'स्वतंत्रता सेनानियों ने सीने पर गोलियां खाईं...': महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार, वर्चुअली पेशी की मांग खारिज
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की फायरब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े आपराधिक मामले में पुलिस के सामने वर्चुअली यानी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की उनकी मांग को सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत में सुनवाई के दौरान जब मोइत्रा के वकील ने पुलिस स्टेशन जाने पर भीड़ द्वारा अंडे फेंके जाने और मॉब अटैक का डर जताया, तो सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि एक राजनेता को इस तरह के मामलों से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है।
"राजनीति में आकर अंडों से क्यों डरती हैं?": सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए बेहद कड़े शब्दों में नाराजगी जताई। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा, "आप एक सांसद हैं? राजनीति में कदम रखने के बाद क्या आप अंडों से डरती हैं? हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने तो अपनी छाती पर अंग्रेजों की गोलियां खाई थीं। इस तरह की अजीब याचिकाएं तो अदालत के सामने आनी ही नहीं चाहिए।" अदालत के इस दो टूक रुख ने साफ कर दिया कि संवैधानिक पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों को कानून की प्रक्रिया का सामना करने के लिए जमीनी स्तर पर उतरना ही होगा।
क्या है पूरा मामला और क्यों गरमाई है सियासत?
यह पूरा कानूनी विवाद इस साल जून महीने का है, जब टीएमसी सांसद के खिलाफ एक स्थानीय बीजेपी नेता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप था कि महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए अपने दो वीडियो में कुछ भड़काऊ टिप्पणियां की थीं। यह विवाद तब और बढ़ गया जब कृष्णानगर में एक अदालत परिसर के बाहर कथित तौर पर बीजेपी समर्थक हाथ में टमाटर और अंडे लेकर विरोध प्रदर्शन करने पहुंच गए थे। महुआ मोइत्रा के वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि उनके मुक्किल को कानूनन अधिकार है और वे अपने निर्वाचन क्षेत्र के पुलिस स्टेशन में पेश होना चाहती हैं, लेकिन पिछली बार उन्हें धमकियां दी गईं और अंडे फेंके गए थे, इसलिए उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जांच में शामिल होने की छूट दी जाए।
कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश का हवाला और याचिका वापस
सुप्रीम कोर्ट महुआ मोइत्रा के वकीलों की दलीलों से बिल्कुल भी संतुष्ट नजर नहीं आया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट पहले ही उन्हें जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करने का निर्देश दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक उन्हें जांच अधिकारी के सामने पेश होना ही होगा, वरना इसके गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। शीर्ष अदालत के इस कड़े तेवर को भांपते हुए महुआ मोइत्रा के वकील ने अंततः अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को वापस लिया हुआ मानकर खारिज कर दिया।