हिंद महासागर में भारत का 'पावर प्ले': प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा से चीन की बढ़ेगी बेचैनी, क्या है मिशन का एजेंडा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज 27 जून से 29 जून तक सेशेल्स की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर हैं। सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के विशेष निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा भारत के 'सागर' (SAGAR - Security and Growth for All in the Region) विजन को नई गति प्रदान करेगी। अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। यह यात्रा वैश्विक पटल पर भारत के बढ़ते प्रभाव और हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी निर्णायक भूमिका को प्रदर्शित करती है।
सामरिक रूप से क्यों अहम है यह दौरा? वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में, विशेषकर पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच, सेशेल्स का महत्व कई गुना बढ़ गया है। भारत की अधिकांश ऊर्जा जरूरतों का आयात इन्हीं समुद्री मार्गों से होता है, जिसके पास सेशेल्स स्थित है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक पैठ को देखते हुए भारत के लिए यह देश एक महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रहरी के रूप में कार्य करता है। यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देगा, बल्कि समुद्री सुरक्षा, हाइड्रोग्राफी और रक्षा क्षमता निर्माण में भारत की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
चीन के प्रभाव को मात देने की रणनीति पिछले कुछ वर्षों में चीन ने हिंद महासागर के द्वीपीय देशों में अपनी पहुंच बढ़ाने की पुरजोर कोशिश की है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि वह इस क्षेत्र में खुद को एक 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' (Net Security Provider) के रूप में स्थापित करने के लिए दृढ़ है। फरवरी 2026 में सेशेल्स के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान जो आर्थिक विकास और सुरक्षा का 'दृष्टि प्रपत्र' तैयार किया गया था, उसे धरातल पर उतारने की दिशा में यह दौरा मील का पत्थर साबित होगा।
क्या होगा खास? इस दौरे में भारतीय रक्षा बलों की एक टुकड़ी और नौसेना के दो विशेष जहाज भी समारोह का हिस्सा बनेंगे, जो भारत की समुद्री शक्ति और रक्षा सहयोग का स्पष्ट संकेत देंगे। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति हर्मिनी के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में क्षेत्रीय स्थिरता, व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा मुख्य केंद्र में रहेगी। रणनीतिकारों का मानना है कि सेशेल्स के साथ मजबूत साझेदारी भारत को हिंद महासागर में एक अपराजेय सुरक्षा कवच प्रदान करेगी, जो आने वाले समय में चीन के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरेगा।