पीएम मोदी की गजब 'कार डिप्लोमेसी': 12 साल में 11 बार वर्ल्ड लीडर्स के साथ एक गाड़ी में बैठे, प्रोटोकॉल तोड़ दुनिया में बढ़ाया भारत का रुतबा
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में प्रोटोकॉल और औपचारिक सुरक्षा घेरे बेहद सख्त होते हैं, जहां राष्ट्रप्रमुखों की हर गतिविधि तय मानकों और सुरक्षा नियमों के दायरे में बंधी होती है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 12 वर्षों के कार्यकाल में कूटनीतिक संवाद की नई परिभाषा गढ़ी है। इसे दुनिया 'कार डिप्लोमेसी' (Car Diplomacy) के नाम से जानती है। अंतरराष्ट्रीय मंचों और द्विपक्षीय यात्राओं के दौरान जब दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के राष्ट्राध्यक्ष अपनी बुलेटप्रूफ लिमोजिन और आधिकारिक गाड़ियों का दरवाजा खोलकर खुद पीएम मोदी को अपने साथ बिठाते हैं या खुद गाड़ी ड्राइव करते हैं, तो वह केवल दो नेताओं के बीच का व्यक्तिगत तालमेल नहीं होता, बल्कि दुनिया में भारत के बढ़ते भू-राजनीतिक रुतबे का जीवंत प्रमाण बन जाता है। पिछले 12 सालों में 11 से अधिक बार ऐसे दुर्लभ मौके आए हैं जब वर्ल्ड लीडर्स ने स्थापित सुरक्षा प्रोटोकॉल को दरकिनार कर भारतीय प्रधानमंत्री के साथ कार की सवारी साझा की है।
व्लादिमीर पुतिन और पीएम मोदी: मास्को से नोवो-ओगारियोवो तक का सफर
कार डिप्लोमेसी का सबसे चर्चित और ताजा अध्याय रूस की धरती पर लिखा गया, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने आधिकारिक आवास नोवो-ओगारियोवो में पीएम मोदी का न केवल गर्मजोशी से स्वागत किया, बल्कि खुद इलेक्ट्रिक गोल्फ कार्ट और कार चलाकर उन्हें अपने निजी परिसर की सैर कराई। इसके पहले भी सोची शिखर सम्मेलन के दौरान पुतिन ने पीएम मोदी को अपनी आधिकारिक गाड़ी में बैठाकर अनौपचारिक बातचीत को आगे बढ़ाया था। रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंद कमरों की बैठकों से इतर एक ही कार में बैठकर की जाने वाली अनौपचारिक बातचीत दोनों देशों के नेताओं के बीच गहरा विश्वास पैदा करती है, जो जटिल वैश्विक मसलों को सुलझाने में बेहद मददगार साबित होती है।
बराक ओबामा की 'द बीस्ट' में पहली बार किसी विदेशी नेता की एंट्री
साल 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के ऐतिहासिक दौरे पर वाशिंगटन पहुंचे, तब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इतिहास रच दिया था। ओबामा ने अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के सबसे कड़े नियमों को किनारे करते हुए पीएम मोदी को दुनिया की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति की आधिकारिक कार 'द बीस्ट' (The Beast) में अपनी बगल वाली सीट पर बैठाया। दोनों नेता एक साथ मार्टिन लूथर किंग जूनियर मेमोरियल पहुंचे थे। यह पहला मौका था जब किसी विदेशी राष्ट्रप्रमुख ने अमेरिकी राष्ट्रपति की बख्तरबंद गाड़ी में इस तरह सफर किया था। इस दृश्य ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत-अमेरिका संबंधों के एक नए युग की शुरुआत का संदेश दिया था।
शी जिनपिंग के साथ वुहान और महाबलीपुरम का अनौपचारिक तालमेल
भारत और चीन के बीच संबंधों में जब अनौपचारिक शिखर बैठकों (Informal Summits) का दौर शुरू हुआ, तब भी कार डिप्लोमेसी का शानदार नजारा देखने को मिला। चीन के वुहान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने झील के किनारे पीएम मोदी के साथ एक ही विशेष गोल्फ कार्ट में बैठकर लंबी बातचीत की। इसके जवाब में जब शी जिनपिंग भारत के महाबलीपुरम दौरे पर आए, तो प्रधानमंत्री मोदी ने उनके साथ ऐतिहासिक स्मारकों के भ्रमण के दौरान साझा वाहन का उपयोग किया। प्रोटोकॉल से परे इस मुलाकात ने दोनों देशों के बीच सीमा विवादों के बीच भी शीर्ष स्तर पर सीधे संवाद की खिड़की खुली रखने का काम किया।
