Datia Assembly By-Election 2026: दतिया उपचुनाव में टिकट बंटवारे पर भड़की बगावत, नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने पर समर्थकों ने NH-44 किया जाम, जिलाध्यक्ष सहित पार्षदों का सामूहिक इस्तीफा

Datia Assembly By-Election 2026: दतिया उपचुनाव में टिकट बंटवारे पर भड़की बगावत, नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने पर समर्थकों ने NH-44 किया जाम, जिलाध्यक्ष सहित पार्षदों का सामूहिक इस्तीफा

मध्य प्रदेश के दतिया (Datia) जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज राजनीतिक खबर सामने आ रही है। आगामी दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा टिकट की घोषणा करते ही जिले में एक अभूतपूर्व राजनीतिक तूफान और आंतरिक बगावत खड़ी हो गई है। भाजपा हाईकमान ने इस हाई-प्रोफाइल सीट से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) बैकग्राउंड के पुराने नेता और पूर्व संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी (Ashutosh Tiwari) को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है।

इस फैसले के सामने आते ही मध्य प्रदेश के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (Dr. Narottam Mishra) के खेमे में भारी आक्रोश फैल गया है। टिकट न मिलने से नाराज नरोत्तम मिश्रा के हजारों समर्थक और जमीनी कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं, जिसके चलते पूरी विधानसभा में भारी तनाव की स्थिति बनी हुई है।

NH-44 पर 15 किलोमीटर लंबा चक्काजाम, बाजार पूरी तरह बंद

टिकट कटने से गुस्साए डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने दतिया से गुजरने वाले नेशनल हाईवे 44 (NH-44) पर धावा बोल दिया और उसे पूरी तरह से ब्लॉक (चक्काजाम) कर दिया। देखते ही देखते इस हाईवे पर दोनों तरफ वाहनों की भीषण कतारें लग गईं और जाम करीब 15 किलोमीटर के लंबे दायरे में फैल गया, जिससे ग्वालियर-झांसी मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया है।

प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय बाजारों को भी पूरी तरह बंद करवा दिया है और हाईवे पर टायर जलाकर "भाजपा हाईकमान मुर्दाबाद" के जमकर नारे लगाए। उग्र प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और प्रशासन जाम खुलवाने व स्थिति को नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रहा है, लेकिन प्रदर्शनकारी टस से मस होने को तैयार नहीं हैं।

जिलाध्यक्ष, पदाधिकारियों और सभी पार्षदों का सामूहिक इस्तीफा: 24 घंटे का अल्टीमेटम

दतिया में मची यह बगावत अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने सांगठनिक रूप से भाजपा को हिलाकर रख दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नरोत्तम मिश्रा के समर्थन में भाजपा के दतिया जिलाध्यक्ष रघुवीर सरण (Raghuvir Saran) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

इतना ही नहीं, संगठन के कई अन्य प्रमुख पदाधिकारियों और दतिया नगर पालिका के सभी पार्षदों ने भी सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया है। नाराज स्थानीय नेतृत्व और पार्षदों ने पार्टी आलाकमान को स्पष्ट रूप से 24 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दिया है कि आशुतोष तिवारी का टिकट तुरंत बदलकर डॉ. नरोत्तम मिश्रा को उम्मीदवार बनाया जाए, अन्यथा पार्टी को आगामी उपचुनाव में ऐतिहासिक नुकसान झेलना पड़ेगा।

आखिर क्यों हो रहा है दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव?

इस सीट पर अचानक उपचुनाव होने की वजह बेहद चौंकाने वाली है। दतिया से वर्तमान कांग्रेस (Congress) विधायक राजेंद्र भारती को हाल ही में एक पुराने बैंक फ्रॉड (Bank Fraud Case) के मामले में माननीय अदालत ने दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।

अदालती सजा मिलने के कारण नियमानुसार राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता अयोग्य (Disqualified) घोषित कर दी गई, जिसके बाद यह सीट खाली हुई। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक, इस सीट पर आगामी 30 जुलाई 2026 को मतदान (Voting) होना तय हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि जहां भाजपा में टिकट को लेकर इतनी बड़ी बगावत छिड़ गई है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस अभी तक इस सीट पर अपने उम्मीदवार का नाम तय नहीं कर पाई है।

प्रतिष्ठा की लड़ाई: नरोत्तम मिश्रा बनाम आशुतोष तिवारी

  • डॉ. नरोत्तम मिश्रा: इन्हें दतिया और बुंदेलखंड अंचल में भाजपा का सबसे मजबूत और अपराजित चेहरा माना जाता रहा है। हालांकि, साल 2023 के नियमित विधानसभा चुनाव में वे बेहद कड़े मुकाबले में कांग्रेस के राजेंद्र भारती से चुनाव हार गए थे। लेकिन इस उपचुनाव के जरिए वे अपनी धमाकेदार वापसी की पूरी तैयारी में थे और उन्होंने हाल ही में अपना नामांकन फॉर्म (Nomination Form) भी खरीद लिया था। ऐन वक्त पर टिकट कटने से क्षेत्र में उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है।

  • आशुतोष तिवारी: वे लंबे समय तक संघ (RSS) के प्रचारक रहे हैं और संगठन में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों को संभाल चुके हैं। टिकट मिलने के तुरंत बाद वे शिष्टाचार के नाते डॉ. नरोत्तम मिश्रा का आशीर्वाद लेने भी पहुंचे थे, लेकिन नरोत्तम समर्थकों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आशुतोष तिवारी को टिकट देना भाजपा हाईकमान की किसी दीर्घकालिक और आंतरिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन जमीनी स्तर पर पार्टी को इस समय अपने ही वफादार कार्यकर्ताओं के सबसे बड़े विद्रोह का सामना करना पड़ रहा है। अब गेंद पूरी तरह से भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के पाले में है कि वे 24 घंटे के भीतर इस बगावत को कैसे शांत करते हैं।

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