सक्रिय मानसून का नया दौर: अगले 6-7 दिनों तक देश के बड़े हिस्से में मूसलाधार बारिश का अलर्ट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के विशाल भूभाग पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के अत्यंत सक्रिय चरण में प्रवेश करने के बाद एक विस्तृत और दीर्घकालिक मौसम बुलेटिन जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत, मध्य भारत, पूर्वोत्तर और पूर्वी तटीय राज्यों में अगले 6 से 7 दिनों तक लगातार रुक-रुक कर भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rainfall) का सिलसिला जारी रहेगा। वायुमंडलीय परिस्थितियों के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर एक सुस्पष्ट चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र (Cyclonic Circulation) बना हुआ है, जबकि मानसूनी ट्रफ लाइन अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर झुकते हुए कई मौसमी प्रणालियों को ऊर्जा दे रही है। इसके साथ ही अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ओर से भारी मात्रा में नमी का प्रवाह गंगा के मैदानी इलाकों और पश्चिमी हिमालय की तलहटी तक पहुंच रहा है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले एक सप्ताह के दौरान मौसम का यह उग्र मिजाज न केवल तापमान में गिरावट लाएगा, बल्कि निचले इलाकों में भीषण जलभराव, नदियों के उफान, आकाशीय बिजली (वज्रपात) और पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन जैसी गंभीर आपदाओं को भी जन्म दे सकता है।
उत्तर प्रदेश में पश्चिमी से पूर्वी छोर तक आफत की फुहारें: वज्रपात और जलभराव का दोहरा संकट
उत्तर प्रदेश के लिए आगामी 6 से 7 दिन मौसम के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील रहने वाले हैं। मौसम केंद्र लखनऊ द्वारा जारी किए गए ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य के पश्चिमी संभाग से लेकर अवध, रुहेलखंड और पूर्वांचल के 30 से अधिक जिलों में भारी बारिश का येलो और ऑरेंज अलर्ट प्रभावी किया गया है। सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर में अगले 72 घंटों के दौरान तेज हवाओं के साथ मूसलाधार वर्षा दर्ज की जा सकती है। वहीं राजधानी लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी, अयोध्या, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, आजमगढ़, गाजीपुर, बलिया और गोरखपुर में गरज-चमक के साथ लगातार बौछारें पड़ने का अनुमान है। बुंदेलखंड के झांसी, ललितपुर, बांदा, हमीरपुर और जालौन में भी मध्यम से भारी बारिश का साया बना हुआ है। मौसम विभाग ने पूर्वांचल और तराई के जनपदों में आकाशीय बिजली गिरने (ठनका) की गंभीर आशंका जताई है। खेतों में काम कर रहे किसानों को चेताया गया है कि बादलों की तेज गर्जना के दौरान वे पक्के मकानों में शरण लें, क्योंकि खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे वज्रपात की घटनाएं जानलेवा साबित हो सकती हैं।
उत्तराखंड और हिमाचल में पहाड़ों पर भूस्खलन का साया: नदियां उफान पर, चारधाम यात्रा पर एडवाइजरी
पर्वतीय राज्यों में मौसम का मिजाज पहले से ही विकराल बना हुआ है और आगामी 6-7 दिनों तक यहां राहत मिलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने उत्तराखंड के देहरादून, नैनीताल, चंपावत, उधम सिंह नगर, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चमोली जिलों के लिए भारी से बहुत भारी वर्षा का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। लगातार हो रही बारिश के चलते अलकनंदा, मंदाकिनी, भागीरथी, पिंडर और काली नदियां खतरे के निशान के करीब बह रही हैं। पहाड़ी ढलानों पर मिट्टी के कटाव और बोल्डर गिरने (Landslides) के कारण बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-7), केदारनाथ मार्ग और ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर कई स्थानों पर यातायात बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है। राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और जिला प्रशासन ने चारधाम तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम की सटीक जानकारी लिए बिना यात्रा शुरू न करें और संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर रात के समय सफर करने से पूरी तरह बचें। पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश के मंडी, कुल्लू, शिमला, कांगड़ा, सिरमौर और चंबा में भी अगले 5 से 6 दिनों तक तेज बारिश और अचानक बाढ़ (Flash Floods) की चेतावनी जारी की गई है।
दिल्ली-एनसीआर से लेकर मध्य भारत और पूर्वोत्तर तक: जानिए किन-किन राज्यों में होगा बादलों का डेरा
देश की राजधानी नई दिल्ली और एनसीआर के शहरों—नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम में अगले 6 से 7 दिनों तक आसमान में घने मानसूनी बादलों का डेरा रहेगा। दिल्ली में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली झोंकेदार हवाओं के साथ मध्यम से भारी बारिश के कई स्पेल देखने को मिल सकते हैं, जिससे दिन का अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच सिमट जाएगा। हालांकि, लगातार होने वाली फुहारों से दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे, धौला कुआं, आईटीओ और निचले अंडरपासों में गंभीर जलभराव और भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा हो सकती है।
मध्य भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी मौसमी उथल-पुथल तेज रहेगी:
-
बिहार और झारखंड: बिहार के 20 से अधिक जिलों (पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया) में पहले से जारी बाढ़ के संकट के बीच अगले 4 से 5 दिनों तक भारी बारिश और ठनका गिरने का अलर्ट है। झारखंड के रांची, जमशेदपुर, धनबाद और दुमका में 40 किमी की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ झमाझम बारिश होगी।
-
मध्य प्रदेश और राजस्थान: पूर्वी राजस्थान (जयपुर, कोटा, भरतपुर, उदयपुर) और मध्य प्रदेश के भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर और सागर संभागों में आगामी 6 दिनों तक मानसून पूरी ताकत से बरसेगा।
-
पूर्वोत्तर भारत और तटीय क्षेत्र: असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में बंगाल की खाड़ी से आ रही मानसूनी हवाओं के प्रभाव से भारी से अति-भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है, जिससे ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर और अधिक बढ़ सकता है।
मौसमी तंत्र का वैज्ञानिक विश्लेषण: चक्रवाती घेरे और पुरवैया हवाओं के संगम से क्यों बनी यह स्थिति?
