शेयर बाजार में इन दिनों लगातार गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे निवेशकों के बीच चिंता बढ़ती जा रही है। भारतीय बाजार अपने बुरे दौर से गुजर रहा है, और मंगलवार को भी सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 400 अंक तक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 125 अंकों की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था। हालांकि, बाद में बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन निवेशकों में अब भी डर और अनिश्चितता बनी हुई है।
इस बीच, घरेलू ब्रोकरेज हाउस वेंचुरा सिक्योरिटीज ने एक और चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है, जिसमें निफ्टी में और गिरावट की संभावना जताई गई है। आइए जानते हैं क्या कह रहे हैं बाजार विशेषज्ञ।
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निफ्टी में और गिरावट की आशंका – क्या कहते हैं एनालिस्ट?
वेंचुरा सिक्योरिटीज ने 2025 के लिए निफ्टी इंडेक्स के संभावित मंदी के आउटलुक पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर बाजार के मौजूदा ट्रेंड को देखें, तो निफ्टी अभी और नीचे आ सकता है।
ब्रोकरेज फर्म ने ऐतिहासिक बाजार सुधारों का विश्लेषण करते हुए बताया कि अगर वैसे ही वैल्यूएशन पैटर्न दोहराया जाता है, तो निफ्टी 20,510 तक गिर सकता है। यह वही स्तर है जो 2020 के COVID क्रैश के दौरान देखा गया था।
- अत्यधिक मंदी के हालात में, जहां वैल्यूएशन 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट (GFC) के स्तर तक गिरता है, निफ्टी 14,357 तक लुढ़क सकता है।
- वहीं, 12.75X P/E का औसत वैल्यूएशन लिया जाए, तो निफ्टी 17,434 के स्तर तक गिर सकता है, जो अधिक यथार्थवादी सुधार माना जा रहा है।
ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि बाजार का यह गिरता ट्रेंड मौजूदा आर्थिक और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए गंभीर हो सकता है।
मौजूदा बाजार वैल्यूएशन – अभी कहां खड़ा है बाजार?
ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार, CY25 और CY26 के लिए निफ्टी का फॉरवर्ड P/E 18.5X और 16.2X के मल्टी-ईयर निचले स्तर पर आ चुका है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि:
- 2020 में COVID-19 के प्रभाव को वैश्विक मात्रात्मक सहजता (QE) ने कम कर दिया था, जबकि 2008 का GFC अधिक गंभीर था।
- मौजूदा बाजार सुधार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से प्रेरित है, जिससे वैल्यूएशन पर दबाव बना हुआ है।
ब्रोकरेज हाउस का कहना है कि अगर जल्द ही कोई ठोस नीतिगत कदम नहीं उठाए जाते, तो बाजार की गिरावट और गहरा सकती है।
वैश्विक आर्थिक जोखिम जो बाजार को प्रभावित कर सकते हैं
वेंचुरा सिक्योरिटीज ने कई वैश्विक आर्थिक जोखिमों को उजागर किया है, जो बाजार में अस्थिरता बढ़ा सकते हैं:
- अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी में बदलाव – टैरिफ लगाने और व्यापार नीतियों में बदलाव बाजार को प्रभावित कर सकता है।
- राजकोषीय घाटे की चिंताएं – सरकारी खर्च में कटौती की नीतियां बाजार पर दबाव डाल सकती हैं।
- मुद्रास्फीति और ब्याज दरों में वृद्धि – महंगाई और बढ़ती ब्याज दरें बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
- वैश्विक GDP में संकुचन – यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था धीमी पड़ती है, तो इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ेगा।
इन सभी कारकों से बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
क्या बाजार और गिरेगा? आगे क्या होगा?
वेंचुरा सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर बाजार को स्थिर करने के लिए जल्द ही नीतिगत कदम नहीं उठाए जाते, तो गिरावट और भी गहरी हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार:
- अगर मंदी 2020 की तरह नियंत्रित नहीं हुई, तो यह 2008 के वित्तीय संकट से भी ज्यादा गंभीर हो सकती है।
- वर्तमान में वैश्विक बाजार में ओवरवैल्यूएशन की स्थिति बनी हुई है, जिससे गिरावट की संभावना और बढ़ जाती है।
- ब्रोकरेज हाउस की मल्टीपल एनालिसिस पद्धति के अनुसार, यदि आर्थिक स्थिति बिगड़ती है, तो बाजार तेजी से नीचे आ सकता है।
निष्कर्ष: निवेशकों के लिए आने वाले समय में बाजार में सतर्क रहने की जरूरत है। यदि बाजार में गिरावट का ट्रेंड जारी रहता है, तो लॉन्ग-टर्म निवेशकों को अपने निवेश पोर्टफोलियो को मजबूत करने के लिए सोच-समझकर निर्णय लेना होगा।
क्या करें निवेशक?
- घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहें।
- लॉन्ग-टर्म निवेशकों को गिरावट में मजबूत कंपनियों में निवेश करने का मौका मिल सकता है।
- शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को स्टॉप-लॉस के साथ ट्रेड करने की सलाह दी जाती है।
- म्यूचुअल फंड और SIP निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव में घबराने की जरूरत नहीं है।
- कम रिस्क लेने वाले निवेशक गोल्ड, बॉन्ड और अन्य सुरक्षित निवेश विकल्पों पर ध्यान दे सकते हैं।