खाड़ी देशों में व्यक्तिगत दोस्ती: मोहम्मद बिन जायद और मोहम्मद बिन सलमान
मध्य पूर्व के देशों के साथ भारत के संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने में पीएम मोदी की व्यक्तिगत केमिस्ट्री सबसे बड़ा फैक्टर रही है।
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यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान: अबू धाबी के दौरे पर जब पीएम मोदी पहुंचे, तो यूएई के तत्कालीन क्राउन प्रिंस और मौजूदा राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद खुद गाड़ी चलाकर पीएम मोदी को एयरपोर्ट से होटल और निजी महल तक लेकर गए। अरब संस्कृति में किसी विदेशी मेहमान के लिए राष्ट्राध्यक्ष का खुद स्टीयरिंग संभालना सर्वोच्च सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
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सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान: रियाद दौरे के दौरान सऊदी अरब के वलीअहद मोहम्मद बिन सलमान ने भी प्रोटोकॉल तोड़ते हुए पीएम मोदी को अपने साथ निजी गाड़ी में बैठाया, जिसने दोनों देशों के सुरक्षा और ऊर्जा संबंधों को अभूतपूर्व मजबूती दी।
फ्रांस के इमैनुएल मैक्रों और जापान के शिंजो आबे के साथ मजबूत बॉन्डिंग
यूरोप और पूर्वी एशिया में भी पीएम मोदी की कार और ट्रेन कूटनीति के कई ऐतिहासिक उदाहरण मौजूद हैं:
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इमैनुएल मैक्रों: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों जब भारत के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनकर पहुंचे या पीएम मोदी जब पेरिस गए, दोनों नेताओं ने खुले वाहनों और बख्तरबंद कारों में एक साथ सफर कर 'रणनीतिक साझेदारी' को 'व्यक्तिगत दोस्ती' में बदला।
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दिवंगत शिंजो आबे: जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे ने अहमदाबाद दौरे पर खुली जीप में पीएम मोदी के साथ रोड शो किया था और टोक्यो में भी शिंकानसेन बुलेट ट्रेन व कारों में साथ सफर कर भारत-जापान स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की नींव रखी थी।
कूटनीति के चश्मे से: कार में होने वाली बातचीत क्यों होती है सबसे असरदार
डिप्लोमैटिक एक्सपर्ट्स और पूर्व राजदूतों के अनुसार, औपचारिक बैठकों में हर नेता के साथ विदेश मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और नोट-टेकर्स की पूरी फौज मौजूद होती है, जहां बातचीत काफी नपी-तुली और स्क्रिप्टेड होती है। इसके विपरीत, जब दो ताकतवर नेता एक ही कार में 20 से 40 मिनट का सफर तय करते हैं, तो वहां कोई तीसरा व्यक्ति (सिवाय इंटरप्रेटर या ड्राइवर के) मौजूद नहीं होता। यह वह समय होता है जब दोनों नेता एक-दूसरे के राजनीतिक दबाव, रणनीतिक चिंताओं और संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों (जैसे युद्ध, प्रतिबंध, ऊर्जा सुरक्षा) पर खुलकर और बेबाकी से दिल की बात रख सकते हैं।
भारत के बढ़ते भू-राजनीतिक कद का वैश्विक प्रतीक
12 वर्षों में 11 बार दुनिया के शीर्ष नेताओं द्वारा इस तरह का विशेष सम्मान दर्शाना यह साबित करता है कि आज का भारत वैश्विक एजेंडा तय करने वाली महाशक्ति बन चुका है। चाहे वह महाशक्तियों के बीच गुटबाजी से परे अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) बनाए रखना हो या विकासशील देशों की आवाज बनना, पीएम नरेंद्र मोदी की यह 'पर्सनल कनेक्ट' और 'कार डिप्लोमेसी' अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के हितों को सुरक्षित रखने का सबसे धारदार हथियार साबित हुई है।