PM मोदी और जर्मन चांसलर के बीच फोन पर हुई अहम बातचीत, रक्षा और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर बनी सहमति

PM मोदी और जर्मन चांसलर के बीच फोन पर हुई अहम बातचीत, रक्षा और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर बनी सहमति

भारत और जर्मनी के बीच कूटनीतिक और कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से एक बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जहां देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच टेलीफोन पर एक व्यापक और सकारात्मक बातचीत संपन्न हुई है। इस उच्च स्तरीय संवाद के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर आधिकारिक तौर पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों के गौरवशाली 75 वर्ष पूरे होने के इस विशेष अवसर पर दोनों शीर्ष नेताओं के बीच वैश्विक, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर अत्यंत सार्थक चर्चा हुई है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ हुई इस बातचीत के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने अपनी गहरी रणनीतिक साझेदारी को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक और अधिक मजबूत, व्यापक और प्रगाढ़ बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरी दृढ़ता के साथ दोहराया है। वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत और जर्मनी का यह संवाद दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और कूटनीतिक तालमेल की गहराई को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है, जो आने वाले समय में वैश्विक स्थिरता के लिए भी मील का पत्थर साबित हो सकता है।

व्यापार, निवेश, डिफेंस ट्रेड और एडवांस टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में सहयोग विस्तार पर बनी सहमति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी आधिकारिक पोस्ट में इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि इस उच्च स्तरीय बातचीत के दौरान दोनों मित्र देशों ने व्यापार, विदेशी निवेश, रक्षा सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, एडवांस टेक्नोलॉजी (उन्नत तकनीक), और टैलेंट मोबिलिटी (प्रतिभा गतिशीलता) जैसे प्रमुख और उभरते क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और अधिक तेजी से आगे बढ़ाने पर पूर्ण सहमति व्यक्त की है। जर्मनी को हमेशा से यूरोप महाद्वीप के भीतर भारत के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों का एक अत्यंत अहम स्तंभ माना जाता है, जो वैश्विक शांति, आर्थिक स्थिरता और सतत समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए भारत का एक भरोसेमंद साझेदार रहा है। पीएम मोदी ने इस बात को दोहराया कि दोनों देश मिलकर अपने-अपने नागरिकों के बेहतर भविष्य और आर्थिक कल्याण के लिए अपनी मजबूत रणनीतिक साझेदारी की जड़ों को और अधिक गहरा करते रहेंगे। विशेष रूप से डिफेंस ट्रेड यानी रक्षा उपकरणों के व्यापार और संयुक्त उत्पादन के क्षेत्र में दोनों देशों का यह बढ़ता हुआ तालमेल भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के अभियान को वैश्विक स्तर पर एक नई और मजबूत गति प्रदान कर रहा है।

भारत-जर्मनी पनडुब्बी डील और मेक इन इंडिया के तहत 90 हजार करोड़ रुपये की विशाल परियोजना

भारत और जर्मनी के बीच पिछले कुछ महीनों से औद्योगिक, तकनीकी और नवाचार (इनोवेशन) के क्षेत्र में सहयोग को एक बिल्कुल नई दिशा मिल रही है। इसी कड़ी में पिछले महीने भारत और जर्मनी के बीच इतिहास की सबसे बड़ी रक्षा डीलों में से एक 'सबमरीन डील' की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खासी सुर्खियां बटोरी थीं। समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और जर्मनी के बीच हुआ यह रणनीतिक समझौता लगभग 8 अरब यूरो यानी भारतीय मुद्रा के अनुसार 90,000 करोड़ रुपये से भी अधिक की भारी-भरकम राशि का है। इस महत्वाकांक्षी रक्षा सौदे के तहत भारतीय नौसेना के लिए अत्याधुनिक तकनीक से लैस अगली पीढ़ी की कुल 6 पारंपरिक पनडुब्बियों का निर्माण किया जाना है, जो भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमताओं को सुदृढ़ करेंगी। खास बात यह है कि इन अत्याधुनिक पनडुब्बियों का निर्माण किसी विदेशी बंदरगाह पर नहीं, बल्कि 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत भारत के भीतर ही किया जाएगा। इस वृहद परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए देश की प्रतिष्ठित सार्वजनिक रक्षा निर्माण कंपनी मुंबई स्थित मजगांव डॉक लिमिटेड (MDL) और जर्मनी की विश्वप्रसिद्ध डिफेंस कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) आपस में मिलकर काम कर रही हैं।

जुलाई 2026 के इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्री डायलॉग और उभरते तकनीकी सहयोग

दोनों देशों के बीच औद्योगिक साझेदारी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के उद्देश्य से इसी साल जुलाई 2026 में इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स (IGCC) द्वारा 'इंडस्ट्री डायलॉग 2026' का भव्य आयोजन किया गया था। इस उच्च स्तरीय मंच पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर निर्माण, और अत्याधुनिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) जैसे भविष्य के उभरते हुए क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को तीव्र करने पर अत्यंत विस्तार से चर्चा हुई थी। जर्मनी वर्तमान समय में यूरोप महाद्वीप के भीतर भारत का सबसे बड़ा और सबसे भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार बना हुआ है, जिसके साथ भारत का वार्षिक व्यापार वॉल्यूम 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर से भी अधिक का है। यह मजबूत आर्थिक आधार इस बात का प्रमाण है कि बिजनेस और कमर्शियल सेक्टर के लिहाज से जर्मनी भारत के सबसे रणनीतिक और अनिवार्य वैश्विक साझेदारों में शुमार है। भारत और जर्मनी अपनी इस अटूट द्विपक्षीय साझेदारी के माध्यम से रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक मोर्चों पर लगातार नए आयाम गढ़ रहे हैं।