Ghost Hostel Scam in Maharashtra: बिना छात्रों के ही डकार गए ₹1.62 करोड़, CAG रिपोर्ट में महाराष्ट्र के 'भूतिया हॉस्टल्स' का सनसनीखेज खुलासा

Ghost Hostel Scam in Maharashtra: बिना छात्रों के ही डकार गए ₹1.62 करोड़, CAG रिपोर्ट में महाराष्ट्र के 'भूतिया हॉस्टल्स' का सनसनीखेज खुलासा

महाराष्ट्र में देश की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी खजाने के साथ खिलवाड़ का एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। राज्य में सालों से कागजों पर चल रहे 'घोस्ट हॉस्टल्स' (भूतिया छात्रावास) के नाम पर करोड़ों रुपये का सरकारी फंड डकारा जा रहा था। इस महाफर्जीवाड़े का पर्दाफाश कम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की ताजा रिपोर्ट में हुआ है, जो अधिकारियों की नाक के नीचे चल रही खुली लूट को उजागर करती है।

कागजों पर छात्र, हकीकत में सन्नाटा: 4 साल तक बंटा फंड

राज्य विधानसभा में पेश की गई 'अनुपालन ऑडिट रिपोर्ट 2024' के अनुसार, महाराष्ट्र में 6 ऐसे हॉस्टल्स पाए गए हैं, जहां पिछले चार सालों से लगातार सरकारी फंडिंग की जा रही थी। इन हॉस्टल्स को पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों की मदद के लिए तैयार किया गया था। रिकॉर्ड में हर साल छात्र दिखाए जाते रहे, लेकिन धरातल पर न तो कोई छात्र था और न ही कोई बुनियादी सुविधाएं। इन भूतिया हॉस्टल्स के नाम पर कुल ₹1.62 करोड़ की सरकारी राशि जारी की गई, जिसका इस्तेमाल छात्रों के कल्याण के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया।

जालना जिले में सबसे बड़ा खेल: रिकॉर्ड में 38 छात्र, मौके पर जीरो

सीएजी की जांच में सबसे चौंकाने वाले आंकड़े जालना जिले से सामने आए हैं। यहां के मोदीखान हॉस्टल के रिकॉर्ड में 38 छात्रों और एक सुपरिटेंडेंट (अधीक्षक) का नाम दर्ज था, जिसके एवज में चार सालों के दौरान ₹18 लाख का फंड डकार लिया गया। इसी तरह जालना के जाफराबाद में भी 24 छात्रों की क्षमता वाला हॉस्टल पूरी तरह खाली मिला। अकेले जालना जिले में ही ऐसे 4 'घोस्ट हॉस्टल्स' पकड़े गए हैं, जहां फंड का एक भी पैसा सही जगह पर खर्च नहीं हुआ।

पुरुष चला रहे थे गर्ल्स हॉस्टल, 49 जगहों पर कोई सुपरिटेंडेंट नहीं

ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2024 तक महाराष्ट्र में करीब 443 सरकारी और 2,388 सरकारी सहायता प्राप्त हॉस्टल्स को फंडिंग दी जा रही थी। सुरक्षा और प्रबंधन के मोर्चे पर भी भारी लापरवाही सामने आई है। राज्य में 49 सरकारी हॉस्टल्स ऐसे पाए गए, जो बिना किसी सुपरिटेंडेंट के भगवान भरोसे चल रहे थे। हद तो तब हो गई जब 5 गर्ल्स हॉस्टल्स की जिम्मेदारी पुरुष सुपरिटेंडेंट के हाथों में पाई गई, जो छात्राओं की सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर मामला है।

टारगेट से चूकी सरकार, करोड़ों खर्च के बाद भी अधूरे प्रोजेक्ट

रिपोर्ट में सरकार के दावों की पोल खोलते हुए बताया गया है कि साल 2020 तक राज्य में 500 नए सरकारी हॉस्टल्स बनाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, करोड़ों रुपये की भारी-भरकम फंडिंग मिलने के बावजूद यह टारगेट सिर्फ 443 हॉस्टल्स पर ही सिमट कर रह गया। जो हॉस्टल्स बने भी, उनमें से कई बिना छात्रों के सिर्फ कागजी हेरफेर और भ्रष्टाचार का जरिया बनकर रह गए हैं।

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