कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का पीएम मोदी पर तंज, 'नाराज फूफा' और पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेरा
भारतीय राजनीति के गलियारों में इन दिनों बयानों के तीखे बाण और राजनीतिक जुबानी जंग अपने चरम पर है, जहां कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर अब तक का सबसे जोरदार और तीखा हमला बोला है। देश के युवाओं के भविष्य, लगातार देश भर में सामने आ रहे प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों और बढ़ती बेरोजगारी के गंभीर संकट को लेकर मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लिया है। अपने इस तीखे हमले के दौरान खरगे ने एक बेहद अनोखी और चटपटी राजनीतिक टिप्पणी करते हुए 'नाराज फूफा' की उपमा का जिक्र किया, जिसके बाद से देश की सियासत में एक नया भूचाल आ गया है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बयान की गूंज सुनाई दे रही है और यह मुद्दा देश के मुख्यधारा के समाचारों की सुर्खियों में सबसे ऊपर बना हुआ है, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और ज्यादा गहरा गया है।
देश में चरम पर बेरोजगारी का संकट और युवाओं का निराशाजनक रिपोर्ट कार्ड
आज के समय में भारतीय युवा वर्ग जिस सबसे बड़ी और विकट समस्या से जूझ रहा है, वह और कुछ नहीं बल्कि देश में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी बेरोजगारी और रोजगार के अवसरों का अकाल है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने इस आक्रामक बयान में सीधे तौर पर मोदी सरकार से यह सवाल पूछा है कि पिछले एक दशक के कार्यकाल में देश के करोड़ों युवाओं को पक्की नौकरियां देने के मामले में सरकार का रिपोर्ट कार्ड पूरी तरह शून्य क्यों साबित हुआ है। सरकारी विभागों में खाली पड़े लाखों पदों को जानबूझकर नहीं भरना, अनुबंध आधारित नौकरियों को बढ़ावा देना और युवाओं के उज्जवल भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ ने देश की पूरी युवा पीढ़ी को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी महानगरों तक पढ़े-लिखे नौजवान चपरासी और क्लर्क की नौकरियों के लिए भी धक्के खाने को मजबूर हैं, लेकिन शासन और प्रशासन की तरफ से उन्हें सिवाय कोरे आश्वासनों और जुमलों के कुछ हासिल नहीं हो रहा है, जिससे देश के भीतर गहराता असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है।
पेपर लीक माफियाओं का बोलबाला और युवाओं के सपनों पर फिरता पानी
भारतीय न्याय व्यवस्था और शिक्षा प्रणाली के लिए सबसे बड़ा कलंक बन चुके प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और नकल माफियाओं के नेटवर्क ने देश के करोड़ों मेहनती छात्र-छात्राओं की सालों की मेहनत को चंद मिनटों में बर्बाद कर रख दिया है। मल्लिकार्जुन खरगे ने इस गंभीर मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरते हुए कहा कि देश के किसी न किसी कोने से हर हफ्ते या महीने कोई न कोई ऐसा मामला जरूर सामने आता है जहां परीक्षा शुरू होने से पहले ही पर्चा सोशल मीडिया पर लीक हो जाता है। यूपीएससी, एसएससी, नीट, रेलवे और विभिन्न राज्यों की लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं तक इस धांधली के चक्रव्यूह से अछूती नहीं बची हैं, जिससे यह साबित होता है कि सरकार का तंत्र इन माफियाओं पर नकेल कसने में पूरी तरह से नाकामयाब रहा है। गरीब और मध्यम वर्ग के वे परिवार जो अपनी गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा जोड़कर अपने बच्चों को कोचिंग और पढ़ाई के लिए बड़े शहरों में भेजते हैं, वे जब बार-बार पेपर लीक होने के कारण परीक्षा रद्द होते देखते हैं, तो उनका शासन व्यवस्था से पूरी तरह से विश्वास उठ जाता है।
'नाराज फूफा' वाली टिप्पणी और राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप
अपने भाषण और बयानों के तीखे अंदाज के लिए जाने जाने वाले मल्लिकार्जुन खरगे ने जब केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के कामकाज के तरीके पर तंज कसते हुए 'नाराज फूफा' वाली शैली का इस्तेमाल किया, तो इसने राजनीतिक माहौल में एक नया रोमांच और चर्चा का विषय पैदा कर दिया। इस तंज के जरिए कांग्रेस अध्यक्ष ने यह दर्शाने की कोशिश की है कि किस तरह से सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग आलोचनाओं को सुनने और देश की वास्तविक जमीनी सच्चाइयों को स्वीकार करने के बजाय हमेशा अपनी ही धुन में मस्त रहते हैं और किसी की भी बात सुनने को तैयार नहीं होते हैं। बीजेपी और एनडीए खेमे की तरफ से भी खरगे के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो चुकी हैं, जिसमें सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि विपक्ष के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे केवल व्यक्तिगत टिप्पणियों और बचकानी उपमाओं के जरिए देश का ध्यान भटकाने की असफल कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक घमासान और अधिक तेज होने के पूरे आसार हैं, क्योंकि देश के युवा अब रोजगार और शिक्षा के मोर्चे पर सरकारों से सीधा हिसाब मांगने के मूड में आ चुके हैं।