हरिद्वार अर्धकुंभ में 14 जनवरी से 20 अप्रैल तक होंगे 11 'अमृत स्नान', 15 मार्च को देव डोलियों का भव्य संगम; देखें पूरी पावन तिथियां

हरिद्वार अर्धकुंभ में 14 जनवरी से 20 अप्रैल तक होंगे 11 'अमृत स्नान', 15 मार्च को देव डोलियों का भव्य संगम; देखें पूरी पावन तिथियां

तीर्थनगरी हरिद्वार में मां गंगा के पावन तट पर आयोजित होने वाले दिव्य और भव्य अर्धकुंभ मेले को लेकर अखाड़ा परिषद, मेला प्रशासन और उत्तराखंड सरकार ने स्नान की तिथियों का खाका पूरी तरह तैयार कर लिया है। देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं, साधु-संतों और अखाड़ों के संन्यासियों के लिए 14 जनवरी यानी मकर संक्रांति से लेकर 20 अप्रैल तक कुल 11 'अमृत स्नान' (शाही और प्रमुख स्नान) आयोजित किए जाएंगे। आस्था के इस विशाल महापर्व में इस बार उत्तराखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति और देव परंपरा का सबसे अलौकिक दृश्य भी देखने को मिलेगा, जब 15 मार्च को कुमाऊं और गढ़वाल के सैकड़ों गांवों से आने वाली पारंपरिक 'देव डोलियां' हर की पैड़ी पर एक साथ पहुंचकर गंगा में अमृत स्नान करेंगी।

14 जनवरी मकर संक्रांति से होगा महाकुंभ का श्रीगणेश

अर्धकुंभ मेले की औपचारिक शुरुआत 14 जनवरी को मकर संक्रांति के प्रथम पावन पर्व से होगी। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे और उत्तरायण की पुण्य बेला में लाखों श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त से ही हर की पैड़ी, सुभाष घाट, मालवीय द्वीप और वीआईपी घाट पर गंगा की अविरल धारा में डुबकी लगाएंगे। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस अवधि में गुरु और सूर्य के विशेष राशि संयोग के चलते गंगा स्नान का फल कई गुना बढ़ जाता है। मकर संक्रांति के इस प्रथम स्नान के साथ ही पूरे मेला क्षेत्र में अखाड़ों के छावनी प्रवेश, संतों के प्रवचन और 24 घंटे चलने वाले विशाल भंडारों का शुभारंभ हो जाएगा।

15 मार्च: जब हिमालय की 500 से अधिक 'देव डोलियां' करेंगी पावन गंगा स्नान

इस अर्धकुंभ का सबसे बड़ा और आध्यात्मिक आकर्षण 15 मार्च को होने वाला 'देव डोली महास्नान' होगा। देवभूमि उत्तराखंड के दूरदराज के पर्वतीय अंचलों—बद्रीनाथ, केदारनाथ घाटी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और उत्तरकाशी—से अपने-अपने ग्राम देवताओं, कुलदेवियों और पूज्य ईष्टों के प्रतीक चिह्नों और ढोल-दमाऊ की थाप के साथ 500 से अधिक पारंपरिक देव डोलियां हरिद्वार पहुंचेंगी।

  • संस्कृति और अध्यात्म का अनूठा महासंगम: जब हिमालयी गांवों के ग्रामीण अपने पारंपरिक परिधानों में सजे-धजे देव डोलियों को कंधों पर उठाकर हर की पैड़ी की ओर बढ़ेंगे, तो पूरा वातावरण 'जय मां गंगे' और स्थानीय देव जयकारों से गूंज उठेगा।

  • देवताओं का दुर्लभ गंगा स्नान: लोक मान्यताओं के अनुसार, देवताओं के इन विग्रहों और डोलियों का गंगा के पावन जल में अभिषेक कराने से पूरे उत्तराखंड और राष्ट्र पर दैवीय कृपा बनी रहती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दुर्लभ क्षण का साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से लाखों फोटोग्राफर्स, शोधार्थी और भक्त हरिद्वार में जुटेंगे।

14 जनवरी से 20 अप्रैल तक: 11 'अमृत स्नान' की पूरी सूची

मेला प्रशासन और विद्वत सभा द्वारा तय किए गए 11 प्रमुख अमृत स्नान की तिथियां इस प्रकार हैं:

