सुप्रीम कोर्ट ने बैंक अकाउंट फ्रीज मामले में ED से पूछा सवाल, क्या TMC को रोजमर्रा के खर्चों के लिए खातों से रकम निकालने की अनुमति
पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) और केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बीच चल रहे बैंक खाता फ्रीज विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान ईडी से यह सवाल किया है कि क्या पार्टी को उसके रोजमर्रा के कामकाज और दैनिक खर्चों को चलाने के लिए फ्रीज किए गए खातों से एक सीमित राशि निकालने की अनुमति दी जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई सुनवाई और बेंच की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान टीएमसी की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने पक्ष रखते हुए दलील दी कि बैंक खाते पूरी तरह फ्रीज होने के कारण पार्टी आर्थिक रूप से पूरी तरह घिर गई है। स्थिति यह है कि कर्मचारियों को वेतन देने और कानूनी खर्चों को पूरा करने के लिए भी पैसे नहीं बच पा रहे हैं। इस पर अदालत ने ईडी से विचार करने को कहा कि क्या कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी (Special Officer) के माध्यम से पार्टी को एक सीमित राशि निकालने की छूट दी जा सकती है, ताकि आंतरिक व प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो।
क्या है पूरा बैंक अकाउंट फ्रीज विवाद और ED की कार्रवाई
यह पूरा मामला मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय की जांच से जुड़ा हुआ है। ईडी ने वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध लेन-देन के आरोपों के चलते टीएमसी के कई बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था, जिनमें बड़े पैमाने पर फंड जमा होने की बात सामने आई थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि पार्टी के फंड से कुछ शेल कंपनियों और विमान-हेलीकॉप्टर खरीद से जुड़े लेन-देन में पैसों को घुमाया गया था। इसके खिलाफ टीएमसी ने पहले कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां से पार्टी को अंतरिम राहत नहीं मिली थी। हाईकोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देते हुए पार्टी सुप्रीम कोर्ट पहुंची है।
टीएमसी की दलीलें और आगे की कानूनी प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी के वकीलों ने जोर देकर कहा कि ईडी की यह कार्रवाई अनुपातहीन और तथ्यों से परे है। पार्टी का कहना है कि रूटीन खर्चों और राजनीतिक गतिविधियों के संचालन पर रोक लगने से उनका लोकतांत्रिक कामकाज बाधित हो रहा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी मामले के गुण-दोष (Merits) पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है, लेकिन दैनिक खर्चों और अंतरिम व्यवस्था के लिए एक सीमित राहत देने के बिंदु पर ईडी से निर्देश लेकर अदालत को अवगत कराने को कहा है। इस मामले पर अब अगले सप्ताह फिर से सुनवाई होगी।