Priyanka Gandhi 'Gau Mutra Expert' Remark: प्रियंका गांधी के 'गोमूत्र एक्सपर्ट' बयान पर देश के 215 कुलपतियों का कड़ा रुख
लोकसभा में परीक्षा सुधारों और टास्क फोर्स के गठन पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा कथित रूप से 'गोमूत्र एक्सपर्ट' कहे जाने के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक और शैक्षणिक तूल पकड़ लिया है। आईआईटी मद्रास के निदेशक (Director) प्रोफेसर वी. कामाकोटी को लक्ष्य बनाकर की गई इस टिप्पणी के विरोध में देश भर के 215 से अधिक वर्तमान व पूर्व कुलपतियों, पूर्व निदेशकों और वरिष्ठ शिक्षाविदों ने प्रियंका गांधी को एक खुला पत्र (Open Letter) लिखकर गहरी निराशा जताई है।
शिक्षाविदों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि संसद जैसे गरिमामय मंच पर किसी विद्वान शोधकर्ता को तर्कों के बजाय किसी 'ओछे टैग' या लेबल से खारिज करना देश की वैज्ञानिक सोच और अकादमिक मूल्यों के खिलाफ है।
215 कुलपतियों और शिक्षाविदों के पत्र की मुख्य बातें
30 जुलाई को जारी इस खुले पत्र में देश की शीर्ष यूनिवर्सिटीज और तकनीकी संस्थानों के प्रमुखों ने हस्ताक्षर किए हैं। पत्र के समन्वयकों में आईसीटी मुंबई के पूर्व कुलपति प्रो. जी.डी. यादव और एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) की महासचिव प्रो. पंकज मित्तल शामिल हैं।
पत्र में शिक्षाविदों ने लिखा:
"चाहे यह टिप्पणी व्यंग्य के रूप में की गई हो या राजनीतिक बयानबाजी में, लेकिन यह बेहद चिंताजनक है। संसद एक ऐसा मंच होना चाहिए जहाँ असहमति सम्मानपूर्वक जाहिर की जाए। किसी विद्वान के तर्कों से असहमति जताई जा सकती है, लेकिन किसी लेबल के आधार पर उनकी विद्वता का उपहास उड़ाना तर्कसंगत चर्चा का विकल्प नहीं हो सकता।"
कौन हैं प्रो. वी. कामाकोटी? पत्र में याद दिलाए गए उनके वैज्ञानिक योगदान
शिक्षाविदों ने अपने पत्र में आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी की उपलब्धियों और देश के विज्ञान-तकनीकी क्षेत्र में उनके योगदान का विशेष ब्योरा दिया है:
-
उच्च शिक्षा: प्रो. कामाकोटी के पास IIT मद्रास से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में एमएस (MS) और पीएचडी (PhD) की डिग्रियां हैं।
-
रिसर्च और प्रोजेक्ट्स: वे 150 से अधिक अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं और 50 से अधिक आरएंडडी (R&D) परियोजनाओं का नेतृत्व कर चुके हैं।
-
देश का पहला माइक्रोप्रोसेसर: भारत के पहले इंडस्ट्रियल-ग्रेड माइक्रोप्रोसेसर ('शक्ति') को तैयार करने में उनकी मुख्य भूमिका रही है।
-
प्रतिष्ठित सम्मान: उन्हें डीआरडीओ (DRDO) एकेडमिक एक्सीलेंस अवॉर्ड और टेक्नो विजनरी अवॉर्ड समेत कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
शिक्षाविदों ने कहा कि ऐसे उच्च स्तर के वैज्ञानिक को राजनीतिक तंज का शिकार बनाना देश के शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के मनोबल को गिराता है।
"वैज्ञानिक दृष्टिकोण को पहुंचता है नुकसान"
खुले पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारतीय संविधान हर नागरिक में 'वैज्ञानिक दृष्टिकोण' (Scientific Temper) विकसित करने का आह्वान करता है।
शिक्षाविदों का कहना है कि वैज्ञानिक सोच का मतलब सिर्फ गैर-पारंपरिक या पारंपरिक विचारों पर संदेह करना नहीं है, बल्कि निष्पक्ष रूप से किसी भी दावे की जांच करना है। यदि किसी विशेषज्ञ या संस्थान के प्रमुख को सार्वजनिक बहसों में अपमानित किए जाने का डर रहेगा, तो शोधकर्ता और शिक्षक जन-नीतियों और सार्वजनिक चर्चाओं में हिस्सा लेने से कतराने लगेंगे।
आखिर क्या था विवादित बयान?
यह विवाद 28 जुलाई 2026 को संसद में परीक्षा सुधारों से जुड़ी समिति पर चर्चा के दौरान शुरू हुआ। बहस के दौरान प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार द्वारा गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की संरचना पर सवाल उठाते हुए कटाक्ष किया था कि इस समिति में 'गोमूत्र एक्सपर्ट' तक को शामिल किया गया है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर प्रो. कामाकोटी का नाम नहीं लिया था, लेकिन उनके बयान का इशारा उन्हीं की तरफ माना गया।
फिलहाल, 215 कुलपतियों के इस पत्र के बाद राजनीतिक और शैक्षणिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि सार्वजनिक मंचों पर वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों की आलोचना का दायरा और मर्यादा क्या होनी चाहिए।