Amarnath Yatra 2026: अमरनाथ यात्रा के लिए खुलेगा द्रास से तीसरा नया रास्ता? मात्र 2 घंटे में हो जाएगी पवित्र गुफा की चढ़ाई, एलजी ने मांगी रिपोर्ट

Amarnath Yatra 2026: अमरनाथ यात्रा के लिए खुलेगा द्रास से तीसरा नया रास्ता? मात्र 2 घंटे में हो जाएगी पवित्र गुफा की चढ़ाई, एलजी ने मांगी रिपोर्ट

बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाने वाले करोड़ों शिव भक्तों और अमरनाथ तीर्थयात्रियों के लिए एक बेहद बड़ी और सुखद खबर सामने आ रही है। पवित्र अमरनाथ गुफा (Amarnath Cave) तक पहुंचने की दुर्गम यात्रा को अब और अधिक सुरक्षित, सुगम और आसान बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने द्रास (Drass) के रास्ते एक तीसरे और नए मार्ग के विकास की पुरजोर वकालत की है।

बीजेपी की लद्दाख यूनिट द्वारा रखा गया यह ऐतिहासिक प्रस्ताव 14.15 किलोमीटर लंबी महत्वाकांक्षी 'जोजिला सुरंग' (Zojila Tunnel) के निर्माण कार्य के अंतिम चरण में पहुंचने के बाद आया है। यह ऑल-वेदर टनल लद्दाख के करगिल जिले में स्थित द्रास के मिनिमाग इलाके तक हर मौसम में निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करती है। इसी कनेक्टिविटी का लाभ उठाकर अब अमरनाथ यात्रा को एक ही दिन में पूरा करने का मेगा प्लान तैयार किया जा रहा है।

मिनिमाग से महज 5 किलोमीटर की होगी चढ़ाई, बचेगा भक्तों का समय

बीजेपी के वरिष्ठ नेता ताशी ग्यालसन ने इस नए रूट का पूरा खाका समझाते हुए सुझाव दिया है कि द्रास में जोजिला सुरंग के पूर्वी छोर के पास स्थित मिनिमाग से पवित्र गुफा तक केवल 5 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई का एक नया वैकल्पिक रास्ता तैयार किया जा सकता है। यह मार्ग वर्तमान के बालटाल वाले रास्ते की तुलना में बहुत छोटा, सीधा और अत्यधिक सुरक्षित साबित होगा।

ग्यालसन ने 'ज़ी न्यूज़' से विशेष बातचीत में बताया, "मिनिमाग पहले से ही समुद्र तल से लगभग 10,800 फीट की भारी ऊंचाई पर स्थित है। इस वजह से पारंपरिक बालटाल और पहलगाम मार्गों की तुलना में तीर्थयात्रियों को बहुत कम ऊंचाई चढ़नी पड़ेगी। यह केवल 5 किलोमीटर का आसान ट्रैक होगा, जिसमें बालटाल मार्ग की तरह कोई खतरनाक खड़ी चढ़ाई नहीं होगी।" उन्होंने दावा किया कि इस रास्ते के खुलने से भक्त श्रीनगर या लेह से सुबह चलकर मात्र 1 से 2 घंटे में पवित्र गुफा तक की चढ़ाई पूरी कर सकेंगे और शाम तक वापस लौट आएंगे, जिससे यह पूरी यात्रा महज एक दिन की रह जाएगी।

वर्तमान में अमरनाथ गुफा के लिए हैं दो प्रमुख रास्ते

अभी तक पवित्र अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए देश भर के श्रद्धालुओं के पास केवल दो ही रास्ते उपलब्ध हैं, और दोनों ही मार्गों पर ट्रैकिंग करना काफी मुश्किल और चुनौतीपूर्ण माना जाता है:

  • बालटाल मार्ग: यह छोटा रास्ता (14 किमी) है, लेकिन बेहद खड़ा और ऊबड़-खाबड़ है। इसमें यात्रियों को समुद्र तल से करीब 8,999 फीट की ऊंचाई से शुरू करके 12,756 फीट की ऊंचाई पर स्थित गुफा तक खड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है।

  • पहलगाम मार्ग: इसे अमरनाथ यात्रा का सबसे पारंपरिक मार्ग माना जाता है। यह काफी लंबा (34 किमी) है, जिसमें श्रद्धालुओं को समुद्र तल से लगभग 5,702 फीट की ऊंचाई से शुरू करके पवित्र गुफा तक पहुंचना होता है। इस रास्ते से यात्रा पूरी करने में भक्तों को 2 से 4 दिन का लंबा समय लग जाता है।

इसके विपरीत, प्रस्तावित नया तीसरा रास्ता केवल 5 किलोमीटर का होगा, जिसमें समुद्र तल से महज 1,956 फीट की मामूली चढ़ाई करनी होगी, जिसे कोई भी सामान्य व्यक्ति आसानी से 2 घंटे में पूरा कर सकता है।

लद्दाख के उपराज्यपाल ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट, पर्यावरण को भी मिलेगी राहत

इस तीसरे मार्ग के निर्माण से न केवल हर साल आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी, बल्कि बालटाल और पहलगाम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर पड़ने वाले पर्यावरणीय दबाव (Environmental Pressure) को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

अमरनाथ श्राइन बोर्ड और केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार, लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) ने इस नए रूट को खोलने की वास्तविक संभावनाओं और सुरक्षा का बारीकी से पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय विस्तृत रिपोर्ट (Detailed Project Report) मांगी है। लद्दाख प्रशासन का मानना ​​है कि जोजिला टनल के चालू होते ही यह मार्ग गेम-चेंजर साबित होगा। इससे न केवल अमरनाथ यात्रियों को एक सुरक्षित और सुगम यात्रा का विकल्प मिलेगा, बल्कि लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और वहां की अर्थव्यवस्था को भी एक बड़ा बूस्ट मिलेगा।

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