भारत में कुदरत का कहर: असम में बाढ़ से 87 तो केरल में लैंडस्लाइड से 25 लोगों की मौत, ओडिशा के 22 जिलों में 8 लाख आबादी जलप्रलय से बेहाल

भारत में कुदरत का कहर: असम में बाढ़ से 87 तो केरल में लैंडस्लाइड से 25 लोगों की मौत, ओडिशा के 22 जिलों में 8 लाख आबादी जलप्रलय से बेहाल

नई दिल्ली/गुवाहाटी/भुवनेश्वर/तिरुवनंतपुरम: देश भर में मानसून का रौद्र रूप जारी है और कुदरत के इस कहर ने भारत के पूर्वी, पूर्वोत्तर और दक्षिणी राज्यों में जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश, उफनती नदियों और भयानक भूस्खलन (Landslides) के कारण देश के तीन प्रमुख राज्य—असम, केरल और ओडिशा—इस समय भीषण जल त्रासदी का सामना कर रहे हैं। असम में बाढ़ और जलभराव की वजह से जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 87 हो चुकी है, जबकि दक्षिण भारतीय राज्य केरल में बारिश और पहाड़ी इलाकों में मिट्टी धंसने से 25 लोगों की दुखद मौत हो चुकी है। उधर, पूर्वी राज्य ओडिशा में महानदी और उसकी सहायक नदियों के उफान के चलते राज्य के 22 जिलों में लगभग 8 लाख लोग बाढ़ के पानी में घिरे हुए हैं।

देश के इन प्रभावित राज्यों में हजारों एकड़ में फैली फसलें पूरी तरह से जलमग्न हो चुकी हैं, सड़कें बह गई हैं, पुल टूट गए हैं और लाखों लोग अपना घर-बार छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना की टीमें दिन-रात राहत और बचाव अभियानों में जुटी हुई हैं।

असम में उफान पर नदियां: 87 मौतों के साथ 7 जिलों में 1.3 लाख लोग बेघर

पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख राज्य असम हर साल मानसूनी बाढ़ का सामना करता है, लेकिन इस बार की त्रासदी ने भारी नुकसान पहुँचाया है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की ओर से जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, राज्य में बाढ़ से संबंधित घटनाओं में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 87 हो गया है। राज्य के 7 प्रमुख जिलों—शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट, धेमाजी, गोलाघाट, लखीमपुर और विश्वनाथ में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। इन जिलों के 380 से अधिक गांव पूरी तरह से जलमग्न हैं और लगभग 1.3 लाख लोग सीधे तौर पर इस जलप्रलय की चपेट में हैं।

ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां जैसे धनसिरी, जिया भराली और कोपिली कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। शिवसागर और चराईदेव जिलों में स्थिति सबसे अधिक विकट है, जहां गांवों के अंदर 5 से 6 फीट तक पानी भर गया है। चराईदेव के नेपाली खुटी इलाके के निवासियों का कहना है कि उन्होंने पिछले चार दशकों में पानी का ऐसा तांडव नहीं देखा है। लगभग 14,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पानी में डूब जाने से किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। राज्य प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे राहत शिविरों में 12,000 से अधिक विस्थापित लोगों को भोजन, शुद्ध पेयजल और चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है।

केरल में लैंडस्लाइड और मूसलाधार बारिश का तांडव: 25 लोगों ने गंवाई जान

दक्षिण भारत के खूबसूरत राज्य केरल में मानसूनी बारिश आफत बनकर बरसी है। राज्य के पहाड़ी जिलों विशेष रूप से वायनाड, इडुक्की, कोट्टायम और पथानामथिट्टा में हुई अत्यधिक भारी बारिश के बाद कई स्थानों पर भूस्खलन (Landslides) और मिट्टी धंसने की भीषण घटनाएं सामने आई हैं। बारिश और भूस्खलन से जुड़ी आपदाओं में अब तक 25 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश के लिए सेना और एनडीआरएफ के जवान खोजी कुत्तों और भारी मशीनों के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे हुए हैं।

