कर्ज में डूबी MTNL पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: 9,000 करोड़ की संपत्तियां बेचेगी सरकार

कर्ज में डूबी MTNL पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: 9,000 करोड़ की संपत्तियां बेचेगी सरकार

सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड यानी एमटीएनएल (MTNL) के गंभीर वित्तीय संकट को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने एक निर्णायक और ऐतिहासिक कदम उठाने का फैसला किया है। भारी कर्ज के बोझ तले दबी इस सरकारी कंपनी की वित्तीय देनदारियों को चुकता करने के उद्देश्य से सरकार ने वित्त वर्ष 2027-28 के दौरान लगभग 9,000 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों और भूखंडों को बेचने (एसेट मोनेटाइजेशन) की एक विस्तृत रूपरेखा तैयार की है। नई दिल्ली में दूरसंचार विभाग और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस संपत्ति बिक्री अभियान से जुटाई जाने वाली समूची धनराशि का उपयोग सीधे तौर पर एमटीएनएल के संचित कर्ज और विभिन्न वित्तीय देनदारियों को खत्म करने में किया जाएगा। देश की कभी सबसे प्रतिष्ठित टेलीकॉम कंपनियों में शुमार रही एमटीएनएल पिछले कई वर्षों से लगातार नकदी संकट, कर्मचारियों के वेतन भुगतान की समस्या और भारी-भरकम ऋण के दुष्चक्र से जूझ रही है, जिसके स्थायी समाधान के लिए सरकार अब उसकी विशाल और बेशकीमती संपत्तियों को बाजार में भुनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

दूरसंचार क्षेत्र में निजी कंपनियों की आक्रामक प्रतिस्पर्धा और 4G व 5G सेवाओं की शुरुआत में हुई अत्यधिक देरी के कारण एमटीएनएल का कोर टेलीकॉम ऑपरेशन लगभग ठप होने के कगार पर पहुंच गया है। दिल्ली और मुंबई जैसे देश के दो सबसे बड़े महानगरों में लैंडलाइन और ब्रॉडबैंड का एकाधिकार रखने वाली यह कंपनी आज अपने वजूद को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कंपनी के पास राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई में बेहद प्राइम लोकेशंस पर हजारों करोड़ रुपये की जमीनें, व्यावसायिक भवन, रिहायशी कॉलोनियां और टेलीफोन एक्सचेंज मौजूद हैं। इन संपत्तियों का व्यावसायिक मूल्य अत्यधिक है, लेकिन वर्षों से कानूनी विवादों, स्वामित्व संबंधी स्पष्टता के अभाव और स्थानीय नगर निगमों के साथ उलझनों के कारण इनका मुद्रीकरण अटका हुआ था। अब सरकार ने उन सभी बाधाओं को दूर करते हुए अगले वित्त वर्ष के लिए एक सुनियोजित नीलामी योजना को अंतिम रूप दे दिया है।

इस पूरी विनिवेश और मोनेटाइजेशन प्रक्रिया में सबसे बड़ी सफलता संपत्तियों के स्वामित्व से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने के रूप में मिली है। दूरसंचार विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एमटीएनएल की कई प्रमुख संपत्तियां वर्षों से दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) और मुंबई नगर निगम (BMC) के साथ विभिन्न तकनीकी व लीज संबंधी विवादों में फंसी हुई थीं। सरकार ने विशेष अंतर-मंत्रालयी टास्क फोर्स का गठन करके इन संपत्तियों के टाइटल डीड्स, लीज एग्रीमेंट्स और लैंड यूज मानकों की गहन समीक्षा कराई। इस लंबी प्रक्रिया के बाद अब 40 ऐसी विशिष्ट और बेशकीमती संपत्तियों की पहचान पूरी कर ली गई है, जिनके सभी दस्तावेज, कानूनी अधिकार और स्वामित्व पूरी तरह स्पष्ट और विवाद-मुक्त हो चुके हैं।

इन 40 संपत्तियों को पहले चरण के तहत खुली नीलामी के लिए राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (National Monetization Pipeline) के माध्यम से बाजार में उतारा जाएगा। इनमें दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों जैसे कनाट प्लेस, नेहरू प्लेस, आईटीओ और मुंबई के बांद्रा, नरीमन प्वाइंट व अंधेरी जैसे अति-महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्थित विशाल टेलीफोन एक्सचेंज भवन, खाली पड़े भूखंड और रेजिडेंशियल क्वार्टर शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि रियल एस्टेट डेवलपर्स, बड़े कॉरपोरेट घरानों और संस्थागत निवेशकों के बीच इन प्राइम संपत्तियों की जबर्दस्त मांग देखने को मिलेगी। पारदर्शी ई-नीलामी प्रक्रिया के जरिए इन भूखंडों और भवनों की बिक्री की जाएगी ताकि सरकार और एमटीएनएल को इनकी अधिकतम बाजार कीमत मिल सके और कर्ज अदायगी की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।

