बिना जांच WhatsApp पर बंटे सर्टिफिकेट; पुलिस जांच और कड़ी कार्रवाई के आदेश
प्रसिद्ध तीर्थस्थल भगवान अयप्पा मंदिर सबरीमाला में वार्षिक तीर्थयात्रा सीजन से पहले फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबरीमाला के सन्निधानम और नीलाक्कल स्थित विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, कैंटीनों और होटलों में काम करने वाले कर्मचारियों को बिना किसी मेडिकल जांच के अवैध और फर्जी हेल्थ कार्ड जारी किए जाने के मामले पर केरल उच्च न्यायालय ने अत्यंत सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इसे तीर्थयात्रियों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ मानते हुए पुलिस को तुरंत औपचारिक आपराधिक शिकायत दर्ज करने और पूरे सिंडिकेट की गहराई से जांच करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
यह अहम आदेश केरल हाई कोर्ट के जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के.वी. जयकुमार की युगल पीठ ने सबरीमाला विशेष आयुक्त द्वारा सौंपी गई गोपनीय और विस्तृत रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए पारित किया है। उच्च न्यायालय ने साफ कहा कि जहां देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु कठिन व्रत रखकर भगवान अयप्पा के दर्शन करने पहुंचते हैं, वहां भोजन, प्रसाद और जनसुविधाओं से जुड़े कर्मचारियों के स्वास्थ्य प्रमाण पत्रों में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस खुलासे के बाद पूरे मंदिर परिक्षेत्र और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
बिना मेडिकल और ब्लड टेस्ट WhatsApp पर बंटे कार्ड, 'मंजू महिमा' नंबर से हुआ फर्जीवाड़ा
विशेष आयुक्त की रिपोर्ट में इस फर्जीवाड़े की जो कार्यप्रणाली सामने आई है, वह बेहद हैरान करने वाली है। पथानामथिट्टा के जिला चिकित्सा अधिकारी (DMO) को सन्निधानम के स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से कई गंभीर अनियमितताओं की सूचना दी गई थी। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि सन्निधानम और नीलाक्कल के कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में तैनात कर्मचारियों को बिना किसी शारीरिक परीक्षण, रक्त जांच या संक्रामक रोगों की स्क्रीनिंग के ही धड़ल्ले से स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए थे।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ये सभी फर्जी हेल्थ कार्ड डिजिटल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप के जरिए बांटे जा रहे थे। जांच अधिकारियों के अनुसार, 'मंजू महिमा' नाम से सुरक्षित किए गए एक संदिग्ध मोबाइल नंबर से कर्मचारियों के तैयार हेल्थ कार्ड सीधे भेजे जा रहे थे। इन दस्तावेजों पर एक पंजीकृत चिकित्सक के जाली हस्ताक्षर और मुहर लगे होने का गहरा संदेह है। बिना किसी क्लिनिकल वेरिफिकेशन के इस तरह थोक के भाव में प्रमाण पत्र जारी करना एक संगठित गिरोह की मौजूदगी की ओर इशारा करता है, जो पैसों के बदले कर्मचारियों को फर्जी कागजात मुहैया करा रहा था।
त्रावणकोर देवास्वम बोर्ड को सख्त निर्देश, सिर्फ सरकारी डॉक्टरों के सर्टिफिकेट होंगे मान्य
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ा संज्ञान लेते हुए त्रावणकोर देवास्वम बोर्ड (TDB) को व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने बोर्ड को स्पष्ट आदेश दिया है कि सबरीमाला क्षेत्र में किसी भी प्रतिष्ठान, स्टॉल या सेवा प्रदाता द्वारा कर्मचारियों को काम पर रखे जाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि उनके पास केवल और केवल केरल सरकार के अधिकृत चिकित्सा अधिकारियों द्वारा जारी किए गए वैध स्वास्थ्य प्रमाण पत्र ही हों। किसी भी निजी, असत्यापित या संदिग्ध एजेंसी द्वारा जारी कार्ड को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अदालत ने स्वास्थ्य विभाग की विशेष निरीक्षण टीमों को भी सक्रिय रहने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य विभाग के उड़नदस्तों को आदेश दिया गया है कि वे सन्निधानम, पंबा और नीलाक्कल के सभी होटलों, चाय की दुकानों, भोजनालयों और प्रसाद निर्माण इकाइयों का नियमित व औचक निरीक्षण करें। इस दौरान हर एक कर्मचारी के मेडिकल रिकॉर्ड की मौके पर ही गहन पड़ताल की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि काम करने वाला प्रत्येक व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ है और नियमों का शत-प्रतिशत पालन कर रहा है।
पथानामथिट्टा एसपी को जांच का जिम्मा, जनस्वास्थ्य और स्वच्छता से कोई समझौता नहीं
केरल हाई कोर्ट ने पथानामथिट्टा जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) को सन्निधानम के हेल्थ इंस्पेक्टर द्वारा दी गई औपचारिक शिकायत के आधार पर त्वरित और निष्पक्ष जांच कराने का आदेश दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि व्हाट्सएप नंबर 'मंजू महिमा' के पीछे सक्रिय असली चेहरों, फर्जी हस्ताक्षर करने वाले संदिग्धों और इस नेटवर्क से लाभ उठाने वाले प्रतिष्ठान मालिकों की पहचान कर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और संबंधित कानूनों की सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और न्यायमूर्ति के.वी. जयकुमार की पीठ ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि मंडलम-मकरविलक्कु तीर्थयात्रा के दौरान सबरीमाला में भारी संख्या में जनसैलाब उमड़ता है। ऐसी स्थिति में खानपान और स्वच्छता से जुड़े लोगों का चिकित्सकीय रूप से फिट होना अनिवार्य है, अन्यथा किसी भी संक्रामक बीमारी के फैलने का खतरा पूरे समुदाय के लिए घातक साबित हो सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जनस्वास्थ्य और स्वच्छता की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस नियम का उल्लंघन करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।