भारत-बांग्लादेश सीमा पर अब परिंदा भी नहीं मार पाएगा पर, तस्करी और घुसपैठ को खत्म करने के लिए बनाया ज़ीरो टॉलरेंस प्लान
भारत और बांग्लादेश के बीच सदियों पुराने रिश्तों को सुरक्षा के मोर्चे पर और अधिक मजबूती देने के लिए एक बड़ी रणनीतिक बैठक संपन्न हुई है। सीमा सुरक्षा को लेकर आयोजित इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में दोनों देशों के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और सीमा सुरक्षा बलों के शीर्ष अधिकारियों ने शिरकत की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों को जड़ से खत्म करना था। दोनों देशों के अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब सीमा पर किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और 'ज़ीरो टॉलरेंस' की नीति के तहत कड़े कदम उठाए जाएंगे।
स्मार्ट फेंसिंग और ड्रोन निगरानी से होगी तस्करी पर सर्जिकल स्ट्राइक सीमा पार से होने वाली मवेशियों की तस्करी, ड्रग्स और हथियारों के अवैध कारोबार को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेने पर विशेष चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, भारत-बांग्लादेश सीमा के उन हिस्सों पर जहां भौगोलिक चुनौतियां अधिक हैं, वहां 'स्मार्ट फेंसिंग' और अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी। दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग यानी सूचनाओं के तत्काल आदान-प्रदान पर भी सहमति बनी है, ताकि तस्करों के नेटवर्क को पनपने से पहले ही ध्वस्त किया जा सके।
घुसपैठ रोकने और सीमावर्ती ग्रामीणों की सुरक्षा पर जोर बैठक के दौरान घुसपैठ एक बड़ा मुद्दा रहा। डीजीपी स्तर की इस वार्ता में तय किया गया कि अवैध रूप से सीमा पार करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, सीमा के दोनों ओर रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा और उनके बीच विश्वास बहाली के लिए 'कोऑर्डिनेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट प्लान' (CBMP) को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा बल न केवल अपराधियों के लिए काल बनेंगे, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ मिलकर काम करेंगे।
आतंकवाद और साइबर अपराधों के खिलाफ साझा फ्रंट की तैयारी सिर्फ शारीरिक तस्करी ही नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया के खतरों से निपटने के लिए भी दोनों देशों ने एकजुटता दिखाई है। आतंकवाद के खिलाफ साझा अभियान चलाने और साइबर स्पेस का इस्तेमाल कर सीमा पार अपराधों को अंजाम देने वाले गिरोहों पर नकेल कसने के लिए एक विशेष कार्य बल (SIT) के गठन पर विचार किया गया है। भारत और बांग्लादेश के सुरक्षा अधिकारियों का यह साझा कदम दक्षिण एशिया में स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा, जिससे भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध और अधिक सुरक्षित वातावरण में फल-फूल सकेंगे।