दूरसंचार मंत्रालय के आंतरिक वित्तीय विश्लेषण के अनुसार, महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड पर कुल वित्तीय देनदारियों और कर्ज का आंकड़ा लगभग 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इस भारी-भरकम वित्तीय बोझ में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा करीब 30,000 करोड़ रुपये के सॉवरेन गारंटी बॉन्ड (Sovereign Guarantee Bonds) का है। भारत सरकार ने एमटीएनएल को तात्कालिक नकदी संकट से उबारने और कर्ज चुकाने के लिए पूर्व में इन बॉन्डों को जारी करने की अनुमति दी थी, जिनकी अंतिम जिम्मेदारी सीधे तौर पर केंद्र सरकार के राजकोष पर आती है। इसके अलावा कंपनी पर विभिन्न वाणिज्यिक बैंकों का बकाया कर्ज, वेंडरों की पुरानी देनदारियां और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के टर्मिनल बेनिफिट्स का एक बड़ा बकाया खड़ा है।

सरकारी अधिकारियों का दृढ़ विश्वास है कि भारी कर्ज होने के बावजूद एमटीएनएल की वित्तीय स्थिति किसी भी तरह से दिवालिया होने जैसी नहीं है। कंपनी के पास देश के दो सबसे बड़े महानगरों में जो रियल एस्टेट और संपत्ति का आधार मौजूद है, वह उसकी कुल देनदारियों से कहीं अधिक मूल्यवान है। केंद्र सरकार का आकलन है कि यदि संपत्तियों का चरणबद्ध और सही तरीके से मुद्रीकरण किया जाए, तो एमटीएनएल न केवल अपने पूरे 50,000 करोड़ रुपये के कर्ज और बॉन्ड दायित्वों से मुक्त हो सकती है, बल्कि भविष्य के परिचालन के लिए भी उसके पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन बच सकते हैं। यही वजह है कि सरकार ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में कंपनी के दिवालियापन के बजाय सुनियोजित एसेट सेल का व्यावहारिक और आर्थिक रूप से मजबूत मॉडल चुना है।

एमटीएनएल की मौजूदा वित्तीय लाचारी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कंपनी का मुख्य टेलीकॉम व्यवसाय इतना कमजोर हो चुका है कि वह अपने मौजूदा कर्मचारियों का मासिक वेतन और परिचालन खर्च निकालने में भी असमर्थ है। सूत्रों ने बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि वर्तमान समय में एमटीएनएल अपने हजारों कर्मचारियों को मासिक वेतन मुख्य रूप से अपनी खाली पड़ी संपत्तियों और भवनों को सरकारी विभागों व निजी कंपनियों को किराये पर देकर मिलने वाले रेवेन्यू से चुका रही है। कंपनी ने दिल्ली और मुंबई में अपने कई टेलीफोन एक्सचेंजों के अतिरिक्त फ्लोर अन्य सरकारी संस्थानों, बैंकों और सार्वजनिक उपक्रमों को लीज पर दे रखे हैं, जिससे हर महीने एक तय रेंटल इनकम आ रही है।

आने वाले वित्त वर्ष 2027-28 में 9,000 करोड़ रुपये की पहली बड़ी संपत्ति बिक्री से एमटीएनएल की बैलेंस शीट को एक बड़ा सहारा मिलेगा। कर्ज का भार कम होने से कंपनी पर हर साल पड़ने वाले भारी ब्याज का बोझ घटेगा, जिससे नकदी प्रवाह में उल्लेखनीय सुधार होगा। इसके साथ ही सरकार एमटीएनएल के टेलीकॉम ऑपरेशंस को भारत संचार निगम लिमिटेड यानी बीएसएनएल (BSNL) के साथ एकीकृत करने और नेटवर्क साझा करने की दिशा में भी काम कर रही है ताकि 4G और 5G स्पेक्ट्रम का बेहतर उपयोग हो सके। एमटीएनएल की संपत्तियों की यह प्रस्तावित महा-बिक्री न केवल सार्वजनिक उपक्रमों के पुनरुद्धार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी, बल्कि यह सरकारी खजाने पर से सॉवरेन गारंटी के वित्तीय जोखिम को भी हमेशा के लिए समाप्त करने में मददगार बनेगी।