MEA के बयान पर छिड़ी बहस, बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला और नागरिकता का असली सच जानें
क्या आपके पास मौजूद 'भारतीय पासपोर्ट' आपकी नागरिकता की गारंटी है? अगर आप ऐसा सोचते हैं, तो विदेश मंत्रालय (MEA) का हालिया बयान आपको हैरान कर सकता है। पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट केवल एक 'यात्रा दस्तावेज' (Travel Document) है, न कि 'नागरिकता का प्रमाण' (Proof of Citizenship)। इस बयान के बाद देश में एक नई कानूनी और राजनीतिक बहस छिड़ गई है।
विवाद की जड़: क्या है मंत्रालय का तर्क?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, पासपोर्ट विदेश में किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता को प्रमाणित तो करता है, लेकिन इसे भारतीय नागरिकता का अंतिम और निर्णायक दस्तावेज नहीं माना जा सकता। मंत्रालय का तर्क है कि 1967 के पासपोर्ट अधिनियम के तहत तकनीकी रूप से यह यात्रा दस्तावेज उन लोगों को भी जारी किया जा सकता है जो पूर्ण रूप से भारतीय नागरिक नहीं हैं। मंत्रालय के इस रुख का समर्थन करते हुए सरकारी सूत्रों ने 1955 के नागरिकता अधिनियम को नागरिकता की स्थिति स्थापित करने वाला एकमात्र कानूनी आधार बताया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट का क्या है फैसला?
इस पूरे कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए साल 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले का जिक्र किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया था कि कानून तकनीकी रूप से गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी करने की अनुमति देता है। यही कारण है कि पासपोर्ट का होना नागरिकता का 'निर्णायक' प्रमाण नहीं हो सकता। कानून और जनमानस की समझ के बीच के इस अंतर को स्पष्ट करते हुए पूर्व राजनयिक निरुपमा मेनन राव ने कहा, "पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है जो धारक के अधिकारों की रक्षा करता है, लेकिन नागरिकता की कानूनी स्थिति पूरी तरह से नागरिकता अधिनियम, 1955 से शासित होती है।"
नागरिकता का असली 'पुख्ता' प्रमाण क्या है?
जब पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा रहा, तो फिर वह कौन सा दस्तावेज है जो आपको भारतीय साबित करता है? सरकार और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इसके लिए केवल दो दस्तावेज ही 'स्पष्ट और पुख्ता' माने जाते हैं:
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जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate): जो यह प्रमाणित करता है कि व्यक्ति का जन्म भारत में हुआ है।
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नागरिकता प्रमाण पत्र (Citizenship Certificate): उन व्यक्तियों के लिए जिन्हें कानूनी रूप से भारत की नागरिकता प्रदान की गई है।
हस्तियों और नेताओं ने उठाए सवाल
सरकार के इस रुख की सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में कड़ी आलोचना हो रही है। गीतकार जावेद अख्तर ने इसे 'बेतुका' करार देते हुए सवाल किया कि क्या सरकार पासपोर्ट जारी करते समय स्वयं इस बात से आश्वस्त नहीं होती कि धारक भारतीय है? वहीं, शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने चिंता जताई कि यदि सरकार का यही रुख रहा, तो विदेशों में भारतीय पासपोर्ट की विश्वसनीयता और सम्मान पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी इसे पहचान और नागरिकता के नियमों में उलझन का नाम दिया है।