Census 2027: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बर्फीले इलाकों में डिजिटल जनगणना शुरू

Census 2027: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बर्फीले इलाकों में डिजिटल जनगणना शुरू

भारत की 16वीं और आजादी के बाद 8वीं जनगणना (Census 2027) का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण—जनसंख्या गणना (Population Enumeration)—शुरू हो चुका है। गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय (RGI) द्वारा जारी अधिसूचना के तहत, देश के दुर्गम और बर्फीले क्षेत्रों में समय से पहले जनगणना प्रक्रिया संचालित की जा रही है। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख सहित जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के उच्च पर्वतीय और बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों के लिए 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक सेल्फ-इन्यूमिरेशन (ऑनलाइन खुद से जानकारी दर्ज करने) का विकल्प सक्रिय कर दिया गया है। इसके बाद 1 सितंबर से 30 सितंबर तक प्रगणक घर-घर जाकर इस डेटा का सत्यापन करेंगे।

बर्फीले और दुर्गम इलाकों में समय से पहले शुरुआत की वजह

उत्तर भारत के हिमालयी क्षेत्रों—विशेषकर लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा, पुंछ, डोडा जैसे उच्च पर्वतीय जिलों, हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी (जैसे 15,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित कोमिक गांव) और उत्तराखंड के सीमांत इलाकों में अक्टूबर के बाद भीषण बर्फबारी शुरू हो जाती है। सर्दियों में अत्यधिक ठंड और भारी बर्फ के कारण कई दूरदराज के गांव महीनों तक देश के बाकी हिस्सों से कटे रहते हैं। इसी मौसमी चुनौती को देखते हुए सरकार ने इन गैर-समकालिक (Non-Synchronous) क्षेत्रों में मुख्य राष्ट्रीय गणना से पहले ही आबादी की गिनती पूरी करने की योजना बनाई है। जहां देश के मैदानी और सामान्य इलाकों में जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगी, वहीं इन विशेष बर्फीले क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि (Reference Date) 1 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि तय की गई है।

घर बैठे कैसे दर्ज करें जानकारी: 17 से 31 अगस्त तक की ऑनलाइन प्रक्रिया

देश के इतिहास में पहली बार नागरिकों को यह अधिकार दिया गया है कि वे खुद अपनी और अपने परिवार की जानकारी आधिकारिक पोर्टल पर भर सकें। इसके लिए नागरिकों को किसी सरकारी कर्मचारी के आने का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी।

  • नागरिक आधिकारिक सेल्फ-इन्यूमिरेशन पोर्टल पर जाकर अपना मोबाइल नंबर दर्ज कर लॉग-इन कर सकते हैं।

  • परिवार के मुखिया और सभी सदस्यों से जुड़े निर्धारित सवालों के जवाब ऑनलाइन भरे जा सकते हैं।

  • फॉर्म सबमिट करने के बाद एक विशिष्ट 'सेल्फ-इन्यूमिरेशन आईडी' (Self-Enumeration ID/Reference Code) जेनरेट होगी।

  • 1 से 30 सितंबर के बीच जब अधिकृत जनगणना कर्मी (Enumerator) घर पहुंचेंगे, तो नागरिक को केवल वही आईडी दिखानी होगी, जिससे फील्ड वेरिफिकेशन तुरंत पूरा हो जाएगा।

  • जनगणना अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया में किसी भी नागरिक से कोई ओटीपी (OTP) या बैंक संबंधी संवेदनशील पिन नहीं मांगा जाएगा, जिससे साइबर धोखाधड़ी से बचा जा सके।

पहली बार पूछे जा रहे हैं ये 40 सवाल: जाति गणना भी शामिल

जनगणना 2027 में कुल 40 प्रश्नों की प्रश्नावली तैयार की गई है, जिसमें कई नए आधुनिक पैरामीटर्स शामिल किए गए हैं:

  • जाति विवरण: आजादी के बाद पहली बार जनगणना फॉर्म में 'अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/जाति' का खुला कॉलम (Open-ended format) रखा गया है, जिसमें नागरिक द्वारा बताई गई जाति को बिना किसी पूर्व-निर्धारित सूची की बाध्यता के सीधे दर्ज किया जाएगा।

  • डिजिटल और पहचान दस्तावेज: यदि उपलब्ध हो तो आधार नंबर, वोटर आईडी, पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस की जानकारी ली जा रही है।

  • स्वास्थ्य एवं वित्तीय स्थिति: व्यक्ति को कोविड-19 टीकाकरण कहां लगा था और उसके पास कुल कितने बैंक खाते हैं, इसका ब्योरा भी शामिल है।

  • शिक्षा, डिजिटल साक्षरता और रोजगार: शिक्षा के स्तर के साथ-साथ डिजिटल साक्षरता (कंप्यूटर/इंटरनेट के इस्तेमाल की क्षमता), व्यवसाय, उद्योग का प्रकार और कार्य विवरण पूछा जाएगा।

  • जनसांख्यिकीय डेटा: नाम, मुखिया से संबंध, जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, शादी के समय उम्र, धर्म, मातृभाषा और प्रवासन (Migration) का इतिहास दर्ज किया जाएगा।

पूरी तरह पेपरलेस और 'Census 2027-PE' मोबाइल ऐप का इस्तेमाल

जनगणना 2027 भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना है। जो नागरिक 31 अगस्त तक ऑनलाइन सेल्फ-इन्यूमिरेशन नहीं करेंगे, उनके घरों में आने वाले प्रगणक भी कागजी फॉर्म के बजाय आधिकारिक 'Census 2027-PE' मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए सीधे डेटा डिजिटल रूप में दर्ज करेंगे। सुरक्षा कारणों से भारतीय सेना, आईटीबीपी और अर्धसैनिक बलों की यूनिट्स के लिए डेटा पहले ऑफलाइन/पेपर मोड में संकलित किया जाएगा और बाद में स्पेशल चार्ज ऑफिसर्स द्वारा सिस्टम में फीड किया जाएगा।

दो चरणों की रूपरेखा और राष्ट्रीय परिदृश्य

यह महाभियान दो चरणों में विभाजित है। पहले चरण में मकानों की सूची और आवासीय सुविधाओं (House Listing & Housing Operations) का डेटा दर्ज किया गया, जिसमें पेयजल, बिजली, शौचालय, इंटरनेट और संपत्ति के साधनों से जुड़े 33 सवाल शामिल थे। अब दूसरा चरण जनसंख्या गणना का है। लद्दाख की लगभग 2.74 लाख आबादी और जम्मू-कश्मीर के सीमांत व पहाड़ी क्षेत्रों की आबादी को इस विशेष चक्र में गिना जा रहा है। 1 से 5 अक्टूबर 2026 तक रिवीजन राउंड पूरा होने के साथ ही दुर्गम इलाकों का चरण समाप्त होगा, जबकि शेष भारत के लिए अंतिम फील्ड डेटा संकलन मार्च 2027 तक पूरा किया जाएगा।

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