डिजिटल अरेस्ट गैंग पर बड़ा प्रहार, 16 राज्यों में छापेमारी; सुप्रीम कोर्ट के नाम पर चल रही थी ठगी

डिजिटल अरेस्ट गैंग पर बड़ा प्रहार, 16 राज्यों में छापेमारी; सुप्रीम कोर्ट के नाम पर चल रही थी ठगी

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर आम जनता को चूना लगाने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर क्राइम नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से मिली शिकायत के बाद सीबीआई ने एक साथ 16 राज्यों में 80 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की है। इस कार्रवाई ने उस संगठित साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जो डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर लोगों को डरा-धमकाकर करोड़ों की उगाही कर रहा था।

सुप्रीम कोर्ट की फर्जी वेबसाइट से बना रहे थे शिकार

जांच में खुलासा हुआ कि यह शातिर गिरोह सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट से मिलती-जुलती एक फर्जी वेबसाइट चला रहा था। जालसाज इस फर्जी डोमेन का उपयोग करके खुद को कानूनी अधिकारी के रूप में पेश करते थे। वे पीड़ितों को डराने के लिए जाली अदालती आदेश (Fake Court Orders) और फर्जी सरकारी दस्तावेज अपलोड करते थे, जिससे लोग डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंस जाते थे। यह नेटवर्क न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय था।

60 टीमों का 'ऑपरेशन चक्र-VI'

सीबीआई ने इस नेटवर्क को उखाड़ फेंकने के लिए 'ऑपरेशन चक्र-VI' लॉन्च किया। इसके तहत 60 विशेष टीमों का गठन किया गया, जिन्होंने पंजाब, दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और ओडिशा सहित कुल 16 राज्यों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान चेन्नई से बी. नरेश और कोलकाता से संजीब साहा को गिरफ्तार किया गया है। ये दोनों आरोपी शेल कंपनियां बनाने और म्यूल बैंक खाते (Mule Bank Accounts) खोलने के मुख्य सूत्रधार थे, जिनका इस्तेमाल 2 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई को ठिकाने लगाने के लिए किया गया था।

क्या है डिजिटल अरेस्ट का जाल

साइबर अपराधी फोन पर खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट की धमकी देते हैं। वे पीड़ित को घंटों तक वीडियो कॉल पर रहने को मजबूर करते हैं और यह विश्वास दिलाते हैं कि वे जांच के दायरे में हैं। सीबीआई ने साफ किया है कि कोई भी वैध एजेंसी कभी भी 'डिजिटल अरेस्ट' का प्रावधान लागू नहीं करती है। जांच के दौरान बरामद डिजिटल उपकरण, मोबाइल और बैंक रिकॉर्ड्स को फोरेंसिक लैब में भेजा गया है। विदेशी नागरिकों के भी इस ठगी का शिकार होने की आशंका के चलते सीबीआई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ भी समन्वय कर रही है। आने वाले दिनों में इस बड़े रैकेट से जुड़े कई और चेहरों के बेनकाब होने की संभावना है।

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