Coal Block Allocation Case: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के खिलाफ बंद हुआ कोयला घोटाला मामला; CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार

Coal Block Allocation Case: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के खिलाफ बंद हुआ कोयला घोटाला मामला; CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार

कोयला ब्लॉक आवंटन (Coal Scam) से जुड़े बहुचर्चित मामले में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ जारी आपराधिक कार्यवाही को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने उन्हें और अन्य लोगों को आरोपी के रूप में अदालत में तलब करने वाले विशेष ट्रायल कोर्ट के आदेश को भी पूरी तरह से रद्द कर दिया है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की उस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री और अन्य सभी पक्षों को पूरी तरह से क्लीन चिट दी गई थी।

'ट्रायल कोर्ट के पास क्लोजर रिपोर्ट खारिज करने का कोई ठोस कारण नहीं था'

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालत (Trial Court) के रुख पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच एजेंसी द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और संज्ञान लेने की विशेष जज के पास कोई वाजिब वजह नहीं थी।

पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया:

"जांच एजेंसी की रिपोर्ट को स्वीकार करने के संबंध में इस अदालत द्वारा स्थापित मानकों को ध्यान में रखते हुए, हम पूरी तरह संतुष्ट हैं कि विशेष जज के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार करने का कोई आधार नहीं था। हम सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हैं और इस पूरे मामले को समाप्त करते हैं।"

क्या था पूरा तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन मामला?

यह पूरा मामला वर्ष 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II (Talabira-II) कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा हुआ है।

  • आरोपी के रूप में समन: एक विशेष सीबीआई अदालत ने इस आवंटन प्रक्रिया को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, प्रख्यात उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पी. सी. पारेख और तीन अन्य अधिकारियों को आरोपी के रूप में तलब किया था।

  • सुप्रीम कोर्ट की रोक: पूर्व प्रधानमंत्री ने इस समन आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी, जिसके बाद 1 अप्रैल 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी सभी कार्यवाहियों पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

अदालत में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की दलीलें

पूर्व प्रधानमंत्री का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ के समक्ष तर्क दिया कि कोयला ब्लॉक आवंटित करने का फैसला पूरी तरह से एक प्रशासनिक निर्णय (Administrative Decision) था और इसमें किसी भी प्रकार की कोई आपराधिक मंशा या गड़बड़ी शामिल नहीं थी।

सिब्बल ने अदालत से यह भी आग्रह किया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई प्रतिकूल और नकारात्मक टिप्पणियों को रिकॉर्ड पर नहीं रहने दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी पहलुओं का गंभीरता से अध्ययन करने के बाद विशेष जज के आदेश को खारिज करते हुए मामले में क्लोजर रिपोर्ट पर अपनी मुहर लगा दी।

Latest Posts