बॉम्बे हाईकोर्ट, नगर निगम को लगाई जोरदार फटकार

यह UP-बिहार नहीं है, बुलडोजर एक्शन पर भड़का बॉम्बे हाईकोर्ट, नगर निगम को लगाई जोरदार फटकार

देशभर में इन दिनों 'बुलडोजर की गूंज' और ताबड़तोड़ ढाए जा रहे निर्माणों को लेकर कानूनी और राजनीतिक बहस छिड़ी हुई है। इसी बीच, बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुलडोजर की इस बढ़ती रफ्तार पर बेहद सख्त और तल्ख टिप्पणी की है। सोमवार को एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम प्रशासन को आड़े हाथों लिया और उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। हाईकोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि महाराष्ट्र के भीतर उत्तर प्रदेश या बिहार जैसी 'बुलडोजर संस्कृति' को पनपने देना कतई सही नहीं है। कोर्ट ने भावुक और कड़े लहजे में कहा कि किसी भी आम इंसान के लिए जिंदगी में एक अदद घर बनाना आसान नहीं होता, इसलिए प्रशासन द्वारा इस तरह एक झटके में किसी के आशियाने पर बुलडोजर चला देना पूरी तरह गलत है।

कोर्ट ने कहा- "लोग जीवनभर की पूंजी लगाकर एक आशियाना खड़ा करते हैं"

बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले में नगर निगम प्रशासन की कार्रवाई को पूरी तरह से मनमाना, एकतरफा और सुप्रीम कोर्ट के तय दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन करार दिया है। मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस सिद्धेश्वर थोम्ब्रे की अगुवाई वाली पीठ ने मकान ढहाने की इस जल्दबाजी पर गहरी नाराजगी जताई। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, “एक घर का निर्माण करना कोई आसान काम नहीं है। हर कोई आपके और मेरे जैसा सक्षम नहीं होता जो आसानी से नया मकान बना सके। लोग अपनी पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी और खून-पसीने की कमाई लगाकर एक आशियाना खड़ा करते हैं।” इसके साथ ही कोर्ट ने यूपी-बिहार का हवाला देते हुए कड़े शब्दों में चेतावनी दी और कहा, “महाराष्ट्र में इस बुलडोजर कल्चर को मत घुसने दीजिए। यह यूपी या बिहार नहीं है, जहां बिना सोचे-समझे ऐसी कार्रवाइयां हों।”

AIMIM पार्षद मतीन पटेल की संपत्ति पर गरजा था पीला पंजा

आखिर यह पूरा विवाद शुरू कहां से हुआ, इसे समझना भी बेहद जरूरी है। दरअसल, यह पूरा मामला ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (AIMIM) के स्थानीय पार्षद मतीन पटेल और एक अन्य निवासी हनीफ खान से जुड़ी संपत्तियों को जमींदोज करने से जुड़ा है। छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम के दस्ते ने बीते 13 मई को इन दोनों की संपत्तियों पर अवैध निर्माण का हवाला देते हुए बुलडोजर चला दिया था। अचानक हुई इस एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ पीड़ित पक्ष ने तुरंत राहत के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया।

सुप्रीम कोर्ट के 15 दिनों के नोटिस वाले नियम को ताक पर रखा

मामले की गहन सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि स्थानीय प्रशासन ने इस कार्रवाई को अंजाम देते समय कानूनी नियमों और तय प्रक्रियाओं को पूरी तरह ताक पर रख दिया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस बात को विशेष रूप से नोट किया कि इस पूरे मामले में नागरिक सुरक्षा से जुड़े जरूरी उपायों और नियमों का पालन नहीं किया गया। गौरतलब है कि देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के साफ निर्देश हैं कि किसी भी संपत्ति या निर्माण को ढहाने से पहले उसके मालिक को 15 दिनों का अनिवार्य लिखित नोटिस दिया जाना चाहिए, ताकि वह कानूनन अपना पक्ष रख सके या अदालत से स्टे ऑर्डर ले सके। हालांकि, संभाजीनगर नगर निगम ने इस अनिवार्य समय सीमा का पालन करना मुनासिब नहीं समझा, जिसे हाईकोर्ट ने पूरी तरह गैर-कानूनी ठहराया है।

नासिक TCS केस की आरोपी निदा खान को शरण देने का है पूरा विवाद

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, इस बुलडोजर एक्शन के पीछे की कहानी कुछ और ही थी। दरअसल, छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका ने बीते बुधवार को एआईएमआईएम नेता मतीन पटेल के घर और अन्य ठिकानों पर कथित अवैध निर्माण को ढहाया था। अधिकारियों का दावा था कि मतीन पटेल पर नासिक टीसीएस (TCS) मामले की मुख्य आरोपी निदा खान को अपने घर में पनाह देने और छुपाने का गंभीर आरोप है। मालूम हो कि आरोपी निदा खान को सात मई को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से ही पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जिसके बाद पुलिसिया जांच की आंच मतीन पटेल तक पहुंची और आनन-फानन में उनके घर पर बुलडोजर चला दिया गया, जिसे अब कोर्ट ने नियम विरुद्ध माना है।

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