पेरियार, पम्पा और मीनाचिल नदियां उफान पर हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया है। दर्जनों सड़कें धंस जाने और पुलों के बह जाने की वजह से पहाड़ी इलाकों के कई गांव मुख्य मार्ग से कट गए हैं। राज्य सरकार ने संवेदनशील और जोखिम वाले क्षेत्रों से हजारों लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई जिलों में शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं और तटीय इलाकों के मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।

ओडिशा में महानदी का रौद्र रूप: 22 जिलों में 8 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित

पूर्वी भारत के तटीय राज्य ओडिशा में उफनती नदियां भारी तबाही मचा रही हैं। ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई लगातार बारिश के कारण हीराकुद बांध (Hirakud Dam) के कई गेट खोलने पड़े हैं, जिससे महानदी और उसकी सहायक नदियों में बाढ़ का पानी तेजी से निचले इलाकों में फैल रहा है। ओडिशा विशेष राहत आयुक्त (SRC) के अनुसार, राज्य के 30 में से 22 जिले इस समय बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं, जिससे 8 लाख से अधिक लोग प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं।

संबलपुर, कटक, पुरी, केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर और खोरधा जिलों के सैकड़ों गांव टापू बन गए हैं। कटक और संबलपुर के निचले इलाकों में सड़कें और घर जलमग्न हो चुके हैं। महानदी के तटबंधों में कई जगहों पर दरारें आने या पानी का रिसाव होने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। प्रशासन द्वारा नौकाओं के जरिए प्रभावित इलाकों तक सूखा राशन, पीने का पानी और दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं। कटक और पूरी के बीच संपर्क कट जाने के कारण राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर यातायात ठप हो गया है।

सेना, NDRF और राहत टीमों का महा-रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

असम, केरल और ओडिशा तीनों राज्यों में आपदा की स्थिति को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें हाई अलर्ट मोड में काम कर रही हैं। तीनों राज्यों में एनडीआरएफ (NDRF) की दर्जनों टीमों को तैनात किया गया है। असम के उफनते पानी में फंसे बुजुर्गों, बच्चों और पशुओं को मोटर बोट्स के जरिए सुरक्षित स्थानों पर लाया जा रहा है। केरल के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से आपातकालीन राहत सामग्री की एयरड्रॉपिंग की जा रही है और गंभीर रूप से घायलों को एयरलिफ्ट किया जा रहा है।

ओडिशा में स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) और दमकल विभाग की टीमें दिन-रात राहत कार्यों में जुटी हुई हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संक्रामक बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए विशेष मेडिकल टीमों का गठन किया गया है, जो राहत शिविरों में जाकर दवाइयां और पानी शुद्ध करने वाली क्लोरीन की गोलियां बांट रही हैं।

मौसम विभाग (IMD) का रेड और ऑरेंज अलर्ट: आने वाले 48 घंटे बेहद नाजुक

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपनी ताजा चेतावनी में कहा है कि आने वाले 48 घंटों के दौरान मौसम का मिजाज और अधिक बिगड़ सकता है। मौसम विभाग ने असम और उससे सटे पूर्वोत्तर राज्यों मेघालय व अरुणाचल प्रदेश के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। IMD के अनुसार, मेघालय के खासी हिल्स और अरुणाचल के पापुमपारे में मूसलाधार बारिश होने से असम की नदियां और अधिक उफान पर आ सकती हैं।

इसी तरह केरल और तटीय कर्नाटक के लिए अगले दो दिनों तक तेज हवाओं (40 से 50 किमी/घंटा) के साथ अति भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में भी चक्रवाती परिसंचरण के कारण भारी बारिश जारी रहने का अनुमान है। प्रशासन ने सभी राज्यों के नागरिकों से अपील की है कि वे नदियों, झरनों और कमजोर पहाड़ी ढलानों के पास जाने से बचें और स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करें।

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