चलती ट्रेन में आ जाए भूकंप तो क्या करें? घबराकर गेट की तरफ भागना पड़ सकता है भारी, जान लें रेलवे की ये 5 लाइफ-सेविंग बातें

चलती ट्रेन में आ जाए भूकंप तो क्या करें? घबराकर गेट की तरफ भागना पड़ सकता है भारी, जान लें रेलवे की ये 5 लाइफ-सेविंग बातें

रेल यात्रा के दौरान प्राकृतिक आपदाओं, विशेष रूप से भूकंप (Earthquake) का सामना करना किसी भी यात्री के लिए बेहद डरावना अनुभव हो सकता है। हाई-स्पीड या सामान्य गति से दौड़ती ट्रेन में जब पटरियों के नीचे की जमीन हिलती है, तो बोगियों में झटके और कंपन सामान्य से कई गुना अधिक महसूस होते हैं। ऐसी अप्रत्याशित परिस्थिति में अधिकांश यात्री डर के मारे अपनी सीट छोड़कर आपातकालीन खिड़की या कोच के मुख्य दरवाजे (Gate) की तरफ भागने लगते हैं। आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों और भारतीय रेलवे के सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार, चलती ट्रेन में दरवाजे की ओर भागना जानलेवा साबित हो सकता है। गति में चल रही ट्रेन से बाहर कूदने या दरवाजे के पास खड़े होने पर पटरी से उतरने (Derailment) या संतुलन बिगड़ने से गंभीर हादसे की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में शांत रहकर सही कदम उठाना ही आपकी जान बचा सकता है।

1. दरवाजे की तरफ भागने या कूदने की गलती कभी न करें

भूकंप के झटके महसूस होते ही सबसे पहली मानवीय प्रतिक्रिया बाहर भागने की होती है, लेकिन ट्रेन के मामले में यह नियम पूरी तरह उल्टा काम करता है:

  • ट्रेन की गति और झटका: जब भूकंप आता है, तो ट्रेन के पहिए और पटरियों के बीच घर्षण असामान्य हो जाता है। ट्रेन में तेज हिचकोले (Oscillations) आ सकते हैं। ऐसे में गलियारे (Aisle) में भागने पर आप संतुलन खोकर फर्श पर गिर सकते हैं या अन्य यात्रियों से टकराकर चोटिल हो सकते हैं।

  • ओएचई (OHE) हाई-टेंशन तारों का खतरा: यदि भूकंप के कारण रेलवे ट्रैक के किनारे लगे बिजली के खंभे (OHE Masts) झुकते हैं या टूटते हैं, तो 25,000 वोल्ट के हाई-टेंशन तार बोगी के दरवाजों या ट्रैक के आसपास लटक सकते हैं। ऐसे में बाहर कूदने की कोशिश सीधे बिजली के संपर्क में लाकर जानलेवा हो सकती है।

  • खाई, पुल या सुरंग का जोखिम: आपको नहीं पता होता कि जिस समय भूकंप आया, ट्रेन किसी ऊंचे पुल (River Bridge), गहरी खाई के पास से या सुरंग के भीतर से गुजर रही है। दरवाजे से बाहर झांकना या कूदना सीधा मौत के मुंह में जाने जैसा है।

2. 'ड्रॉप, कवर और होल्ड' (Drop, Cover and Hold): सीट और बर्थ का लें सहारा

ट्रेन के कोच के भीतर ही रहकर खुद को सुरक्षित करने की रणनीति सबसे कारगर मानी जाती है:

  • लोअर बर्थ पर हैं तो: तुरंत नीचे झुकें और सीट के दोनों सिरों या नीचे लगे लोहे के फ्रेम को दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ लें। अपने सिर और गर्दन को दोनों हाथों से या किसी बैग/तकिए से ढकें ताकि ऊपर की रैक से गिरने वाले भारी सामान से चोट न लगे।

