ममता सरकार में सजा पाने वाली सुपरकॉप दमयंती सेन की 14 साल बाद धमाकेदार वापसी, शुभेंदु ने सौंपी कमान
पश्चिम बंगाल की सियासत में सत्ता परिवर्तन के बाद एक ऐसा फैसला लिया गया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनीतिक हलकों तक खलबली मचा दी है। सूबे में नई सरकार के गठन के बाद राज्य की बेहद चर्चित और अनुभवी आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन एक बार फिर सुर्खियों में हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 'सुपरकॉप' के नाम से मशहूर दमयंती सेन को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की जांच के लिए गठित एक हाई-लेवल कमिटी का 'मेम्बर सेक्रेटरी' (सदस्य सचिव) नियुक्त किया है। यह वही जांबाज अफसर हैं, जिन्हें साल 2012 के ऐतिहासिक 'पार्क स्ट्रीट गैंगरेप केस' की सच्चाई सामने लाने की भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। उस वक्त की ममता बनर्जी सरकार पर उन्हें मुख्यधारा से हटाकर साइडलाइन करने के गंभीर आरोप लगे थे, लेकिन अब करीब 14 साल बाद दमयंती सेन की सिस्टम में मज़बूत वापसी हुई है।
रिटायर्ड जस्टिस की अगुवाई में बनी विशेष समिति, 1 जून से शुरू होगी 'जनसुनवाई'
राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए शुभेंदु सरकार ने रिटायर्ड जस्टिस समाप्ति चटर्जी की अध्यक्षता में एक हाई-पावर कमिटी का गठन किया है। यह विशेष समिति आगामी 1 जून से एक्टिव मोड में आ जाएगी और पश्चिम बंगाल के अलग-अलग थानों का दौरा करके 'जनसुनवाई' की तर्ज पर सीधे पीड़ित महिलाओं की शिकायतें दर्ज करेगी। इस बड़ी मुहिम के जमीन पर उतरने से पहले, मेम्बर सेक्रेटरी दमयंती सेन की देखरेख में अधिकारियों की एक स्पेशल टीम पूरे राज्य से महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों का पुराना और मौजूदा डेटा इकट्ठा करने में जुट गई है, ताकि अपराधियों पर नकेल कसी जा सके।
कौन हैं IPS दमयंती सेन? जिनके नाम से कांपते हैं अपराधी
दमयंती सेन 1996 बैच की बेहद तेजतर्रार आईपीएस (IPS) अधिकारी हैं। उनके नाम एक बड़ा रिकॉर्ड दर्ज है; वह कोलकाता पुलिस के इतिहास में जॉइंट कमिश्नर (क्राइम) के पद पर तैनात होने वाली पहली महिला अधिकारी रही हैं। अपने पूरे करियर के दौरान उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल और पेचीदा मामलों की गुत्थी सुलझाई है। हालांकि, उन्हें देशव्यापी पहचान साल 2012 के चर्चित पार्क स्ट्रीट सामूहिक दुष्कर्म मामले से मिली थी, जहां उन्होंने सत्ता के दबाव के आगे घुटने टेकने के बजाय अपनी टीम के साथ मिलकर चंद दिनों के भीतर ही खूंखार आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया था।
जब ममता बनर्जी ने 'फर्जी' बता दिया था पार्क स्ट्रीट गैंगरेप केस
यह पूरा मामला 6 फरवरी 2012 का है, जब कोलकाता के पॉश इलाके पार्क स्ट्रीट में देर रात नाइट क्लब से लौट रही एक महिला के साथ चलती गाड़ी में सामूहिक दुष्कर्म की दरिंदगी को अंजाम दिया गया था। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के सत्ता में आने के ठीक बाद हुई इस खौफनाक वारदात से पूरे देश में हड़कंप मच गया था। उस समय की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक तौर पर बयान देते हुए इस पूरी घटना को अपनी सरकार की छवि धूमिल करने के लिए रची गई एक 'मनगढ़ंत कहानी' और फर्जी केस करार दिया था।
राजनीतिक दबाव को ठुकराकर सच लाया सामने, फिर मिली 'सजा'
तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर (क्राइम) दमयंती सेन ने मुख्यमंत्री के राजनीतिक बयान और दबाव की रत्ती भर भी परवाह नहीं की। उन्होंने पूरी ईमानदारी से मामले की वैज्ञानिक और तथ्यात्मक जांच की और ठोस सबूतों के दम पर अदालत के सामने यह साबित कर दिया कि गैंगरेप की वारदात पूरी तरह सच थी। सच को उजागर करने और आरोपियों को पकड़ने के तुरंत बाद ही उन पर गाज गिर गई। उन्हें कोलकाता पुलिस मुख्यालय 'लालबाजार' से हटाकर बैरकपुर कमिश्नरेट में एक कम महत्वपूर्ण पद पर ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद लंबे समय तक उन्हें किसी बड़े या संवेदनशील केस की जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई, जिसे प्रशासनिक भाषा में 'लूप लाइन' या साइडलाइन माना जाता है। अब नई सरकार में उन्हें दोबारा उनका खोया सम्मान और बड़ी जिम्मेदारी वापस मिली है।
संस्थागत भ्रष्टाचार और 'कट मनी' की भी होगी जांच, शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कई और बड़े नीतिगत फैसलों का ऐलान करते हुए पूर्ववर्ती सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने टीएमसी (TMC) सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए संस्थागत भ्रष्टाचार और महिलाओं-बच्चियों के खिलाफ हुए अत्याचारों की निष्पक्ष जांच के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट के दो रिटायर्ड जजों की अगुवाई में दो अलग-अलग जांच समितियों के गठन को हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली समिति की कमान कलकत्ता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस विश्वजीत बसु को सौंपी गई है, जबकि एडीजी (ADG) रैंक के सीनियर अफसर जयरमन इस समिति के सदस्य-सचिव होंगे। यह कमिटी पिछले सालों में हुए बड़े घोटालों, 'कट मनी' और रिश्वतखोरी जैसे मामलों की तह तक जाकर दोषियों को बेनकाब करेगी।