कर्नाटक सरकार में बढ़ी टेंशन! मंत्री जमीर अहमद खान ने जिला प्रभारी मंत्री बनने से किया इनकार; सियासी गलियारों में मची हलचल

कर्नाटक सरकार में बढ़ी टेंशन! मंत्री जमीर अहमद खान ने जिला प्रभारी मंत्री बनने से किया इनकार; सियासी गलियारों में मची हलचल

दक्षिण भारत के राजनीतिक गलियारों से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। कर्नाटक सरकार में मंत्रियों के बीच विभागों (पोर्टफोलियो) के नए सिरे से हुए बंटवारे के बाद अब पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर फूटने लगे हैं। राजनीतिक सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के मुताबिक, वरिष्ठ मंत्री जमीर अहमद खान हालिया पोर्टफोलियो आवंटन से खासे नाराज बताए जा रहे हैं। इसी नाराजगी और अंदरूनी कलह के चलते उन्होंने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर आने वाले समय में किसी भी जिले के प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी से खुद को पूरी तरह मुक्त रखने का कड़ा अनुरोध किया है।

व्यस्तता का हवाला, लेकिन नाराजगी की चर्चाएं तेज

मंत्री जमीर अहमद खान द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए इस पत्र में आगामी बीबीएसएमपी (BBMP) और अन्य स्थानीय निकाय चुनावों, विधानसभा उपचुनावों के साथ-साथ पार्टी संगठन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का हवाला दिया गया है। उनका तर्क है कि इन तमाम राजनीतिक और सांगठनिक व्यस्तताओं के चलते उनके लिए किसी जिले के प्रभारी मंत्री के तौर पर पूरा समय दे पाना मुमकिन नहीं होगा। इसके अलावा, उन्होंने 15 अगस्त को विजयनगर में आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराने की जिम्मेदारी से भी खुद को अलग करने का अनुरोध किया है और स्पष्ट किया है कि वह इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे।

पोर्टफोलियो बदलाव को माना जा रहा है असली वजह

भले ही मंत्री की ओर से व्यस्त कार्यक्रमों का हवाला दिया जा रहा हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों और पार्टी सूत्रों का दावा है कि इस फैसले के पीछे की असली वजह हालिया पोर्टफोलियो में हुआ फेरबदल है। नए बंटवारे के तहत जमीर अहमद के पास हाउसिंग (आवास) विभाग तो बरकरार रखा गया है, लेकिन उनके पास पहले से मौजूद अल्पसंख्यक कल्याण और हज विभाग की अहम जिम्मेदारी अब यू.टी. खादर को सौंप दी गई है। विभागों में इस तरह की कटौती और बदलाव के बाद जमीर अहमद का यह पत्र सामने आना कर्नाटक कांग्रेस के भीतर सुलग रहे अंदरूनी असंतोष और मतभेदों को खुलकर हवा दे रहा है, जिससे विपक्षी दलों को भी सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया है।

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