तेलंगाना सचिवालय परिसर के मंदिर में 1 लाख की रिश्वत लेते सेक्शन ऑफिसर गिरफ्तार, एसीबी का बड़ा एक्शन

तेलंगाना सचिवालय परिसर के मंदिर में 1 लाख की रिश्वत लेते सेक्शन ऑफिसर गिरफ्तार, एसीबी का बड़ा एक्शन

तेलंगाना के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब राज्य के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले प्रशासनिक केंद्र यानी सचिवालय परिसर के भीतर एक सनसनीखेज भ्रष्टाचार का मामला सामने आया। एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के अधिकारियों ने एक बड़ी और गोपनीय कार्रवाई को अंजाम देते हुए सचिवालय में तैनात एक सेक्शन ऑफिसर को परिसर में स्थित मंदिर के पास से एक लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों धर दबोचा। इस सनसनीखेज घटना ने न केवल सरकारी महकमे में बल्कि आम जनता के बीच भी प्रशासनिक सुचिता और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोपी अधिकारी की पहचान विनोद के रूप में हुई है, जिसे एसीबी की टीम ने राघवेंद्र नामक एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी के साथ उस समय दबोचा जब वे रिश्वत की इस अवैध रकम के लेन-देन को अंजाम दे रहे थे। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाने के दावों के बीच इस प्रकार की घटना का सामने आना यह साबित करता है कि किस तरह कुछ भ्रष्ट अधिकारी व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने से बाज नहीं आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) की फाइलों को अटकाकर मांग रहे थे अवैध रकम

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला मुख्यमंत्री राहत कोष यानी सीएमआरएफ (CMRF) से जुड़े बेहद संवेदनशील मामलों और पेंडिंग फाइलों के त्वरित निष्पादन से जुड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री राहत कोष की योजना राज्य के उन गरीब, जरूरतमंद और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए जीवनरेखा साबित होती है जो इलाज के लिए आर्थिक मदद की आस लगाए बैठे रहते हैं। ऐसे मामलों से जुड़ी फाइलों को पास कराने के एवज में रिश्वत मांगे जाने की लगातार मिल रही गोपनीय शिकायतों के बाद एसीबी की टीम पूरी तरह से सतर्क हो गई थी। आरोप है कि आरोपी सेक्शन ऑफिसर विनोद ने सीएमआरएफ से जुड़ी रुकी हुई फाइलों को आगे बढ़ाने और उन्हें मंजूरी दिलाने के नाम पर पीड़ित व्यक्ति से एक लाख रुपये की घूस की मांग की थी। फाइल को पास कराने के लिए जब लगातार मानसिक और प्रशासनिक दबाव बनाया गया, तो पीड़ित ने इस बात की पुख्ता शिकायत सीधे एंटी-करप्शन ब्यूरो के उच्च अधिकारियों से कर दी, जिसके बाद एसीबी ने अपनी कार्ययोजना तैयार की और इस सुनियोजित ट्रेप को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

एसीबी ने सुनियोजित तरीके से मंदिर परिसर में बिछाया था जाल

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति पर काम कर रही एसीबी की विशेष टीम को जब आरोपी अधिकारी की इस करतूत के पुख्ता सुराग मिले, तो उन्होंने बिना समय गंवाए एक सटीक रणनीति बनाई। एसीबी के अधिकारी पिछले कुछ दिनों से आरोपी की हरकतों और उसकी गतिविधियों पर बेहद बारीकी से नजर रखे हुए थे। हैरानी की बात यह है कि आरोपी सेक्शन ऑफिसर विनोद ने घूस के पैसों के लेन-देन के लिए सचिवालय परिसर के भीतर बने मंदिर के पवित्र स्थल को चुना। शायद आरोपी का यह कुटिल षड्यंत्र रहा होगा कि मंदिर के आसपास लोगों की आवाजाही और धार्मिक माहौल के कारण किसी का ध्यान उन पर नहीं जाएगा और वे आसानी से इस अवैध खेल को अंजाम दे सकेंगे। हालांकि, भ्रष्टाचार के इन शातिर तौर-तरीकों से वाकिफ एसीबी के जांबाज अधिकारियों ने अपनी पोजीशन बहुत पहले ही संभाल ली थी। जैसे ही आरोपी ने राघवेंद्र के साथ मिलकर नकदी का यह लेन-देन पूरा किया, सादे कपड़ों में तैनात एसीबी की टीम ने पलक झपकते ही दोनों को मौके पर दबोच लिया और भागने का कोई मौका नहीं दिया।

