चीनी आयात का बड़ा फैसला: त्योहारी सीजन से पहले सरकार ने दी राहत, जानिए आम जनता पर क्या होगा असर
आगामी त्यौहारी सीजन—जिसमें गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े पर्व शामिल हैं—से ठीक पहले देश में चीनी की खुदरा कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 10 लाख मीट्रिक टन (1 Million Tonnes) कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात (Duty-Free Import) को हरी झंडी दे दी है।
आयात करने की नौबत क्यों आई?
घरेलू बाजार में चीनी के आयात की जरूरत पड़ने के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण जिम्मेदार रहे हैं:
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गन्ने के उत्पादन और स्टॉक में कमी: इस वर्ष मानसून की अनिश्चितता और आगामी चीनी सत्र (2025-26) में गन्ने की पैदावार प्रभावित होने की आशंका के कारण चीनी मिलों के पास शुरुआती स्टॉक (Opening Stock) कम रहने का अनुमान लगाया गया है।
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एथेनॉल निर्माण में डायवर्जन: गन्ने के रस और सीरे के एक बड़े हिस्से को पेट्रोल में मिलाने वाले एथेनॉल के उत्पादन में डायवर्ट किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप शुद्ध चीनी के कुल उत्पादन में मामूली गिरावट दर्ज की गई है।
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त्यौहारी मांग का दबाव: अगस्त से नवंबर के बीच त्योहारी सीजन के दौरान देश भर में मिठाइयों और प्रोसेस्ड फूड्स की मांग अपने चरम पर होती है। बाजार में चीनी की संभावित कमी की आशंका से थोक कीमतें बढ़ने लगी थीं।
निर्यात से आयात का सफर: आखिर चूक कहाँ हुई?
भारत पारंपरिक रूप से यूएई, बांग्लादेश, श्रीलंका और अफगानिस्तान जैसे देशों को चीनी का निर्यात करके विदेशी मुद्रा अर्जित करता रहा है। हालांकि, मौजूदा स्थिति रातों-रात नहीं बदली है:
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अनुमान में चूक: सत्र की शुरुआत में सरकार ने करीब 8 लाख टन से अधिक चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी। लेकिन जैसे ही घरेलू स्टॉक में गिरावट के संकेत मिले, सरकार ने मई के महीने में चीनी के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी।
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जमाखोरी पर कड़ा शिकंजा: बाजार में कृत्रिम किल्लत या कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने बड़े औद्योगिक खरीदारों (जैसे कोल्ड ड्रिंक्स और कंफेक्शनरी निर्माता कंपनियां) के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा को 30 दिनों से घटाकर केवल 15 दिन कर दिया है।
आम जनता और बाजार पर क्या होगा असर?
कच्चे माल पर से 100% कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह हटाने का मुख्य उद्देश्य यही है कि विदेशों से आने वाली कच्ची चीनी आसानी से भारत पहुंचे और स्थानीय मिलों में रिफाइन होकर घरेलू बाजार में किफायती दामों पर उपलब्ध हो सके। सरकार का यह कदम खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों को स्थिर रखने के लिए उठाया गया है, ताकि आम उपभोक्ताओं को त्यौहारी सीजन के दौरान महंगाई की मार न झेलनी पड़े।