सक्रिय हुआ मॉनसून का विकराल रूप: देश के 15 राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी

सक्रिय हुआ मॉनसून का विकराल रूप: देश के 15 राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी

देशभर में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही अत्यधिक नमी युक्त हवाओं और मानसूनी ट्रफ रेखा के सामान्य स्थिति से गुजरने के चलते उत्तर, मध्य और पश्चिमी भारत के विशाल भूभाग पर बादलों का भारी जमावड़ा बन गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 48 से 72 घंटों के लिए देश के 15 से अधिक राज्यों में मूसलाधार से अति भारी बारिश (Heavy to Extremely Heavy Rainfall) की गंभीर चेतावनी जारी करते हुए रेड और ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस दौरान कई क्षेत्रों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंके वाली हवाएं चल सकती हैं, निचले इलाकों में जलभराव (Waterlogging) हो सकता है और पहाड़ी इलाकों में अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods) का गंभीर खतरा बना हुआ है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (SDRF) को हाई अलर्ट मोड पर रखा गया है।

पहाड़ी राज्यों में आफत की बारिश: उत्तराखंड और हिमाचल में भूस्खलन व बादल फटने का रेड अलर्ट

पहाड़ी राज्यों में मॉनसून का सबसे आक्रामक रूप देखने को मिल रहा है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में बादलों के फटने, नदियों के उफान और पहाड़ों से मलबा गिरने (Landslides) का अत्यधिक जोखिम बना हुआ है:

  • उत्तराखंड: देहरादून, नैनीताल, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, टिहरी और पिथौरागढ़ जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। अलकनंदा, भागीरथी और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई संवेदनशील जगहों पर भूस्खलन के चलते यात्रियों और श्रद्धालुओं को सुरक्षित पड़ावों पर रुकने की सलाह दी गई है।

  • हिमाचल प्रदेश: कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों में भारी बारिश और अचानक बाढ़ का खतरा है। स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों को ब्यास, सतलुज और रावी नदी के किनारों तथा ऊंचे जलप्रपातों से पूरी तरह दूर रहने का कड़ा निर्देश दिया है।

  • जम्मू-कश्मीर: जम्मू संभाग के डोडा, किश्तवाड़, रियासी और पुंछ के पहाड़ी इलाकों में मूसलाधार बारिश के चलते हाईवे पर फिसलन और पत्थर गिरने (Shooting Stones) की चेतावनी दी गई है।

मैदानी इलाकों का हाल: यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में आंधी-बिजली का तांडव

उत्तर और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में भी बादलों का डेरा जमा हुआ है, जहां भारी बारिश के साथ-साथ आकाशीय बिजली (ठनका/वज्रपात) का सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है:

  • उत्तर प्रदेश: पूर्वांचल और तराई से सटे जिलों (गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, पीलीभीत और बरेली) में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। वहीं लखनऊ, कानपुर, अयोध्या और वाराणसी के आसपास गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बौछारें पड़ने का अनुमान है।

  • बिहार: उत्तर और उत्तर-पश्चिमी बिहार के चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा और किशनगंज में तेज हवाओं और वज्रपात के साथ मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। किसानों को खुले खेतों में जाने से बचने की हिदायत दी गई है।

  • मध्य प्रदेश: भोपाल, जबलपुर, रीवा, सागर, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में लगातार रुक-रुक कर तेज बारिश का दौर जारी रहने से नर्मदा, बेतवा और चंबल नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। कई प्रमुख बांधों के गेट खोले जाने की संभावना है।

  • राजस्थान: पूर्वी राजस्थान के कोटा, बारां, झालावाड़, चित्तौड़गढ़, जयपुर और सवाई माधोपुर जिलों में भारी बारिश की संभावना है, जिससे निचले इलाकों में पानी भरने का संकट पैदा हो सकता है।

  • दिल्ली-एनसीआर: राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में आसमान में घने काले बादल छाए रहेंगे और कुछ इलाकों में रुक-रुक कर मध्यम से तेज बारिश के स्पेल देखने को मिलेंगे, जिससे तापमान में गिरावट आएगी लेकिन ट्रैफिक जाम की समस्या हो सकती है।

पश्चिमी और तटीय भारत: महाराष्ट्र, कोंकण और गुजरात में तूफानी हवाओं का दौर

अरब सागर में बने चक्रवातीय दबाव के चलते पश्चिमी तट पर मॉनसून की गति बेहद तेज बनी हुई है:

  • महाराष्ट्र और कोंकण: मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मुंबई के तटीय इलाकों में ऊंची लहरें (High Tide) उठने की संभावना है, जिसके चलते नगर निगम (BMC) ने आपदा नियंत्रण कक्ष को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। पश्चिमी घाट के घाट क्षेत्रों (घाट सेक्शंस) में दृश्यता कम होने और सड़क फिसलन का अलर्ट है।

  • गुजरात: दक्षिण गुजरात (सूरत, वलसाड, नवसारी) और सौराष्ट्र के कुछ तटीय जिलों में मूसलाधार बारिश के चलते जलभराव की स्थिति बन सकती है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त चेतावनी जारी की गई है।

  • ओडिशा और पश्चिम बंगाल: बंगाल की खाड़ी के तटीय इलाकों में बने निम्न दबाव के चलते तटीय जिलों में तेज हवाओं के साथ रुक-रुक कर भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।

भारी बारिश और आकाशीय बिजली से सुरक्षा: जरूरी सावधानियां और गाइडलाइंस

आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और मौसम विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान घबराने के बजाय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करें:

  • उफनते नालों और जलमग्न पुलों को पार न करें: सड़कों या रपटों पर 1-2 फीट पानी बहने की स्थिति में भी वाहन निकालने या पैदल चलने की कोशिश न करें; तेज बहाव में संतुलन बिगड़ सकता है।

  • पेड़ों और जर्जर मकानों से दूर रहें: आंधी या बारिश शुरू होने पर कभी भी बड़े, पुराने या अकेले खड़े पेड़ों के नीचे आश्रय न लें। कच्चे मकानों और पुराने ढांचों के गिरने का खतरा रहता है।

  • बिजली के उपकरणों और खंभों से दूरी: सड़कों पर जलभराव के दौरान बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मर, खुले तारों और लोहे की रेलिंग को छूने से बचें ताकि करंट के झटके से बचा जा सके।

  • वज्रपात से बचाव: खेत में काम करने वाले किसान बादल गरजने के समय तुरंत किसी पक्के भवन या शेड के भीतर चले जाएं। खुले मैदान में फंसे होने पर उकड़ूं (क्रॉच) बैठ जाएं, जमीन पर सीधे न लेटें।

  • मौसम ऐप्स और हेल्पलाइन का उपयोग: अपने स्मार्टफोन में केंद्र सरकार का 'मौसम ऐप' (Mausam App), आकाशीय बिजली अलर्ट के लिए 'दामिनी ऐप' (Damini App) और बिहार के नागरिक 'इंद्रवज्र ऐप' को एक्टिव रखें। आपात स्थिति में जिला आपदा नियंत्रण कक्ष या नेशनल इमरजेंसी नंबर 112 पर तुरंत संपर्क करें।

आगामी दो से तीन दिनों तक सभी प्रभावित राज्यों के निवासियों को अनावश्यक यात्राओं से बचने, मौसम के ताजा बुलेटिन पर नजर बनाए रखने और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की सलाह दी गई है।

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