लिकर कंपनियों को FSSAI की बड़ी राहत: Old Monk, McDowell's समेत बैन किए गए शराब के पुराने स्टॉक को बेचने के लिए मिला 90 दिन का समय

लिकर कंपनियों को FSSAI की बड़ी राहत: Old Monk, McDowell's समेत बैन किए गए शराब के पुराने स्टॉक को बेचने के लिए मिला 90 दिन का समय

देश के शराब उद्योग (Liquor Industry) और बेवरेज मैन्युफैक्चरर्स के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की तरफ से एक बड़ी और बहुप्रतीक्षित राहत भरी खबर सामने आई है। कृत्रिम सुगंध (Artificial Flavouring Agents) के अनधिकृत उपयोग और बॉटल्स पर किए गए भ्रामक लेबलिंग दावों के चलते जिन लोकप्रिय शराब ब्रांड्स की बिक्री और उत्पादन पर नियामकीय रोक लगाई गई थी, उनके पहले से तैयार पड़े मौजूदा स्टॉक (Unsold Inventory) को निपटाने के लिए FSSAI ने कंपनियों को 90 दिनों का अतिरिक्त समय देने का आधिकारिक फैसला किया है। खाद्य नियामक के इस कदम से यूनाइटेड स्पिरिट्स (United Spirits), मोहन मीकिन (Mohan Meakin), इनब्रू बेवरेजेस और एसोसिएटेड अल्कोहॉल्स जैसी प्रमुख कंपनियों के गोदामों में बंद पड़े करोड़ों रुपये के स्टॉक को नष्ट होने से बचाया जा सकेगा।

FSSAI की कार्रवाई और 90 दिनों की राहत का पूरा घटनाक्रम

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने हाल ही में 'अल्कोहॉलिक बेवरेजेज रेगुलेशंस, 2018' के तहत देश भर में कई शराब डिस्टिलरीज और बॉटलिंग प्लांट्स का सघन निरीक्षण किया था। इस दौरान सेंट्रल लैबोरेटरी टेस्टिंग में पाया गया कि कई प्रमुख व्हिस्की और रम ब्रांड्स में ऐसे बाहरी फ्लेवरिंग एजेंट्स और सुगंधित एक्स्ट्रेक्ट्स मिलाए जा रहे थे, जिनकी अनुमति खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत नहीं है।

FSSAI के मानकों के अनुसार व्हिस्की, रम, ब्रांडी या वोडका का प्राकृतिक स्वाद उनके मूल कच्चे माल और पारंपरिक आसवन व परिपक्वता (Fermentation, Distillation & Maturation) प्रक्रिया से ही आना चाहिए, न कि कृत्रिम एसेंस से। इसके बाद नियामक ने प्रभावित ब्रांड्स के नए उत्पादन (Production) और बाजार में बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। इस फैसले के खिलाफ शराब कंपनियों के शीर्ष संगठनों—जैसे 'कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहॉलिक बेवरेज कंपनीज' (CIABC) ने सरकार और FSSAI से संपर्क कर भारी वित्तीय नुकसान और राज्यों के आबकारी राजस्व (Excise Revenue) के संकट की दुहाई दी थी, जिसके बाद FSSAI ने 90 दिनों की यह सशर्त ट्रांजिशन विंडो प्रदान की है।

किन दिग्गज कंपनियों और लोकप्रिय ब्रांड्स को मिली है यह राहत?

FSSAI की जांच और रोक के दायरे में देश के कई सबसे ज्यादा बिकने वाले और प्रतिष्ठित शराब ब्रांड्स के चुनिंदा वेरिएंट्स शामिल थे:

  • यूनाइटेड स्पिरिट्स (Diageo India): मैकडॉवेल्स नं. 1 रम (McDowell's No.1 Rum), रॉयल चैलेंज व्हिस्की (Royal Challenge Whisky) और एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की (Antiquity Blue) के चिन्हित वेरिएंट्स।

  • मोहन मीकिन / मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर: देश की सबसे लोकप्रिय रम 'ओल्ड मोंक' (Old Monk) के प्रमुख संस्करण—ओल्ड मोंक द लीजेंड, गोल्ड रिजर्व और XXX मैच्योर्ड रम।

  • इनब्रू बेवरेजेस (Inbrew): बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की (Bagpiper Deluxe Whisky) और ओल्ड कास्क डीलक्स रम (Old Cask Deluxe Rum)।

