बरुईपुर छात्रा रेप-मर्डर: हाउस अरेस्ट के दावों के बीच सड़क पर उतरीं ममता, कैंडल मार्च कर सरकार के खिलाफ फूंका बिगुल
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बरुईपुर में एक 11 साल की मासूम के साथ हुए वीभत्स बलात्कार और हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस जघन्य अपराध को लेकर स्थानीय लोगों के आक्रोश के साथ-साथ राज्य की राजनीति भी पूरी तरह से गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए सोमवार को कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आवास के बाहर एक विशाल कैंडल मार्च का नेतृत्व किया और मौजूदा सरकार के खिलाफ न्याय की हुंकार भरी।
नजरबंदी के आरोपों के बीच ममता का 'कैंडल मार्च'
रविवार रात से ही टीएमसी नेताओं द्वारा यह आरोप लगाया जा रहा था कि बरुईपुर जाने से रोकने के लिए पुलिस ने ममता बनर्जी को उनके ही घर में नजरबंद (House Arrest) कर दिया है। उनके आवास के बाहर भारी पुलिस बल और बैरिकेड्स लगा दिए गए थे। हालांकि, इन तमाम दावों और पाबंदियों के बीच ममता बनर्जी सोमवार शाम को सड़क पर उतरीं। उनके साथ भारी संख्या में टीएमसी कार्यकर्ता भी मौजूद थे, जिन्होंने इस वीभत्स घटना के विरोध में अपनी आवाज बुलंद की। ममता का यह कदम दर्शाता है कि वह अब इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
पीड़ित परिवार के दर पर पहुंचा टीएमसी प्रतिनिधिमंडल
बरुईपुर इलाके में तनावपूर्ण स्थिति और निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद, टीएमसी के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को इलाके का दौरा किया। इस डेलिगेशन में बंगाल विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष बिमान बनर्जी, राज्यसभा सांसद डोला सेन और जयनगर की सांसद प्रतिमा मंडल शामिल थीं।
डोला सेन ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वे ममता बनर्जी के प्रतिनिधि के रूप में आए हैं। उन्होंने पीड़िता के माता-पिता से अलग-अलग मुलाकात कर उन्हें कानूनी सहायता का पूरा भरोसा दिया। वहीं, बिमान बनर्जी ने पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस को अपराधियों को पकड़ने में अधिक मुस्तैदी दिखानी चाहिए थी। उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर आरोप लगाया कि टीएमसी नेताओं के काफिले की कई जगह तलाशी ली गई, ताकि यह चेक किया जा सके कि कहीं ममता बनर्जी खुद तो उनके साथ नहीं आ रही हैं।
बरुईपुर में तनाव बरकरार, धारा-163 लागू
रविवार को मासूम बच्ची का शव एक तालाब में बोरी में बंद मिलने के बाद इलाके में भयंकर बवाल हुआ था। गुस्साई भीड़ ने सड़क जाम की, आगजनी की, पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ की और रेप के शक में एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस भारी उपद्रव के बाद पुलिस ने बरुईपुर, नरेंद्रपुर और सोनारपुर थाना क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा-163 (निषेधाज्ञा) लागू कर दी है। इलाके में भारी पुलिस बल और सुरक्षा जवानों को तैनात किया गया है।
मुख्य आरोपी आनंद सरदार गिरफ्तार, SIT गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने स्थानीय अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई में सोमवार को मामले के मुख्य आरोपी आनंद सरदार को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा दो अन्य संदिग्धों की भी गिरफ्तारी हुई है और तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
सीएम शुभेंदु अधिकारी का सख्त एक्शन: 'दोषियों को मिलेगी फांसी'
राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस घटना को बेहद भयानक करार देते हुए कहा कि उनकी सरकार पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। सीएम ने सख्त लहजे में कहा कि दोषियों को फांसी की सजा दिलवाई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने इस मामले में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों को लेकर टीएमसी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्य अपराध के अलावा भीड़ हिंसा, रेलवे ट्रैक उखाड़ने और सीआरपीएफ जवानों पर हमले के मामले में अलग से तीन केस दर्ज किए गए हैं। शुभेंदु अधिकारी ने साफ इशारा किया कि चुनाव में हार से हताश कुछ स्थानीय टीएमसी नेताओं ने जानबूझकर इस हिंसा और सांप्रदायिक तनाव की साजिश रची है, जिन्हें कतई बख्शा नहीं जाएगा।
टीएमसी ने नकारे सीएम के आरोप
टीएमसी सांसद प्रतिमा मंडल ने मुख्यमंत्री के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सत्ताधारी दल विपक्ष को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने सफाई दी कि टीएमसी की ओर से कोई सांप्रदायिक उकसावा या हंगामा नहीं किया गया, वे सिर्फ पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे थे। दूसरी ओर, आरजी कर मामले की पीड़िता की मां और भाजपा विधायक रत्ना देबनाथ ने टीएमसी पर पलटवार करते हुए कहा कि राज्य में हो रहे ऐसे अपराध पिछली टीएमसी सरकार के दौरान फैले भ्रष्टाचार और लचर सिस्टम का ही नतीजा हैं।