Meta PM Modi Video Block: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक वीडियो पर रोक से हड़कंप; सरकार ने मेटा के ग्लोबल हेड को किया तलब, 3 अगस्त को संसदीय समिति के सामने होगी पेशी

Meta PM Modi Video Block: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक वीडियो पर रोक से हड़कंप; सरकार ने मेटा के ग्लोबल हेड को किया तलब, 3 अगस्त को संसदीय समिति के सामने होगी पेशी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी मेटा एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। पेपर लीक मुद्दे पर देश के युवाओं और छात्रों को सख्त कदम उठाने का भरोसा देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर एक 3 मिनट का वीडियो अपलोड किया था। हालांकि, कुछ ही घंटों बाद इस वीडियो को भारत में उपयोगकर्ताओं के लिए ब्लॉक कर दिया गया और स्क्रीन पर "कानूनी अनुरोध के कारण सामग्री उपलब्ध नहीं है" का संदेश दिखने लगा। इस घटना पर भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY) ने कड़ा रुख अपनाते हुए मेटा के ग्लोबल प्रेसिडेंट जोएल कापलान और इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी को समन भेजा है। चौतरफा घिरने के बाद मेटा ने आधिकारिक तौर पर सरकार से माफी मांगते हुए इसे अपने ऑटोमेटेड कंटेंट फिल्टर में आई 'तकनीकी खराबी' (Technical Glitch) करार दिया है।

नफरती बयानों पर चुप्पी और संदेश पर सेंसरशिप: मेटा के सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शनों के दौरान जहां एक तरफ फर्जी वीडियो, अफवाहों और भड़काऊ बयानों की बाढ़ आई हुई थी, वहीं दूसरी तरफ पीएम मोदी के उस वीडियो को सेंसर कर दिया गया जिसने इंस्टाग्राम पर महज 24 घंटे में 30 करोड़ से अधिक व्यूज का नया विश्व रिकॉर्ड बनाया था। हैरान करने वाली बात यह है कि उस समय केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के डीपफेक वीडियो और विदेशी सोशल मीडिया अकाउंट्स से फैलाए जा रहे झूठे विमर्शों को रोकने में मेटा का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पूरी तरह नाकाम साबित हुआ। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्रालय मेटा की 'तकनीकी खराबी' वाली सफाई से बिल्कुल संतुष्ट नहीं है, क्योंकि कंपनी यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि बिना किसी अदालती आदेश या कानूनी एजेंसी के अनुरोध के 'लीगल रिस्ट्रिक्शन' का फर्जी मैसेज स्क्रीन पर कैसे जेनरेट हुआ।

3 अगस्त को संसदीय समिति के समक्ष पेशी: सोशल मीडिया दिग्गजों पर कसेगा शिकंजा

इस गंभीर मामले को देखते हुए संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति ने भी कड़ा कदम उठाया है। संसदीय समिति ने 3 अगस्त 2026 को होने वाली बैठक के लिए मेटा, एक्स (ट्विटर), स्नैपचैट और गूगल के वरिष्ठ प्रतिनिधियों को समन भेजा है। इस बैठक में नागरिकों की डेटा प्राइवेसी, ऑनलाइन सुरक्षा और भारतीय कानूनों के अनुपालन की समीक्षा की जाएगी। अकेले भारत से वित्त वर्ष 2024-25 में ₹29,392 करोड़ का विज्ञापन राजस्व कमाने वाली और 54 करोड़ से अधिक वॉट्सऐप उपयोगकर्ताओं का आधार रखने वाली कंपनी मेटा पर यह आरोप लग रहा है कि वह निष्पक्ष प्लेटफॉर्म रहने के बजाय एक एजेंडा टूल में बदलती जा रही है, जो किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए चिंताजनक संकेत है।

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