  • एसोसिएटेड अल्कोहॉल्स एंड ब्रूवरीज: सेंट्रल प्रोविंस व्हिस्की और मैकडॉवेल्स नं. 1 सेलिब्रेशन रम के बैच।

90 दिनों में स्टॉक बेचने के लिए FSSAI ने रखीं ये 4 सख्त शर्तें

FSSAI ने साफ कर दिया है कि यह 90 दिन की छूट किसी भी तरह की खुली छूट नहीं है, बल्कि कंपनियों को नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा:

  1. सशर्त पब्लिक नोटिस जारी करना: शराब कंपनियों को समाचार पत्रों और सार्वजनिक माध्यमों में स्पष्ट पब्लिक डिस्क्लेमर देना होगा कि संबंधित बैच में अतिरिक्त फ्लेवर या एसेंस का उपयोग किया गया है।

  2. भ्रामक 'एज क्लेम' पर सख्त पाबंदी: बॉटल के लेबल पर 'Aged', 'Matured' या शराब कितने साल पुरानी है, इसको लेकर किसी भी प्रकार का भ्रामक दावा करने की अनुमति नहीं होगी। यदि उत्पाद में सबसे युवा स्पिरिट का अनुपात है, तो उसका सही ब्योरा देना अनिवार्य होगा।

  3. नए उत्पादन पर पूर्ण रोक: यह 90 दिनों की मोहलत केवल उसी इन्वेंट्री के लिए मान्य है जो नोटिस जारी होने की तारीख से पहले बोतलबंद हो चुकी थी या गोदामों में डिस्पैच के लिए तैयार थी। किसी भी नए बैच का निर्माण पुराने फॉर्मूले पर नहीं किया जा सकेगा।

  4. इन्वेंट्री की राज्यवार ट्रैकिंग: कंपनियों को FSSAI और संबंधित राज्य आबकारी विभागों को हर राज्य में मौजूद अनसोल्ड स्टॉक का सटीक डेटा सौंपना होगा ताकि समयसीमा खत्म होने के बाद एक भी गैर-मानक बोतल बाजार में न बचे।

बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा था मामला: लेबलिंग और एक्साइज की पेचीदगी

FSSAI के शुरुआती कड़े आदेश के खिलाफ यूनाइटेड स्पिरिट्स और मोहन मीकिन जैसी कंपनियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। कंपनियों के वकीलों ने अदालत के समक्ष दलील दी थी कि शराब का निर्माण दशकों पुरानी स्थापित रेसिपी और राज्य आबकारी नियमों के तहत अनुमोदित लेबल्स के साथ किया जा रहा है।

शराब उद्योग में हर राज्य के अपने अलग एक्साइज नियम होते हैं, जहां लेबल का नवीनीकरण और पंजीकरण साल में एक बार (अप्रैल या जुलाई में) होता है। ऐसे में रातों-रात पूरे देश के बाजार से बॉटल्स वापस मंगाना या उनके लेबल बदलना लॉजिस्टिक्स और कानूनी रूप से असंभव था। FSSAI द्वारा 90 दिनों की बिक्री की अनुमति दिए जाने से अब कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन खाली करने और नए मानकों के अनुरूप संशोधित लेबल तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिल गया है।

शराब उपभोक्ताओं और लिकर बाजार पर इस फैसले का सीधा असर

इस फैसले से शराब के खुदरा बाजार (Retail Liquor Shops) में संभावित किल्लत का संकट टल गया है। यदि FSSAI के आदेश के बाद पुराने स्टॉक को तुरंत जब्त कर लिया जाता, तो देश भर के वेंडर्स को भारी आर्थिक नुकसान होता और ग्राहकों को अपने पसंदीदा ब्रांड्स की अचानक कमी का सामना करना पड़ता।

अगले 90 दिनों के भीतर शराब कंपनियां अपने उत्पादों के इंग्रीडिएंट्स और लेबलिंग में FSSAI के संशोधित 2026 मानकों के अनुसार बदलाव करेंगी। इसके बाद बाजार में आने वाली नई बॉटल्स पर अधिक पारदर्शी जानकारी, सही अल्कोहल प्रतिशत (ABV), वैधानिक चेतावनी और प्राकृतिक सामग्रियों का पूरा विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज होगा। FSSAI का यह संतुलनकारी कदम उद्योग को आर्थिक झटके से बचाते हुए उपभोक्ता सुरक्षा और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत कदम माना जा रहा है।

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