संसद में मचेगा तहलका! महिला आरक्षण विधेयक पर NDA का 'मिशन 360', विपक्ष को चारों खाने चित करने के लिए बनाए जादुई फॉर्मूले

संसद में मचेगा तहलका! महिला आरक्षण विधेयक पर NDA का 'मिशन 360', विपक्ष को चारों खाने चित करने के लिए बनाए जादुई फॉर्मूले

केंद्र में सत्ता की बागडोर संभालने के बाद से ही देश की आधी आबादी को उनका हक दिलाने की दिशा में मोदी सरकार अपने सबसे महत्वाकांक्षी एजेंडे 'महिला आरक्षण विधेयक' (Women's Reservation Bill) को अमलीजामा पहनाने के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी है। बीते संसदीय सत्र में इस ऐतिहासिक विधेयक के साथ-साथ परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के कारण सरकार को रणनीतिक रूप से कदम पीछे खींचने पड़े थे। इस विधायी झटके को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिपहसालारों ने बेहद गंभीरता से लिया है। सूत्रों के मुताबिक, आगामी मॉनसून सत्र में इस बिल को हर हाल में पारित कराकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को पूरी तरह अलग-थलग करने के लिए एनडीए (NDA) के फ्लोर मैनेजरों ने पर्दे के पीछे से एक अभूतपूर्व और अचूक चक्रव्यूह तैयार कर लिया है।

द्रमुक की कांग्रेस से टूटी कसम: तमिलनाडु का सियासी भूचाल अब दिल्ली में लाएगा बड़ा बदलाव

इस पूरे सियासी अंकगणित में सबसे दिलचस्प और गेम-चेंजर मोड़ दक्षिण भारत की राजनीति से आ रहा है। तमिलनाडु में कांग्रेस और द्रमुक (DMK) का पुराना गठबंधन आधिकारिक तौर पर टूटने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) लगातार द्रमुक नेतृत्व के साथ अनौपचारिक संवाद बनाए हुए है। लोकसभा में 22 सांसदों की भारी-भरकम ताकत रखने वाली द्रमुक ने बीते सत्र में इस विधेयक का पुरजोर विरोध किया था, लेकिन अब बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच द्रमुक कांग्रेस को कड़ा संदेश देने के लिए संसद के पटल पर सरकार की परोक्ष मदद कर सकती है। द्रमुक के रणनीतिकारों ने संकेत दिए हैं कि वे सत्र के दौरान अपनी अंतिम रणनीति का खुलासा करेंगे, जो विपक्षी खेमे की एकजुटता को बड़ा झटका दे सकता है।

यूपी चुनाव 2027 पर टिकी सपा की नजर: 'आरक्षण के भीतर आरक्षण' की शर्तों से गरमाई सियासत

दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले समाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया भी इस बहती गंगा में हाथ धोने की फिराक में हैं। वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सपा ने महिला वोट बैंक को साधने के लिए सरकार के सामने अपनी शर्तें रखनी शुरू कर दी हैं। सपा की मांग है कि इस आरक्षण को आगामी 2027 के यूपी चुनाव से ही लागू किया जाए, इसे राज्यसभा में भी विस्तार मिले और सबसे महत्वपूर्ण रूप से इसमें 'आरक्षण के भीतर आरक्षण' (कोटा भीतर कोटा) की व्यवस्था हो। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा का तात्कालिक लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता को बचाना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में खुद की सरकार बनाने के लिए जमीन मजबूत करना है।

शिंदे के कक्ष में शरद पवार की गुप्त दस्तक: महाराष्ट्र से दिल्ली तक नए गठबंधन की सुगबुगाहट

संसदीय अंकगणित को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए एनडीए ने महाराष्ट्र के सबसे अनुभवी राजनेता और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार को भी साधना शुरू कर दिया है। हाल ही में महाराष्ट्र विधानसभा के भीतर एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में शरद पवार का अपने विधायकों के साथ उप मुख्यमंत्री व शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के आधिकारिक कक्ष में पहुंचना महज एक इत्तेफाक नहीं था। इस गुप्त बैठक के बाद दिल्ली के सियासी गलियारों में यह कयास तेज हो गए हैं कि शरद पवार के 8 सांसद लोकसभा में मतदान के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला रुख अख्तियार कर सकते हैं, जिससे सरकार का पलड़ा पूरी तरह भारी हो जाएगा।

लोकसभा का जादुई आंकड़ा: वोटिंग से दूरी और पाला बदलने वाले सांसदों का पूरा गणित समझिए

543 सदस्यों वाली लोकसभा में इस संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 360 के जादुई आंकड़े की आवश्यकता है। बीते सत्र में सरकार के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, यानी बहुमत से 62 सीटें कम थीं। हालांकि, हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 और शिवसेना यूबीटी (Shiv Sena UBT) के 6 सांसदों के पाला बदलकर सरकार के पाले में आ जाने से एनडीए का बेस आंकड़ा बढ़कर 324 तक पहुंच चुका है। यदि द्रमुक के 22 सांसद साथ आते हैं तो यह संख्या 346 हो जाएगी। इसके अलावा, केंद्रीय प्रबंधकों की नजर शरद पवार की एनसीपी (8 सांसद), झारखंड मुक्ति मोर्चा (3 सांसद) और आम आदमी पार्टी (3 सांसद) पर भी है। यदि इन 14 सांसदों का मौन या प्रत्यक्ष समर्थन मिल जाता है, तो समाजवादी पार्टी के बिना भी सरकार आसानी से 360 का आंकड़ा पार कर नया इतिहास रच देगी।

 

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