रेस्तरां ने जबरन वसूला सर्विस चार्ज? अब लगेगा ₹50,000 का जुर्माना! जानें कैसे और कहां करें इसकी ऑनलाइन शिकायत
होटल या रेस्तरां में स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेने के बाद जब बिल हाथ में आता है, तो अक्सर खाने की कीमत और जीएसटी (GST) के अलावा 5% से 10% का 'सर्विस चार्ज' (Service Charge) पहले से जुड़ा हुआ दिखता है। कई बार वेटर या मैनेजर इसे अनिवार्य बताते हुए ग्राहकों से जबरन वसूलने की जिद करते हैं। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी ग्राहक से जबरन सर्विस चार्ज वसूलना पूरी तरह गैरकानूनी, मनमाना और अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस (Unfair Trade Practice) है। यदि कोई रेस्तरां आपके मना करने के बाद भी बिल से सर्विस चार्ज हटाने से इनकार करता है, तो उस पर ₹50,000 तक का जुर्माना लग सकता है और उसका लाइसेंस भी खतरे में पड़ सकता है।
क्या कहता है कानून: सर्विस चार्ज अनिवार्य है या स्वैच्छिक?
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act, 2019) के तहत सीसीपीए ने सर्विस चार्ज को लेकर सख्त नियम तय किए हैं:
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पूरी तरह स्वैच्छिक (Voluntary): सर्विस चार्ज देना या न देना पूरी तरह ग्राहक की मर्जी पर निर्भर करता है। यह एक तरह की 'टिप' (Tip) है। यदि ग्राहक सेवा से संतुष्ट है, तो वह अपनी इच्छा से टिप दे सकता है; रेस्तरां इसे बिल में पहले से जोड़कर नहीं मांग सकता।
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डिफ़ॉल्ट रूप से जोड़ने पर रोक: कोई भी फूड आउटलेट बिल में स्वतः सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकता और न ही मेन्यू कार्ड पर यह लिखकर बाध्य कर सकता है कि "सर्विस चार्ज देना अनिवार्य है।"
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प्रवेश पर रोक नहीं: कोई भी रेस्तरां सर्विस चार्ज न देने की शर्त पर किसी ग्राहक को प्रवेश देने या सेवा देने से मना नहीं कर सकता।
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जीएसटी की दोहरी मार नहीं: सर्विस चार्ज पर अलग से जीएसटी जोड़कर बिल बढ़ाना भी नियमों का उल्लंघन है।
अगर रेस्तरां बिल में सर्विस चार्ज जोड़ दे, तो क्या करें?
बिल में सर्विस चार्ज दिखने पर घबराने या विवाद करने के बजाय इन तीन चरणों का पालन करें:
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1. हटाने का मौखिक अनुरोध करें: सबसे पहले बिलिंग काउंटर या मैनेजर से कहें कि वे उपभोक्ता संरक्षण नियमों के तहत बिल से सर्विस चार्ज की राशि तुरंत हटाएं। अधिकांश मामलों में मैनेजर इसे फौरन हटाकर नया बिल प्रिंट कर देते हैं।
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2. बिल की मूल प्रति अपने पास रखें: यदि रेस्तरां प्रबंधन सर्विस चार्ज हटाने से साफ इनकार कर दे, तो बहस में समय गंवाने के बजाय सर्विस चार्ज जुड़े हुए बिल का भुगतान कर दें और उस बिल की मूल कॉपी (या स्पष्ट फोटो) अपने पास सुरक्षित रख लें। यह बिल आपकी शिकायत का सबसे ठोस कानूनी सबूत बनेगा।
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3. शिकायत दर्ज कराने की चेतावनी दें: रेस्तरां प्रबंधन को स्पष्ट बताएं कि इस जबरन वसूली की शिकायत राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) और सीसीपीए में दर्ज कराई जा रही है।
सर्विस चार्ज की ऑनलाइन शिकायत कैसे और कहां दर्ज करें?
सरकार ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए कई डिजिटल और त्वरित माध्यम उपलब्ध कराए हैं:
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राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH Portal):
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आधिकारिक पोर्टल consumerhelpline.gov.in पर जाएं।
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अपना मोबाइल नंबर डालकर रजिस्टर या लॉगिन करें।
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'Register Grievance' पर क्लिक करें, सेक्टर में 'Restaurant/Hotels' चुनें।
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रेस्तरां का नाम, पता, बिल नंबर दर्ज करें और बिल की फोटो अपलोड कर दें।
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उमंग ऐप (UMANG App): अपने स्मार्टफोन में उमंग ऐप डाउनलोड कर सीधे नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन सर्विस के जरिए कुछ ही मिनटों में शिकायत रजिस्टर कर सकते हैं।
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टोल-फ्री नंबर और एसएमएस:
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टोल-फ्री नंबर 1915 पर कॉल करके सीधे कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव को अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
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इसके अलावा 8800001915 पर एसएमएस (SMS) भेजकर भी सहायता प्राप्त की जा सकती है।
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वाट्सएप हेल्पलाइन: उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर 8800001915 पर 'Hi' लिखकर चैटबॉट के माध्यम से सीधे शिकायत का विवरण दर्ज कराया जा सकता है।
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ई-दाखिल पोर्टल (e-Daakhil): यदि आप हर्जाने और मुआवजे की मांग करना चाहते हैं, तो edaakhil.nic.in पर जाकर बिना किसी वकील के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में सीधे ऑनलाइन केस फाइल कर सकते हैं।
रेस्तरां पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
उपभोक्ता आयोग और सीसीपीए में शिकायत सही पाए जाने पर रेस्तरां के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाते हैं:
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अवैध वसूली की वापसी: रेस्तरां को सर्विस चार्ज की पूरी रकम ब्याज सहित ग्राहक को लौटानी होगी।
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मानसिक प्रताड़ना का हर्जाना: ग्राहक को अनावश्यक परेशान करने के लिए ₹5,000 से ₹25,000 तक का कानूनी खर्च व हर्जाना देने का आदेश दिया जा सकता है।
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भारी जुर्माना: सीसीपीए द्वारा बार-बार नियमों की अनदेखी करने वाले प्रतिष्ठानों पर उपभोक्ता कल्याण कोष (Consumer Welfare Fund) में ₹50,000 तक का प्रशासनिक जुर्माना लगाया जाता है।
उपभोक्ता के रूप में अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें। रेस्तरां का काम भोजन और सेवा की स्पष्ट कीमत लेना है; बिना आपकी सहमति के किसी भी प्रकार का छिपा हुआ सेवा शुल्क वसूलना कानूनन दंडनीय है।