  • अपर या मिडिल बर्थ पर हैं तो: तुरंत नीचे उतरने की हड़बड़ी न करें, क्योंकि सीढ़ियों से फिसलने का डर रहता है। बर्थ पर ही पेट के बल लेट जाएं, रेलिंग को कसकर पकड़ें और अपने सिर को चादर या तकिए से सुरक्षित करें।

  • शौचालय (Toilet) में हैं तो: यदि आप टॉयलेट के अंदर हैं, तो दीवार पर लगे हैंड-रेल (हैंडल) को दोनों हाथों से मजबूती से थाम लें और जमीन पर उकड़ू बैठ जाएं। दरवाजा खोलने के लिए तुरंत बाहर न भागें जब तक ट्रेन की गति धीमी न हो जाए।

3. ऊपर लगे लगेज रैक (Luggage Rack) से रहें बेहद सतर्क

भूकंप के तेज कंपन में सबसे बड़ा खतरा सिर पर गिरने वाले भारी सूटकेस, ट्रॉली बैग और सामान से होता है। भारतीय ट्रेनों में अक्सर ऊपरी रैक पर भारी सामान रखा होता है। झटके लगते ही सामान नीचे गिरना शुरू हो सकता है। इसलिए यदि आप गलियारे या सीट पर हैं, तो तुरंत अपने सिर को बैग, जैकेट या हाथों की ओट में कर लें और ऊपर की ओर देखने से बचें ताकि आंखों और चेहरे पर कोई नुकीली चीज न लगे।

4. क्या चेन खींचनी (Alarm Chain Pulling) चाहिए?

यात्रियों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि क्या भूकंप महसूस होते ही अलार्म चेन खींचकर ट्रेन रोक देनी चाहिए?

  • विशेषज्ञों की सलाह: जब तक कोई अत्यंत अपरिहार्य स्थिति न हो, यात्रियों को तुरंत चेन खींचने से बचना चाहिए। लोको पायलट (ट्रेन ड्राइवर) को पटरियों के कंपन, ओएचई लाइन के उतार-चढ़ाव या स्टेशन मास्टर के इमरजेंसी वायरलेस मैसेज से स्थिति की तुरंत भनक लग जाती है।

  • पुल या टनल में रुकने का खतरा: यदि आप चेन खींच देते हैं और ट्रेन किसी लंबे रेलवे पुल, संकरी सुरंग या तीखे मोड़ पर बीच में रुक जाती है, तो वहां से राहत-बचाव कार्य करना या यात्रियों को निकालना अत्यधिक खतरनाक हो जाता है। ड्राइवर स्थिति का आकलन करके ट्रेन को किसी खुली, समतल और सुरक्षित जगह पर नियंत्रित गति से रोकने का प्रयास करता है।

5. जब ट्रेन पूरी तरह रुक जाए, तब क्या करें?

ट्रेन के पूरी तरह रुक जाने के बाद भी तुरंत अफरा-तफरी न मचाएं:

  • रेलवे स्टाफ के निर्देशों की प्रतीक्षा करें: ट्रेन रुकने के बाद ट्रेन गार्ड, टीटीई (TTE) और आरपीएफ/जीआरपी के जवान कोच-दर-कोच जाकर स्थिति का मुआयना करते हैं। जब तक वे सुरक्षित निकासी (Safe Evacuation) का निर्देश न दें, बोगी के अंदर ही रहें।

  • ट्रैक की तरफ न उतरें: यदि बाहर उतरने के निर्देश दिए जाएं, तो ध्यान रखें कि विपरीत दिशा वाले रेलवे ट्रैक (Up/Down Track) पर अचानक कोई दूसरी ट्रेन न आ रही हो। दोनों तरफ देखकर, बुजुर्गों और बच्चों को सहारा देते हुए सुरक्षित खुले मैदान की तरफ बढ़ें।

  • टूटे हुए बिजली के तारों से दूर रहें: जमीन पर पड़े किसी भी तार, खंभे या सिग्नल पोस्ट को न छुएं, क्योंकि उनमें करंट प्रवाहित हो सकता है।