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, सितंबर के पहले और दूसरे पखवाड़े में इस तरह की व्यापक और लगातार होने वाली मानसूनी बारिश के पीछे एक जटिल वायुमंडलीय प्रणाली सक्रिय है। सामान्यतः इस समय मानसून की विदाई की प्रक्रिया धीरे-धीरे शुरू होने की ओर बढ़ती है, लेकिन इस वर्ष बंगाल की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में एक के बाद एक लगातार बने निम्न दबाव के क्षेत्रों (Low-Pressure Systems) ने मानसून की वापसी की गति को पूरी तरह थाम दिया है। इस समय पश्चिमोत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश पर केंद्रित साइक्लोनिक सर्कुलेशन वायुमंडल के निचले और मध्यम स्तरों तक फैला हुआ है।
इसके साथ ही, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के ऊपर से गुजर रहा एक मध्यम तीव्रता का पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) पूर्व से आने वाली नम हवाओं के साथ सीधा संपर्क बना रहा है। जब ठंडी और शुष्क पश्चिमी हवाएं अत्यधिक गर्म और नम पूर्वी हवाओं से टकराती हैं, तो वायुमंडल में तीव्र अस्थिरता (Atmospheric Instability) पैदा होती है। इसी टकराव के चलते ऊंचे वर्टिकल विस्तार वाले क्यूम्युलोनिम्बस (Cumulonimbus) बादल विकसित हो रहे हैं, जो एक छोटे से दायरे में कुछ ही घंटों के भीतर भारी मात्रा में पानी गिराने और भयंकर बिजली कड़कड़ाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वेदर सिस्टम अगले 150 से 160 घंटों तक सक्रिय बना रहेगा, जिसके कारण उत्तर और पूर्वी भारत को लगातार बादलों के पहरे में रहना पड़ेगा।
आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम केंद्र की सुरक्षा एडवाइजरी: आंधी, पानी और बिजली से कैसे बचें?
खराब मौसम और विशेष रूप से आकाशीय बिजली (Lightning) व अचानक आने वाले उफान को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और संबंधित राज्य सरकारों ने नागरिकों के लिए विशेष सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
-
आकाशीय बिजली से सतर्कता: यदि आसमान में बादल गरज रहे हों या बिजली चमक रही हो, तो खुले मैदान, खेत, तालाब के किनारे या ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़े होने की भूल कतई न करें। किसी पक्के कंक्रीट के मकान या बंद वाहन के भीतर ही शरण लें।
-
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का उपयोग: वज्रपात के दौरान घरों के मुख्य टीवी, फ्रिज, कंप्यूटर और वाई-फाई मॉडम के प्लग बिजली के सॉकेट से अलग कर दें। चार्जिंग पर लगे मोबाइल फोन का उपयोग करने से बचें।
-
पहाड़ों पर यात्रा से परहेज: पर्यटकों और वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के दुर्गम नदी किनारों और जलप्रपातों (Waterfalls) के पास सेल्फी लेने या पिकनिक मनाने न जाएं, क्योंकि अचानक आने वाले फ्लैश फ्लड में बचने का मौका नहीं मिलता।
-
शहरी जलभराव और वाहन संचालन: भारी वर्षा के दौरान दोपहिया वाहन चालक जलमग्न सड़कों और खुले मेनहोलों से सावधान रहें। उफनते रपटों, पुलियों और अंडरपासों को पार करने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं।
-
किसानों के लिए कृषि सलाह: धान की फसलों में अतिरिक्त जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें। आगामी 5 दिनों तक खेतों में किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों का छिड़काव रोक दें और कटी हुई फसलों को सुरक्षित शेड में पहुंचाएं।
-
दामिनी मोबाइल ऐप: ग्रामीण और कस्बाई नागरिक अपने फोन में भारत सरकार का 'दामिनी' ऐप इंस्टॉल रखें, ताकि बिजली गिरने से आधा घंटा पहले मिलने वाले अलर्ट से जान बचाई जा सके।