'यह पावर नहीं, महज एक प्रोटोकॉल है': पाकिस्तान के 'ऐतिहासिक मील के पत्थर' वाले झूठे दावे पर पूर्व IMF निदेशक के.वी. सुब्रमण्यम का करारा तमाचा

'यह पावर नहीं, महज एक प्रोटोकॉल है': पाकिस्तान के 'ऐतिहासिक मील के पत्थर' वाले झूठे दावे पर पूर्व IMF निदेशक के.वी. सुब्रमण्यम का करारा तमाचा

अंतरराष्ट्रीय वित्त और कूटनीति की दुनिया में इन दिनों पाकिस्तान के एक अजीबोगरीब दावे को लेकर सोशल मीडिया और वैश्विक मंचों पर तीखी चर्चाएं चल रही हैं। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार और उसके आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने यह ढिंढोरा पीटना शुरू किया था कि वर्ष 2027 के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक (World Bank) के 'बोर्ड ऑफ गवर्नर्स' की अध्यक्षता मिलना देश के लिए एक बहुत बड़ा 'ऐतिहासिक मील का पत्थर' (Historical Milestone) है। पाकिस्तान ने इसे वैश्विक वित्तीय नेतृत्व में अपनी धमाकेदार वापसी करार दिया था। लेकिन, भारत के पूर्व आईएमएफ कार्यकारी निदेशक और जाने-माने अर्थशास्त्री के.वी. सुब्रमण्यम (K.V. Subramanian) ने पाकिस्तान के इस खोखले और राजनीतिक रूप से प्रेरित दावे की हवा निकालते हुए इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सुब्रमण्यम ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यह पद कोई नीतिगत ताकत नहीं, बल्कि केवल एक औपचारिक प्रोटोकॉल है जो हर साल रोटेशन के आधार पर मिलता है। आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले की सच्चाई क्या है और पूर्व आईएमएफ निदेशक ने पाकिस्तान के दावों की किस तरह धज्जियां उड़ाई हैं।

क्या है पूरा मामला और पाकिस्तान ने क्या किया था दावा

मामले की शुरुआत तब हुई जब साल 2027 के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक समूह के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की वार्षिक पूर्ण बैठक की अध्यक्षता के लिए पाकिस्तान को चुना गया। इस्लामाबाद के आर्थिक मामलों के मंत्रालय और आधिकारिक बयानों में यह ढोल पीटा गया कि 1953 के बाद यानी लगभग 74 साल के लंबे अंतराल के बाद पाकिस्तान को वैश्विक वित्त के शीर्ष मंच पर इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिली है।

पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्री अहाद खान चीमा—जो विश्व बैंक में पाकिस्तान के गवर्नर भी हैं—इस पद को संभालेंगे। पाकिस्तानी मीडिया और सरकार ने इसे अपनी बड़ी कूटनीति और आर्थिक जीत बताते हुए यह प्रचारित करना शुरू कर दिया कि इससे वैश्विक आर्थिक और विकास संबंधी चर्चाओं में पाकिस्तान की धमक बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी साख मजबूत होगी।

"यह केवल प्रोटोकॉल है, कोई वास्तविक पावर नहीं" - के.वी. सुब्रमण्यम

भारत के पूर्व में आईएमएफ कार्यकारी निदेशक रहे कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यम ने पाकिस्तान के इन सभी दावों का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सिलसिलेवार तरीके से खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान जिस बात को बहुत बड़ा 'ऐतिहासिक मील का पत्थर' बता रहा है, जमीनी हकीकत उससे कोसों दूर है।

सुब्रमण्यम ने अपने बयान में दो टूक कहा, "पाकिस्तान दावा कर रहा है कि वह 74 साल बाद वैश्विक वित्त के शीर्ष मंच पर वापसी कर रहा है। जबकि सच यह है कि पाकिस्तान केवल 2027 में आईएमएफ-विश्व बैंक के वार्षिक पूर्ण सत्र की अध्यक्षता करेगा। यह अध्यक्षता विशुद्ध रूप से एक औपचारिक प्रक्रिया है और हर साल बारी-बारी से बदलती रहती है। उदाहरण के तौर पर इस साल यह पद पैराग्वे के पास था, और 2025 में काबो वर्डे के पास था। यह केवल एक प्रोटोकॉल है, इससे देश को कोई वास्तविक नीतिगत शक्ति (Policy Power) नहीं मिल जाती।"

भारत की G20 अध्यक्षता से पाकिस्तान की तुलना करना हास्यास्पद

अपने संबोधन और सोशल मीडिया पोस्ट में के.वी. सुब्रमण्यम ने पाकिस्तान की तरफ से की जा रही बेतुकी तुलनाओं को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने बताया कि कुछ लोग और पाकिस्तानी मीडिया इसकी तुलना भारत द्वारा सफलतापूर्वक की गई G20 प्रेसीडेंसी और ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता से करने की कोशिश कर रहे हैं, जो कि पूरी तरह से एक भ्रामक और गलत तुलना है।

सुब्रमण्यम ने अंतर समझाते हुए कहा कि भारत ने जब G20 की अध्यक्षता संभाली थी, तो उसने पूरी दुनिया के सामने वैश्विक आर्थिक सहयोग, जलवायु परिवर्तन और विकास के लिए एक ठोस एजेंडा तय किया था। इसी तरह ब्रिक्स की अध्यक्षता ने उभरती हुई वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के एक बड़े मंच को दिशा दी थी। इसके विपरीत, पाकिस्तान को जो भूमिका मिली है, वह केवल एक वार्षिक बैठक (Annual Meeting) की अध्यक्षता करने तक सीमित है, जिसमें मेजबानी करने वाले देश को कोई विशेष विधायी या वित्तीय नियंत्रण अधिकार नहीं मिलते हैं।

कूटनीतिक विश्लेषकों की राय: घरेलू जनता को भ्रमित कर रही है पाकिस्तानी सरकार

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों और कूटनीतिक विश्लेषकों का भी यही मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा बदहाल अर्थव्यवस्था और गंभीर राजनीतिक संकट के बीच सरकार इस तरह के छोटे और सामान्य प्रशासनिक आयोजनों को भी एक बड़ी सफलता के रूप में पेश करके अपनी घरेलू जनता की नजरों में धूल झोंकने का प्रयास कर रही है।

आईएमएफ और विश्व बैंक के नियमों के अनुसार, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की सालाना बैठक की मेजबानी और अध्यक्षता करने का अवसर रोटेशन के आधार पर दुनिया के तमाम विकासशील और अल्पविकसित देशों को मिलता रहता है। इसमें किसी विशेष योग्यता या कूटनीतिक संघर्ष की कोई भूमिका नहीं होती है। के.वी. सुब्रमण्यम द्वारा इस झूठ का पर्दाफाश किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के इन दावों की पोल खुल गई है और एक बार फिर यह साबित हो गया है कि बिना तथ्यों के खोखले दावे करने से वैश्विक वित्तीय पटल पर किसी देश की छवि नहीं सुधरती।