कैंसर मरीजों को ट्रेन में इस खास इमरजेंसी कोटे से मिलता है कन्फर्म टिकट! रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया पूरा प्रोसेस
विशेष रेलवे व राष्ट्रीय रिपोर्टर, नई दिल्ली: गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों, खासकर कैंसर पीड़ितों के लिए दूरदराज के बड़े अस्पतालों तक इलाज के लिए यात्रा करना एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। कई बार ऐन वक्त पर अस्पतालों में डॉक्टरों का अपॉइंटमेंट तो मिल जाता है, लेकिन ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट के कारण कन्फर्म टिकट (Confirmed Train Ticket) न मिलने से इलाज में देरी हो जाती है। देश के लाखों मरीजों की इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने विशेष व्यवस्था की है।
हाल ही में संसद (राज्यसभा) में सांसदों द्वारा पूछे गए सवालों का लिखित जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि कैंसर मरीजों और उनके साथ यात्रा करने वाले अटेंडेंट (देखभालकर्ता) के लिए रेलवे में एक खास 'इमरजेंसी कोटा' (Emergency Quota - EQ) निर्धारित किया गया है। इस व्यवस्था के जरिए कैंसर पीड़ित मरीज बिना किसी लंबी वेटिंग का दर्द झेले प्राथमिकता के आधार पर कन्फर्म सीट प्राप्त कर सकते हैं।
रेल मंत्री ने बताया कि भारतीय रेलवे ने पहचान की गई प्रमुख ट्रेनों में कैंसर मरीजों और उनके सहायकों की आपातकालीन यात्रा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निश्चित संख्या में बर्थ आरक्षित रखी हैं। जो मरीज इलाज या नियमित जांच के लिए एक शहर से दूसरे शहर जाना चाहते हैं, वे रेलवे की इस आधिकारिक सुविधा का लाभ उठाकर सीधी कन्फर्म सीट हासिल कर सकते हैं।
जानिए कैसे मिलता है कैंसर मरीजों को कन्फर्म टिकट और किराए में भारी छूट: स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
भारतीय रेलवे के मौजूदा नियमों के अनुसार, पहचान की गई ट्रेनों में कैंसर मरीजों और उनके अटेंडेंट के लिए प्रत्येक ट्रेन में कुल 12 बर्थ या सीटें इमरजेंसी कोटे के तहत विशेष रूप से आरक्षित की जाती हैं। श्रेणीवार सीटों का विवरण इस प्रकार है:
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स्लीपर क्लास (Sleeper Class): 4 बर्थ
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एसी 3-टियर (3A): 2 बर्थ
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एसी 2-टियर (2A): 2 बर्थ
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फर्स्ट क्लास (First Class): 2 बर्थ
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एसी चेयर कार (AC Chair Car): 2 सीटें
इन सीटों तक पहुंच बनाने के लिए कैंसर मरीजों को रेलवे के सामान्य टिकट बुकिंग विंडो या नजदीकी इमरजेंसी कोटा कंट्रोलिंग अथॉरिटी (EQ Controlling Authority) से संपर्क करना होता है।
कन्फर्म टिकट पाने और लाभ उठाने की पूरी प्रक्रिया:
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मेडिकल कन्सेशन सर्टिफिकेट (Concession Certificate) बनवाएं:
कैंसर पीड़ित मरीज को केंद्र या राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी कैंसर अस्पताल या संस्थान के प्रभारी अधिकारी (Officer-in-Charge) या डॉक्टर से हस्ताक्षरित 'कंसेशन सर्टिफिकेट' (छूट प्रमाण पत्र) प्राप्त करना अनिवार्य है। इस प्रमाण पत्र में मरीज की बीमारी, इलाज की स्थिति और यात्रा की आवश्यकता का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
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पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) काउंटर पर आवेदन:
मरीज या उनके परिजन रेलवे स्टेशन पर स्थित कंप्यूटरीकृत पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) काउंटर पर जाकर रियायती टिकट फॉर्म भरते हैं। कंसेशन सर्टिफिकेट जमा करते ही प्रणाली उन्हें सामान्य कोटे के अलावा सीधे 'कैंसर पेशेंट इमरजेंसी कोटा' या आपातकालीन कोटे में आवेदन करने की अनुमति देती है।
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इमरजेंसी कोटा (EQ) सेल में दस्तावेज प्रस्तुत करें:
यदि ट्रेन में सामान्य सीटें फुल हैं या लंबी वेटिंग चल रही है, तो यात्री अपने संबंधित रेलवे मंडल (Divisional Railway Office - DRM Office) या प्रमुख स्टेशन के इमरजेंसी कोटा (EQ) सेल में जाकर अपना आवेदन पत्र, टिकट और मेडिकल दस्तावेज जमा कर सकते हैं। अधिकारी दस्तावेज की प्रमाणिकता और यात्रा की अति-आवश्यकता की जांच करने के बाद निर्धारित 12 सीटों में से तुरंत कन्फर्म बर्थ आवंटित कर देते हैं।
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किराए में 75% से 100% तक की भारी छूट:
भारतीय रेलवे केवल कन्फर्म टिकट ही प्रदान नहीं करता, बल्कि कैंसर मरीजों को ट्रेन किराए में 75% से लेकर 100% तक की भारी रियायत (Ticket Discount) भी देता है।
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स्लीपर, एसी 3-टियर और एसी चेयर कार में मरीज को किराए में 75% से 100% की छूट मिलती है।
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एसी 1-टियर और एसी 2-टियर में 50% से 75% तक की छूट दी जाती है।
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मरीज के साथ यात्रा करने वाले एक अटेंडेंट को भी किराए में 75% तक की रियायत प्रदान की जाती है ताकि मरीज को सफर के दौरान कोई असुविधा न हो।
रेल मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि हाई ऑफिशियल रिक्विजिशन (HOR) धारकों, जैसे सांसदों, मंत्रियों और न्यायाधीशों के लिए जो इमरजेंसी कोटा होता है, उससे इतर कैंसर मरीजों के लिए इस मानवीय कोटे को विशेष प्राथमिकता दी जाती है।
जरूरी दस्तावेज जो आपके पास होने चाहिए:
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सरकारी मान्यता प्राप्त अस्पताल का कंसेशन सर्टिफिकेट (मूल प्रति)।
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मरीज और अटेंडेंट का वैध पहचान पत्र (आधार कार्ड, वोटर आईडी या पैन कार्ड)।
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अस्पताल का डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन या अपॉइंटमेंट स्लिप।
यदि आपके परिवार या आसपास में कोई कैंसर पीड़ित व्यक्ति इलाज के लिए लंबी दूरी की ट्रेन यात्रा करने जा रहा है, तो वे दलालों के चक्कर में पड़ने या तत्काल टिकट के लिए परेशान होने के बजाय रेलवे के इस आधिकारिक इमरजेंसी कोटे का लाभ उठाकर रियायती दरों पर कन्फर्म सीट प्राप्त कर सकते हैं।