PM मोदी का कड़ा संदेश: "आतंकी आसमान में हों या पाताल में... छोड़ना नहीं"; एनएसए अजीत डोभाल ने खोले 'ऑपरेशन सिंदूर' के बड़े राज
भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने हाल ही में 'ऑपरेशन सिंदूर' की रणनीतिक सोच और उसकी अंदरूनी कहानी का पहली बार विस्तार से खुलासा किया है। यह सैन्य अभियान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस दर्दनाक आतंकी हमले के जवाब में महज 88 घंटों के भीतर चलाया गया था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। एनएसए डोभाल ने एक साक्षात्कार के दौरान उस तनावपूर्ण दौर को याद किया जब भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बनाते हुए आतंकवादियों और उनके साजो-सामान को नेस्तनाबूद करने की पुख्ता योजना बनाई थी।
पहलगाम हमले के बाद पीएम मोदी की फौरन और सख्त प्रतिक्रिया
पहलगाम नरसंहार के तुरंत बाद का वह तनावपूर्ण माहौल याद करते हुए एनएसए अजीत डोभाल ने बताया कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी विदेश यात्रा बीच में ही रद्द कर दी थी और दिल्ली उतरते ही एयरपोर्ट पर एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी। डोभाल ने प्रधानमंत्री की उस सख्त प्रतिक्रिया को साझा करते हुए बताया कि एयरपोर्ट पर उतरते ही पीएम मोदी का पहला सवाल था कि इस कायराना हमले के पीछे कौन लोग हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आतंकियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।
एनएसए के मुताबिक, पीएम मोदी ने कड़े शब्दों में कहा था, "चाहे वे जमीन पर हों, आसमान में हों या पाताल में... वे जहां भी छिपे हों, हमें उन्हें ढूंढकर खत्म करना है।" खुफिया एजेंसियों की तारीफ करते हुए डोभाल ने बताया कि बेहद कम समय में देश की खुफिया मशीनरी ने सटीक इनपुट जुटाए, जिससे भारतीय सेना ने बिना एक पल गंवाए दोषियों की पहचान कर सटीक और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया।
"भारत की सहनशीलता को कमजोरी न समझें"
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अजीत डोभाल ने दो टूक कहा कि जब देश की संप्रभुता और सुरक्षा की बात आती है, तो भारत किसी भी हद तक जाने के लिए पूरी तरह तैयार रहता है और इसके लिए कोई सीमा तय नहीं होती। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि हम खून की आखिरी बूंद तक लड़ने का माद्दा रखते हैं, और भारत की उदारता व अत्यधिक सहनशीलता को कभी भी उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
डोभाल ने उस भयावह घटना का जिक्र किया जिसमें आतंकवादियों ने धर्म और आस्था के आधार पर निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया था। आतंकियों ने हदें पार करते हुए यहां तक दुस्साहस दिखाया था कि उन्होंने पीड़ितों से कहा था कि जाकर मोदी से कह दें, वह जो कर सकते हैं कर लें। 22 अप्रैल 2025 को हुए इस वीभत्स हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को साफ संदेश दे दिया था कि आतंकवाद को पनाह देना और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई न करना अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।