भारत में वीजा नियमों में बड़ा बदलाव: अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के छह गैर-मुस्लिम समुदायों के लिए वीजा हुआ अनिवार्य

भारत में वीजा नियमों में बड़ा बदलाव: अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के छह गैर-मुस्लिम समुदायों के लिए वीजा हुआ अनिवार्य

भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और आव्रजन (Immigration) नीतियों से इस वक्त एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार के केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश की सुरक्षा और सीमाओं के प्रबंधन को और अधिक मजबूत तथा पारदर्शी बनाने के लिए पड़ोसी देशों से आने वाले नागरिकों के लिए वीजा और पासपोर्ट के नियमों में कड़े बदलाव किए हैं। इस नए और महत्वपूर्ण फैसले का सीधा असर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आने वाले उन छह गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों पर पड़ेगा, जो अब तक विभिन्न कारणों से विशेष कानूनी छूट का लाभ उठा रहे थे। सरकार की इस नई अधिसूचना के बाद अब इन सभी नागरिकों को भारत में कानूनी रूप से रहने के लिए उचित श्रेणी का वैध वीजा हासिल करना अनिवार्य कर दिया गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि गृह मंत्रालय के इस नए आदेश के दायरे में कौन-कौन से लोग आएंगे और नेपाल-भूटान सीमाओं तथा अन्य पड़ोसी देशों के रूट पर क्या नए नियम लागू किए गए हैं।

क्या है नया नियम और किन लोगों पर पड़ेगा इसका सीधा असर

केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई नई और संशोधित अधिसूचना के अनुसार, यह नियम मुख्य रूप से उन प्रवासियों पर लागू होगा जो धार्मिक उत्पीड़न या उसके भय के चलते 31 दिसंबर 2024 तक भारत में प्रवेश कर चुके थे। इन लोगों के पास भारत आने के समय वैध यात्रा दस्तावेज (Travel Documents) नहीं थे या फिर उनके पास जो दस्तावेज थे, वे समयानुसार समाप्त हो चुके थे।

इस नए बदलाव के दायरे में मुख्य रूप से छह गैर-मुस्लिम समुदाय—हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई—के लोग आएंगे, जो मुख्य रूप से अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से ताल्लुक रखते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इससे पहले सितंबर 2025 में जारी किए गए एक आदेश के तहत इन तीनों पड़ोसी देशों से आए इन छह समुदायों के लोगों को पासपोर्ट और वीजा की शर्तों से विशेष छूट दी गई थी। लेकिन अब सरकार ने सुरक्षा और कानूनी स्पष्टता को ध्यान में रखते हुए उस पूर्व व्यवस्था में संशोधन कर दिया है, जिसके तहत अब इन सभी लोगों को भारत की धरती पर वैध रूप से रहने के लिए उचित श्रेणी का वीजा लेना ही होगा।

नेपाल और भूटान सीमा तथा आवाजाही के रूट पर भी बढ़ाई गई कड़ी सख्ती

केवल पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के शरणार्थियों या प्रवासियों तक ही यह नियम सीमित नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार ने भारत के मित्र देशों—नेपाल और भूटान—के साथ लगने वाली सीमाओं और वहां से आने वाले यात्रियों के लिए भी नियमों को बेहद सख्त बना दिया है। नए 'वीजा मैनुअल' के प्रावधानों के तहत अब भारत, नेपाल और भूटान के नागरिकों को एक-दूसरे के देश में आने-जाने के लिए केवल वही आधिकारिक पहचान दस्तावेज दिखाने होंगे, जिन्हें इस मैनुअल में विधिवत मान्यता दी गई है।

इसके अलावा, यदि कोई भारतीय नागरिक नेपाल या भूटान के रास्ते होते हुए किसी तीसरे देश की यात्रा कर रहा है, तो उसके लिए अपने साथ वैध पासपोर्ट रखना और केवल तय सीमा चौकियों (Designated Checkpoints) से ही गुजरना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है। बिना उचित कागजी कार्रवाई और तय मार्गों के आवाजाही करने वालों पर सुरक्षा एजेंसियां अब पैनी नजर रखेंगी।

चीन, पाकिस्तान और अन्य देशों से आने वालों के लिए भी वीजा और पासपोर्ट अनिवार्य

सुरक्षा के मोर्चे पर किसी भी प्रकार की कोताही न बरतते हुए केंद्र सरकार ने उन विदेशी नागरिकों के लिए भी नियमों को और अधिक कड़ा कर दिया है जो नेपाल या भूटान के रास्ते भारत में प्रवेश करते हैं। नए नियमों के मुताबिक, यदि नेपाल या भूटान के रास्ते आने वाले नागरिक चीन, पाकिस्तान, हांगकांग या मकाऊ जैसे देशों से होकर भारत आ रहे हैं, तो उनके लिए भी अब वैध पासपोर्ट और भारतीय वीजा दिखाना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है।

हालांकि, इन तमाम कड़े और नए संशोधनों के बीच केंद्र सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में लंबे समय से रह रहे श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों और तिब्बती नागरिकों के लिए पासपोर्ट और वीजा से जुड़ी पूर्ववर्ती कानूनी छूट को यथावत जारी रखा है। सरकार के इस कदम से स्पष्ट है कि जहां एक तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमाओं की पवित्रता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ संवेदनशील मामलों में मानवीय पहलुओं का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है।