कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार को दिया अल्टीमेटम, मांगें न मानने पर फिर से देशव्यापी प्रदर्शन की दी चेतावनी! जानिए क्या है पूरा विवाद
37 दिनों तक चले लंबे NEET आंदोलन के शांत होने के महज दो दिन बाद अब एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई है। सोमवार (27 जुलाई 2026) को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाते हुए सख्त अल्टीमेटम जारी किया है। पार्टी का कहना है कि जिस लिखित और मौखिक समझौते के आधार पर आंदोलन समाप्त किया गया था, सरकार और उसकी पुलिस एजेंसियां उसका सरेआम उल्लंघन कर रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को टैग करते हुए CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में छात्रों व एक्टिविस्ट्स पर हो रही पुलिसिया कार्रवाई पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
'मांगें पूरी नहीं हुईं तो फिर से सड़कों पर उतरेंगे छात्र'
आशुतोष रांका ने अपनी पोस्ट में साफ तौर पर कहा कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई भी कानूनी या पुलिसिया एक्शन न लेने का भरोसा दिया था। इसके बावजूद बिहार और बंगाल में सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में प्रदर्शनकारियों पर नजर रखी जा रही है और उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। दिल्ली में जंतर-मंतर या अन्य जगहों पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं को खाने-पीने और रहने की सुविधाएं (लॉजिस्टिक्स) मुहैया कराने वाले वॉलंटियर्स को भी पुलिस हिरासत में ले रही है। CJP ने मांग की है कि दर्ज की गई सभी FIR तुरंत वापस ली जाएं, गिरफ्तार छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए और मंगलवार (28 जुलाई 2026) तक कानूनी सुरक्षा से जुड़े समझौते की लिखित कॉपी उन्हें सौंपी जाए। अगर ऐसा नहीं होता है, तो पार्टी एक बार फिर पूरे देश में बड़ा आंदोलन शुरू करेगी।
25 जुलाई को हुआ था समझौता, अब उठे वादाखिलाफी के सवाल
मामला यह है कि पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई को CJP ने अपना 37 दिनों से जारी देशव्यापी विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया था। उस समय केंद्र सरकार, CJP के प्रतिनिधियों और प्रमुख पर्यावरणविद् व एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के बीच सहमति बनी थी। इस बातचीत में तय हुआ था कि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएंगे, पुलिस की डराने-धमकाने वाली कार्रवाई रोकी जाएगी और देश में एक सख्त एंटी-पेपर लीक कानून लाया जाएगा। लेकिन अब CJP का कहना है कि सरकार अपने वादे से पलट रही है और बीजेपी शासित या एनडीए सहयोगी राज्यों की पुलिस के जरिए बदला लेने की कार्रवाई की जा रही है।
असम, बंगाल और बिहार में पुलिस एक्शन पर सौरव दास ने जताई चिंता
इस पूरे घटनाक्रम पर CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने भी असम, पश्चिम बंगाल और बिहार से आ रही गिरफ्तारियों की खबरों पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा इस तरह भरोसा तोड़ना देश के युवाओं के लिए बिल्कुल भी बर्दाश्त करने योग्य नहीं है। सौरव दास ने स्पष्ट किया कि पार्टी ने अपना राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन सिर्फ इसी शर्त पर वापस लिया था कि किसी भी राज्य में प्रदर्शनकारियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऐसे में अलग-अलग राज्य पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा छात्रों और युवाओं को टारगेट करना समझौते की भावना के पूरी तरह खिलाफ है।
हर पीड़ित प्रदर्शनकारी को मिलेगी कानूनी मदद
प्रदर्शन में शामिल रहे छात्रों और उनके परिवारों को आश्वस्त करते हुए सौरव दास ने कहा कि CJP की लीगल टीम पहले दिन से ही पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है। देश के विभिन्न राज्यों के अनुभवी और शीर्ष वकीलों के साथ तालमेल बिठाकर हिरासत में लिए गए या मुकदमों का सामना कर रहे हर एक प्रदर्शनकारी को पूरी कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। CJP ने एक बार फिर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से अपील की है कि वे अपने वादे का सम्मान करें, तुरंत दंडात्मक कार्रवाइयों पर रोक लगवाएं और गिरफ्तार किए गए सभी निर्दोष छात्रों की जल्द से जल्द रिहाई पक्की करें।