Weather Alert: पहाड़ों पर भूस्खलन का बड़ा खतरा, पूर्वोत्तर में भारी बारिश की चेतावनी; हफ्ते के पहले दिन जानें अपने शहर का हाल

Weather Alert: पहाड़ों पर भूस्खलन का बड़ा खतरा, पूर्वोत्तर में भारी बारिश की चेतावनी; हफ्ते के पहले दिन जानें अपने शहर का हाल

हफ्ते के पहले कारोबारी दिन अगर आप घर से बाहर दफ्तर या किसी जरूरी काम के सिलसिले में निकलने की योजना बना रहे हैं, तो सबसे पहले मौसम का ताजा मिजाज जरूर जान लें। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, देश के कई हिस्सों में मानसूनी चक्रवात और निम्न दबाव का क्षेत्र पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। इस वजह से पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड की गंभीर चेतावनी जारी की गई है। वहीं दूसरी तरफ पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में मूसलाधार बारिश जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर सकती है।

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में लगातार हो रही बारिश की वजह से पहाड़ दरक रहे हैं। कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों और संपर्क मार्गों पर मलबा गिरने से आवागमन बाधित होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने पहाड़ी घाटियों, नदी किनारे रहने वाले स्थानीय नागरिकों और तीर्थयात्रियों को विशेष रूप से आगाह किया है कि वे अनावश्यक यात्राओं से बचें। अचानक आने वाली बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड और ढलानों पर पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आ सकती हैं। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन टीमों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर तैनात कर दिया है।

पूर्वोत्तर भारत में बादलों का डेरा: मूसलाधार बारिश से नदियां उफान पर

पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में मानसूनी बारिश रौद्र रूप धारण किए हुए है। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में घने बादलों का डेरा जमा हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं के तीव्र प्रवाह के चलते पूर्वोत्तर के अधिकांश जिलों में अगले चौबीस से अड़तालीस घंटों तक भारी से बहुत भारी वर्षा का दौर जारी रहने का अनुमान है।

असम की ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ का संकट मंडराने लगा है। मेघालय के चेरापूंजी और मासिनराम के आसपास के इलाकों में लगातार तेज बारिश रिकॉर्ड की जा रही है। पूर्वोत्तर के पहाड़ी रास्तों पर विजिबिलिटी बेहद कम हो गई है, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन ने निचले इलाकों के स्कूलों और दफ्तरों को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

मैदानी राज्यों और दिल्ली-एनसीआर में कैसा रहेगा आज का तापमान और उमस

पहाड़ों और पूर्वोत्तर में जहां झमाझम बारिश आफत बनकर बरस रही है, वहीं उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर क्षेत्र में सुबह के समय आसमान में बादल छाए रहने और हल्की धुंध देखने को मिली है। हवा में नमी का स्तर नब्बे प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है, जिससे लोगों को चिपचिपी उमस का सामना करना पड़ रहा है।

मौसम विभाग का कहना है कि दोपहर बाद कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बौछारें पड़ सकती हैं, जिससे तापमान में दो से तीन डिग्री की मामूली गिरावट आएगी। हालांकि, जब तक व्यापक स्तर पर झमाझम बारिश नहीं होती, तब तक उमस भरी गर्मी से पूरी राहत मिलने की उम्मीद कम ही दिखाई दे रही है। कामकाजी लोगों को ऑफिस आते-जाते समय ट्रैफिक जाम और उमस की दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है।

उत्तर प्रदेश और बिहार में मौसम का मिजाज: बादलों की आवाजाही और छिटपुट फुहारें

उत्तर प्रदेश और बिहार के मैदानी इलाकों में मानसून की सक्रियता में असमानता देखी जा रही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा से सटे तराई क्षेत्रों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जिससे धान की फसलों को संजीवनी मिली है। गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महाराजगंज जैसे जिलों में गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। वहीं पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के जनपदों में तेज धूप और बादलों की लुकाछिपी जारी है।

बिहार के उत्तर-पूर्वी जिलों जैसे किशनगंज, अररिया और पूर्णिया में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर-पश्चिम दिशा से चलने वाली हवाएं वातावरण में नमी बनाए रखेंगी, जिससे दिन का तापमान सामान्य के आसपास बना रहेगा, लेकिन उमस लोगों के पसीने छुड़ाएगी।

मध्य और दक्षिण भारत का हाल: कहीं मध्यम बारिश तो कहीं तेज हवाओं का दौर

मध्य भारत के राज्यों, विशेषकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में मौसमी दबाव की वजह से कई जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने का पूर्वानुमान है। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में बीते दिनों बने मानसूनी सिस्टम का प्रभाव अभी भी देखा जा रहा है, जिससे नदियों और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ गई है।

दक्षिण भारत की बात करें तो केरल, कर्नाटक के तटीय इलाकों और तमिलनाडु में मानसून की गति थोड़ी धीमी जरूर हुई है, लेकिन पश्चिमी घाट से सटे इलाकों में तेज हवाओं के साथ स्थानीय बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी। मछुआरों को तटीय इलाकों में तेज लहरों और हवा की गति को देखते हुए गहरे समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

ऑफिस जाने वाले लोगों और मुसाफिरों के लिए जरूरी सुरक्षा एडवाइजरी

सप्ताह के पहले कामकाजी दिन सड़कों पर वाहनों का दबाव सामान्य दिनों से कहीं अधिक रहता है। भारी बारिश और लैंडस्लाइड की चेतावनियों के बीच अगर आप घर से बाहर निकल रहे हैं, तो कुछ सावधानियां जरूर बरतें:

पहाड़ी रास्तों पर सफर करने वाले यात्री राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबरों से मार्ग की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा शुरू करें। जिन इलाकों में जलभराव की समस्या पुरानी है, वहां वैकल्पिक रास्तों का चुनाव करें ताकि ट्रैफिक जाम में फंसने से बचा जा सके।

बिजली के खंभों, पुराने पेड़ों और जर्जर इमारतों के पास खड़े होने से बचें, क्योंकि तेज हवाओं और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा लगातार बना रहता है। डिजिटल पेमेंट और जरूरी दस्तावेजों को वाटरप्रूफ बैग में रखें और अपने दोपहिया वाहनों की गति नियंत्रित रखें क्योंकि गीली सड़कों पर फिसलने का जोखिम सबसे ज्यादा रहता है।