बंगाल में सायोनी घोष ने दिया जीत का मंत्र, उमा भारती बोलीं-मक्का-मदीना वाले गाने ने डुबोई लुटिया

बंगाल में सायोनी घोष ने दिया जीत का मंत्र, उमा भारती बोलीं-मक्का-मदीना वाले गाने ने डुबोई लुटिया

पश्चिम बंगाल के चुनावी दंगल में अपने अनोखे और आक्रामक अंदाज से सुर्खियां बटोरने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) की फायरब्रांड सांसद सायोनी घोष एक बार फिर चर्चा में हैं। बंगाल चुनाव में टीएमसी को मिली करारी शिकस्त के बाद जहां विरोधी दल उन पर चौतरफा हमला बोल रहे हैं, वहीं सायोनी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर अपनी हार और जीत की फिलॉसफी बयां की है। सायोनी ने 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर लिखा कि जीत हासिल करने के लिए सिर्फ जीतने की इच्छा होना काफी नहीं है, बल्कि उससे भी बढ़कर कुछ होना जरूरी है।

'कमियों पर विजय जरूरी': सायोनी घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा दिल का हाल

चुनाव नतीजों के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में सायोनी घोष ने आगे की रणनीति और हौसले का जिक्र किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, "जीत के लिए जीत की इच्छा से भी बढ़कर कुछ होना चाहिए। तैयारी की चाहत, अपनी कमियों पर विजय पाना और दूसरों को पीछे छोड़ते हुए लगातार आगे चलते रहना बेहद आवश्यक है।" सायोनी का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पूरी पार्टी इस बड़ी हार के बाद मंथन के दौर से गुजर रही है।

'मक्का-मदीना' के गीत पर बवाल: उमा भारती का टीएमसी पर तीखा तंज

सायोनी घोष चुनाव प्रचार के दौरान अपने अनूठे रंग के लिए जानी जाती थीं। वह अपनी जनसभाओं में मां काली के भजनों से लेकर मक्का-मदीना के गीत तक गाती थीं, जिसके लिए उनकी काफी तारीफ भी हुई और रैलियों में भारी भीड़ उमड़ी। लेकिन अब हार के बाद बीजेपी की दिग्गज नेता उमा भारती ने इसी को मुद्दा बनाते हुए टीएमसी पर करारा हमला बोला है। उमा भारती ने दावा किया कि सायोनी घोष का चुनावी रैलियों में 'मक्का-मदीना' वाला गाना गाना ही टीएमसी की लुटिया ले डूबा और विरोधियों ने इसे पूरी तरह 'तुष्टीकरण' का रंग दे दिया।

अभिनय की दुनिया से संसद तक का सफर: कैसा रहा है सायोनी का सियासी ग्राफ

कोलकाता के साउथ पॉइंट हाई स्कूल से शुरुआती पढ़ाई और कलकत्ता विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करने वाली सायोनी घोष बांग्ला फिल्मों की एक मशहूर अदाकारा रही हैं। अपनी बेहतरीन वाकपटुता के कारण उन्हें टीवी एक्टिंग और एंकरिंग में पहचान मिली। साल 2021 में जब ममता बनर्जी की टीएमसी को नए और युवा चेहरों की तलाश थी, तब सायोनी की एंट्री पार्टी में हुई। हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें आसनसोल सीट से उतारा था, जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

त्रिपुरा में गिरफ्तारी से लेकर ED की पूछताछ तक, विवादों से रहा है पुराना नाता

सायोनी घोष का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। त्रिपुरा में एक बीजेपी की नुक्कड़ सभा के पास से गुजरते समय उन्होंने ममता बनर्जी का प्रसिद्ध नारा 'खेला होबे' लगा दिया था, जिसके बाद अगरतला में केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। इस घटना के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गईं। इसके अलावा, जब वह टीएमसी युवा मोर्चा की अध्यक्ष थीं, तब शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी उनसे लंबी पूछताछ की थी।

विवादों के बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया और जाधवपुर संसदीय सीट से टिकट दिया, जहां से जीतकर वह संसद पहुंचीं। आज संसद में भी वह अपने आक्रामक भाषणों के लिए जानी जाती हैं, लेकिन बंगाल के इस चुनावी उलटफेर ने एक बार फिर उन्हें विरोधियों के निशाने पर ला दिया है।

Tags:

Latest Posts