'उत्तर भारतीय' होने पर जमानत के विरोध का तर्क नहीं चलेगा: मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस को लगाई कड़ी फटकार

'उत्तर भारतीय' होने पर जमानत के विरोध का तर्क नहीं चलेगा: मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस को लगाई कड़ी फटकार

भारतीय न्याय व्यवस्था में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानून के समक्ष समानता को सर्वोपरि स्थान दिया गया है। इसी कड़ी में मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और सख्त टिप्पणी करते हुए तमिलनाडु पुलिस को बड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने एक धोखाधड़ी के मामले में आरोपी की जमानत का विरोध केवल इस आधार पर करने के रवैये को पूरी तरह खारिज कर दिया कि आरोपी 'उत्तर भारतीय' है और पुलिस को आशंका है कि वह राज्य से फरार हो सकता है। हाईकोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति का मूल निवास स्थान यह मान लेने का आधार नहीं हो सकता कि वह कानून से भागेगा।

मद्रास हाईकोर्ट ने पुलिस के तर्क को नकारा

मामلا चेन्नई का है, जहां मद्रास हाईकोर्ट में एक धोखाधड़ी मामले से जुड़े जमानत आवेदन पर सुनवाई चल रही थी। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एन. रमेश ने पुलिस और अभियोजन पक्ष के उस तर्क पर कड़ी आपत्ति जताई जिसमें आरोपी के उत्तर भारत से होने के कारण उसके राज्य से भागने की आशंका जताई गई थी।

अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि पुलिस अधिकारियों द्वारा कोर्ट में दाखिल किए जाने वाले हलफनामों में इस तरह की क्षेत्रीय या पूर्वाग्रह से ग्रसित बातें बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। अदालत ने कानून के दायरे में निष्पक्ष जांच और व्यक्तिगत अधिकारों की महत्ता को रेखांकित करते हुए आरोपी अंकुर कुमार जानी को कुछ जरूरी शर्तों के साथ जमानत प्रदान कर दी और जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारी के समक्ष सहयोग करने का निर्देश दिया।

क्या है पूरा मामला और विवाद

यह पूरा कानूनी विवाद प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान FIITJEE लिमिटेड और कोयंबटूर स्थित सुगुना पीआईपी स्कूल के बीच छात्रों को संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) की कोचिंग प्रदान करने के लिए हुए एक समझौते से जुड़ा हुआ है। इस समझौते के नियमों के अनुसार, कोर्स में दाखिला लेने वाले प्रत्येक छात्र के अभिभावक को 1 लाख रुपये का रिफंडेबल कॉशन डिपॉजिट जमा कराना था।

शिकायत के मुताबिक, संबंधित संस्थानों ने वादा करने और कोर्स संचालित करने के बावजूद यह रिफंडेबल पैसा वापस नहीं लौटाया। इसके बाद एक अभिभावक की शिकायत पर FIITJEE के दिनेश कुमार गोयल और स्कूल के लक्ष्मी नारायणसामी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया। पुलिस जांच के दौरान जमानत के लिए आवेदन करने वाले अंकुर कुमार जानी का नाम मूल शिकायत या शुरुआती एफआईआर में शामिल नहीं था।

पुलिस ने क्यों बनाया था आरोपी

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अंकुर कुमार जानी को इस मामले में केवल इसलिए घसीटा गया और आरोपी बनाया गया क्योंकि उन्होंने 26 फरवरी 2011 को FIITJEE की ओर से स्कूल के साथ एक व्यावसायिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। पुलिस का आरोप था कि इन सभी ने मिलकर 262 अभिभावकों के साथ धोखाधड़ी की और करीब 2.62 करोड़ रुपये हड़प लिए। हालांकि, इस मामले में मुख्य आरोपी को फरार बताया जा रहा है, जबकि अन्य आरोपी को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है। हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद पुलिस प्रशासन को अपनी कार्यशैली में सुधार करने और इस प्रकार के निराधार तर्कों से बचने की सख्त नसीहत मिली है।