क्र.सं. पावन पर्व / स्नान का नाम निर्धारित तिथि धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व
1. मकर संक्रांति (प्रथम अमृत स्नान) 14 जनवरी सूर्य का उत्तरायण प्रवेश, अर्धकुंभ का औपचारिक शुभारंभ
2. पौष पूर्णिमा स्नान जनवरी (पूर्णिमा तिथि) कल्पवास की शुरुआत और संतों का गंगा पूजन
3. मौनी अमावस्या (शाही स्नान पर्व) माघ अमावस्या मौन व्रत साधना और अखाड़ों के नागा साधुओं का विशाल अमृत स्नान
4. बसंत पंचमी (अमृत स्नान) माघ शुक्ल पंचमी मां सरस्वती की आराधना और वसंत ऋतु का स्वागत
5. अचला सप्तमी (रथ सप्तमी) माघ शुक्ल सप्तमी सूर्य देव की विशेष कृपा और आरोग्य प्राप्ति का महास्नान
6. माघी पूर्णिमा माघ पूर्णिमा माघ मास के कल्पवास का समापन स्नान
7. महाशिवरात्रि (अत्यंत पावन शाही स्नान) फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी भगवान शिव की अराधना, समस्त 13 अखाड़ों का दिव्य गंगा स्नान
8. फाल्गुन पूर्णिमा (होलिका दहन पर्व) फाल्गुन पूर्णिमा रंगों के उत्सव के साथ गंगा तट पर भक्तिमय स्नान
9. देव डोली महास्नान (विशेष सांस्कृतिक स्नान) 15 मार्च उत्तराखंड की 500+ पारंपरिक देव डोलियों का सामूहिक गंगा अभिषेक
10. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (नव संवत्सर / नवरात्र) चैत्र शुक्ल पक्ष हिंदू नववर्ष का शुभारंभ और शक्ति उपासना का पावन स्नान
11. मेष संक्रांति / वैशाखी (अंतिम महास्नान) 13/14 से 20 अप्रैल सूर्य का मेष राशि में प्रवेश, कुंभ मेले का पूर्ण आहुति स्नान

13 अखाड़ों का वैभव और नागा साधुओं का शाही अंदाज

अर्धकुंभ के दौरान संन्यासी, बैरागी और उदासीन संप्रदाय के सभी 13 मान्यता प्राप्त अखाड़े अपने पारंपरिक अस्त्र-शस्त्रों, चांदी के हौदों, भव्य रथों और ध्वज-निशानों के साथ छावनियों से निकलकर हर की पैड़ी तक शाही जुलूस (पेशवाई) निकालेंगे। महाशिवरात्रि और मौनी अमावस्या के शाही स्नानों पर सबसे पहले महानिर्वाणी, अटल, जूना, निरंजनी और आनंद अखाड़े के नागा साधु हर की पैड़ी के 'ब्रह्मकुंड' में हर-हर महादेव के गगनभेदी उद्घोष के साथ डुबकी लगाएंगे। इसके बाद आम श्रद्धालुओं को गंगा स्नान के लिए आगे बढ़ने दिया जाएगा।

सुरक्षा और सुविधाओं का हाई-टेक खाका: AI कैमरे और आधुनिक घाट

करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित आमद को देखते हुए उत्तराखंड शासन ने मेला क्षेत्र को दर्जनों सुपर जोन और सेक्टरों में विभाजित कर दिया है।

  • क्राउड मैनेजमेंट के लिए AI सर्विलांस: हर की पैड़ी और प्रमुख रेलवे-बस स्टेशनों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो भीड़ का घनत्व बढ़ते ही स्वतः कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देंगे ताकि किसी भी तरह की भगदड़ की आशंका न रहे।

  • गंगा घाटों का विस्तार और जल की स्वच्छता: ऋषिकेश से लेकर हरिद्वार के बैरागी कैंप और कनखल तक नए पक्के घाटों और चेंजिंग रूम्स का निर्माण तेजी से पूरा किया जा रहा है। टिहरी बांध से निरंतर स्वच्छ और निर्मल जल छोड़ा जाएगा ताकि श्रद्धालु न्यूनतम जलस्तर पर भी स्वच्छ गंगा जल में आचमन कर सकें।

  • अस्थाई टेंट सिटी और स्वास्थ्य सुविधाएं: मेला क्षेत्र में 50,000 से अधिक श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए आधुनिक स्विस कॉटेज और डॉर्मिटरी टेंट सिटी बनाई जा रही हैं, साथ ही 100-बेड के अस्थाई आईसीयू अस्पताल और 24 घंटे संचालित एंबुलेंस बोट्स गंगा की लहरों पर तैनात रहेंगी।