गवाहों की मौजूदगी में नोट बरामद और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई

एसीबी की इस त्वरित और साहसिक कार्रवाई के दौरान सचिवालय परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्वतंत्र गवाहों की पूरी मौजूदगी और कानूनी औपचारिकताओं का पालन करते हुए एसीबी की टीम ने आरोपियों के पास से रिश्वत में ली गई एक-एक लाख रुपये की नकदी को बरामद कर लिया। इसके बाद दोनों आरोपियों, विनोद और राघवेंद्र, को तुरंत हिरासत में ले लिया गया और कागजी कार्रवाई पूरी करते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के सुसंगत प्रावधानों के तहत औपचारिक मामला दर्ज कर लिया गया। शुरुआती कानूनी प्रक्रिया को मौके पर ही पूरा करने के बाद एसीबी के अधिकारी दोनों आरोपियों को आगे की गहन पूछताछ और कानूनी औपचारिकताओं के लिए सीधे नामपल्ली स्थित एसीबी के मुख्य कार्यालय लेकर रवाना हो गए। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद से सचिवालय के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है, जो इस तरह के अवैध कार्यों में संलिप्त हो सकते हैं।

रैकेट के बड़े खुलासे की आशंका, अन्य कर्मचारियों पर भी लटकी जांच की तलवार

नामपल्ली स्थित एसीबी कार्यालय में दोनों आरोपियों से लगातार लंबी पूछताछ की जा रही है और जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित था या फिर इसके पीछे सचिवालय के भीतर सक्रिय भ्रष्टाचार का कोई बहुत बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। सीएमआरएफ आवेदनों और फाइलों को प्रोसेस करने की आड़ में गरीबों के हक का पैसा लूटने वाले इस रैकेट की तह तक जाने के लिए एसीबी हर उस फाइल और दस्तावेज को खंगाल रही है जिन पर पिछले कुछ महीनों में इन आरोपियों ने काम किया था। इसके अलावा, आउटसोर्सिंग कर्मचारी राघवेंद्र की भूमिका की भी अत्यंत गहराई से जांच की जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि क्या वह इस पूरे खेल में केवल एक मोहरा था या फिर वह इस अवैध वसूली के नेटवर्क का मुख्य बिचौलिया था। एसीबी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि इस मामले की जांच का दायरा जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, कई और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं और इस प्रकरण में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियों से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।

राज्य सरकार की जीरो-टॉलरेंस नीति और प्रशासनिक सुधारों की सख्त जरूरत

मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली तेलंगाना सरकार ने सत्ता संभालने के बाद से ही राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि सरकारी दफ्तरों में आम जनता या जरूरतमंदों को अपने ही हक के कामों के लिए किसी भी तरह के शोषण या घूसखोरी का शिकार न होना पड़े। इसी नीति के तहत एसीबी को पूरी स्वतंत्रता दी गई है कि वह भ्रष्टाचार के मामलों में बिना किसी बाहरी दबाव के कठोरतम कानूनी कार्रवाई करे। सचिवालय जैसे अति-संवेदनशील और सर्वोच्च प्रशासनिक केंद्र में इस प्रकार की घटना का सामने आना यह रेखांकित करता है कि प्रशासनिक मशीनरी के भीतर अभी भी कुछ ऐसे तत्व सक्रिय हैं जो सरकारी सुधारों और सुशासन की राह में रोड़ा अटका रहे हैं। इस मामले में एसीबी की तेज कार्रवाई और विशेष अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया यह संदेश देती है कि भ्रष्टाचारियों के लिए राज्य में अब कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच के बाद राज्य सरकार प्रशासनिक स्तर पर कुछ और कड़े और सुधारात्मक कदम उठा सकती है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को पूरी तरह से रोका जा सके।