दुर्गा पूजा में कोलकाता मेट्रो ने रचा नया इतिहास: 6 दिनों में 61.51 लाख यात्रियों ने किया सफर, महाषष्ठी पर उमड़ा जनसैलाब
पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और उल्लास के महापर्व 'दुर्गा पूजा' के दौरान 'सिटी ऑफ जॉय' कोलकाता की जीवनरेखा कही जाने वाली कोलकाता मेट्रो ने आवागमन का एक नया ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। देवी दुर्गा की आराधना और भव्य पंडालों के दर्शन के लिए उमड़े जनसैलाब ने सड़कों के जाम से बचने के लिए भूमिगत और एलिवेटेड मेट्रो नेटवर्क पर जबर्दस्त भरोसा जताया। कोलकाता मेट्रो रेलवे द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष दुर्गा पूजा उत्सव के मुख्य छह दिनों—यानी महापंचमी से लेकर विजयादशमी तक—के दौरान कुल 61.51 लाख (6.15 मिलियन) से अधिक यात्रियों ने मेट्रो की विभिन्न लाइनों पर सुरक्षित और आरामदायक सफर तय किया। यह आंकड़ा पिछले कई वर्षों के त्योहारी ट्रैफिक के सभी पिछले रिकॉर्ड्स को तोड़ते हुए एक नया शिखर छू चुका है। त्योहार के दौरान विशेष रूप से महाषष्ठी के दिन स्टेशनों पर यात्रियों की अभूतपूर्व भीड़ देखने को मिली, जिसने अकेले एक ही दिन में रिकॉर्ड कायम कर दिया।
महाषष्ठी पर उमड़ा सबसे बड़ा रेला: 12.59 लाख यात्रियों ने तोड़े रिकॉर्ड
दुर्गा पूजा में पंडाल-हॉपिंग (Pandal Hopping) का असली रोमांच पंचमी और षष्ठी से ही शुरू हो जाता है। मेट्रो प्रशासन के विश्लेषण के अनुसार, इन छह दिनों में सबसे ज्यादा भीड़ महाषष्ठी के दिन दर्ज की गई। उस एक दिन में शहर भर के विभिन्न मेट्रो कॉरिडोर पर 12,59,322 (12.59 लाख) यात्रियों ने सफर किया। दोपहर होते-होते दक्षिण कोलकाता से लेकर उत्तर कोलकाता के प्रमुख पंडालों से जुड़े स्टेशनों पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा था। इसके अलावा महासप्तमी को 12.18 लाख, महाष्टमी को 11.95 लाख और महानवमी के दिन भी 10.80 लाख से अधिक लोगों ने मेट्रो से अपनी यात्रा पूरी की। दशमी को विसर्जन और उत्सव के समापन के बावजूद लाखों लोग मां को विदाई देने के लिए गंगा घाटों और पूजा स्थलों तक मेट्रो के जरिए ही पहुंचे।
ब्लू लाइन बनी 'लाइफलाइन', ग्रीन लाइन और अंडरवाटर टनल में भी जबर्दस्त उत्साह
कोलकाता मेट्रो के विभिन्न कॉरिडोरों में सबसे पुराना और व्यस्त कॉरिडोर यानी ब्लू लाइन (नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर: दक्षिणेश्वर से कवि सुभाष/न्यू गरिया) भीड़ का सबसे बड़ा केंद्र बना रहा। शहर के सबसे प्रसिद्ध और पारंपरिक पूजा पंडाल इसी कॉरिडोर के स्टेशनों—जैसे कालीघाट, जतिन दास पार्क, शोवाबाजार सुतानुति, दमदम और रवींद्र सरोवर—के आसपास स्थित हैं। केवल ब्लू लाइन पर ही इन छह दिनों में 45 लाख से अधिक यात्रियों ने आवागमन किया।
वहीं दूसरी ओर, हुगली नदी के नीचे से गुजरने वाली देश की पहली अंडरवाटर मेट्रो यानी ग्रीन लाइन (हावड़ा मैदान से सेक्टर-5/एस्प्लेनेड) पर भी यात्रियों का जबर्दस्त आकर्षण देखने को मिला। हावड़ा रेलवे स्टेशन पर लोकल और लंबी दूरी की ट्रेनों से उतरने वाले लाखों उपनगरीय यात्रियों ने सीधे अंडरवाटर ग्रीन लाइन पकड़ी और महज कुछ मिनटों में नदी पार करके कोलकाता के मध्य हिस्से में पहुंच गए। पर्पल लाइन (जोका से तारातला) और ऑरेंज लाइन (कवि सुभाष से रूबी मोड़) ने भी स्थानीय स्तर पर भीड़ को नियंत्रित करने में अहम योगदान दिया।
रातभर दौड़ीं पूजा स्पेशल ट्रेनें: 24 घंटे मुस्तैद रहा मेट्रो प्रशासन
यात्रियों की भारी तादाद और रातभर चलने वाली पंडाल परिक्रमा को सुगम बनाने के लिए कोलकाता मेट्रो रेलवे ने इस बार व्यापक तैयारियां की थीं:
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नाइट-लॉन्ग सर्विसेज (रातभर संचालन): सप्तमी, अष्टमी और नवमी की रातों में मेट्रो ने पूरी रात ट्रेनों का संचालन किया। सामान्य दिनों में रात 9:45 बजे बंद होने वाली सेवाएं तड़के 4:00 से 5:00 बजे तक लगातार 10 से 15 मिनट के अंतराल पर जारी रहीं।
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अतिरिक्त फेरे: सामान्य समय सारिणी के मुकाबले हर दिन दर्जनों अतिरिक्त 'पूजा स्पेशल' ट्रेनें ट्रैक पर उतारी गईं, जिससे स्टेशनों पर यात्रियों को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ा।
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क्राउड मैनेजमेंट और सुरक्षा: प्रमुख और संवेदनशील स्टेशनों पर अतिरिक्त आरपीएफ (RPF) के जवान, महिला सुरक्षा बल और सिविल डिफेंस कर्मी तैनात रहे। बुजुर्गों और बच्चों के लिए अलग लाइनें बनाई गईं और स्वचालित टिकट वेंडिंग मशीनों (ATVM) के पास 'मे आई हेल्प यू' बूथ सक्रिय रहे ताकि टोकन और क्यूआर कोड टिकटिंग में कोई रुकावट न आए।
सड़कों के ट्रैफिक जाम से बचाने का सबसे भरोसेमंद साथी बनी मेट्रो
दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता की सड़कों पर भारी वाहनों, बसों और टैक्सियों का प्रवेश कई इलाकों में प्रतिबंधित रहता है और संकरी गलियों में पैदल चलने वालों की भारी भीड़ के चलते घंटों लंबा जाम लग जाता है। ऐसे में कोलकाता मेट्रो ने न केवल प्रदूषण-मुक्त और वातानुकूलित यात्रा मुहैया कराई, बल्कि शहरवासियों और बाहर से आए लाखों विदेशी व घरेलू पर्यटकों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाया। समयबद्ध संचालन और बिना किसी अप्रिय घटना के 61.51 लाख यात्रियों का सफल प्रबंधन कर कोलकाता मेट्रो ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह बंगाल के सबसे बड़े सांस्कृतिक उत्सव का सबसे मजबूत बुनियादी ढांचा है।